दीपावली पर चार शुभ योगों का महासंयोग, 8 नवंबर को मनेगा दीपोत्सव

दीपावली पर चार शुभ योगों का महासंयोग, 8 नवंबर को मनेगा दीपोत्सव

बुधादित्य राजयोग, आयुष्मान, सौभाग्य और लक्ष्मी नारायण योग में होगा लक्ष्मी-गणेश पूजन, 6 से 11 नवंबर तक पांच महापर्वों की रहेगी धूम

नागौर. रोशनी, उल्लास और सुख-समृद्धि का महापर्व दीपावली इस बार चार शुभ योगों के संयोग में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। दीपावली 8 नवंबर, रविवार को कार्तिक अमावस्या और स्वाति नक्षत्र के संयोग में मनाई जाएगी। इस बार दीपावली पर बुधादित्य राजयोग, आयुष्मान योग, सौभाग्य योग और लक्ष्मी नारायण योग का विशेष संयोग रहेगा। रमल ज्योतिर्विद पंडित दिनेश प्रेम शर्मा के अनुसार इन शुभ योगों में लक्ष्मी-गणेश पूजन का विशेष महत्व रहेगा। धनतेरस से भाई दूज तक पांच महापर्वों के साथ दीपोत्सव की रौनक रहेगी।

चार शुभ योगों में होगा लक्ष्मी-गणेश पूजन

पंडित दिनेश प्रेम शर्मा के अनुसार इस बार दीपावली पर चार प्रमुख शुभ योग बन रहे हैं। सूर्य और बुध की तुला राशि में युति से बुधादित्य राजयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार यह योग बुद्धि, करियर, व्यापार और आर्थिक उन्नति के लिए शुभ माना जाता है। आयुष्मान योग 8 नवंबर को सुबह 3.28 बजे से शुरू होकर 9 नवंबर को सुबह 3.03 बजे तक रहेगा। इसके बाद सौभाग्य योग का संयोग रहेगा। वहीं शुक्र और बुध की तुला राशि में युति से लक्ष्मी नारायण योग बन रहा है, जिसका प्रभाव पूरे नवंबर माह रहेगा। इसे धन, वैभव और समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है।

दीपावली पर तिथि और शुभ मुहूर्त

8 नवंबर को कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी सुबह 11.28 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी। इस दिन स्वाति नक्षत्र रहेगा। अभिजित मुहूर्त सुबह 11.57 बजे से दोपहर 12.40 बजे तक रहेगा। वहीं राहुकाल शाम 4.24 बजे से शाम 5.46 बजे तक रहेगा। इस अवधि में नए शुभ कार्यों से बचने की मान्यता है।

लक्ष्मी-गणेश पूजन के शुभ मुहूर्त

मुख्य लक्ष्मी पूजन के लिए वृषभ लग्न का समय शाम 6.10 बजे से रात 8.07 बजे तक रहेगा। इसकी अवधि 1 घंटा 57 मिनट है। प्रदोष काल शाम 5.46 बजे से रात 8.22 बजे तक रहेगा। निशिता काल में रात्रि 11.53 बजे से 9 नवंबर को सुबह 12.45 बजे तक पूजन किया जा सकेगा। दीपमाला का समय शाम 6.15 बजे से 7.15 बजे तक रहेगा।

पांच महापर्वों की तिथियां और महत्व
धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का विधान है। प्रदोष काल शाम 5.47 बजे से रात 8.30 बजे तक रहेगा। वृषभ लग्न शाम 6.18 बजे से रात 8.15 बजे तक रहेगा। चौघडिय़ा लाभ बेला रात 9.03 बजे से 10.41 बजे तक रहेगी। रूप चौदस 7 नवंबर को शनिवार को नरक चतुर्दशी और छोटी दीपावली मनाई जाएगी। इसे रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन अभ्यंग स्नान और दीपदान का विशेष महत्व है। दीपावली 8 नवंबर को रविवार को मुख्य दीपावली पर्व मनाया जाएगा। इस दिन लक्ष्मी-गणेश पूजन, दीपदान और दीपमाला की परंपरा निभाई जाएगी। शाम को घरों और प्रतिष्ठानों में दीप जलाकर सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी। गोवर्धन पूजा 9 नवंबर को सोमवार को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है। मान्यता है कि दीपावली की रात जलाया गया अखंड घी का दीपक गोवर्धन पूजा तक प्रज्वलित रखा जाता है। भाई दूज 11 नवंबर को बुधवार को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। यह भाई-बहन के स्नेह और मंगलकामना का प्रतीक है। बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना करेंगी।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *