Priyanka Gandhi ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र, VB-G-RAM-G योजना का बकाया फंड मांगा

Priyanka Gandhi ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र, VB-G-RAM-G योजना का बकाया फंड मांगा

वायनाड (केरलम), दो नवंबर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन-ग्रामीण (वीबी-जीरामजी) के तहत बकाया राशि जारी करने की मांग की है। पार्टी सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। वायनाड से लोकसभा सदस्य ने अपने पत्र में मंत्री का ध्यान उन शिकायतों की ओर दिलाया, जो पिछले महीने निलंबूर में इस केंद्रीय योजना के तहत काम करने वालों के साथ बातचीत के दौरान सामने आई थीं।

पत्र में उन्होंने उल्लेख किया कि नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम ऐप में बार-बार होने वाले बदलावों से श्रमिकों को काफी परेशानी हो रही है। ऐप पर हाजिरी दर्ज करने में आने वाली तकनीकी दिक्कतों की वजह से उन्हें अपने कार्य दिवस गंवाने पड़ रहे हैं। कांग्रेस सांसद ने कहा कि कई बार तो श्रमिकों को दिन में दो बार हाजिरी दर्ज करने में ही लगभग दो घंटे लग जाते हैं।

उन्होंने मंत्री से आग्रह किया कि वह दूर-दराज के इलाकों में, खासकर कठिन परिस्थितियों में, ऐप के इस्तेमाल की समीक्षा करने के लिए एक टीम भेजें। इसके अलावा, उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जिन इलाकों में नेटवर्क कनेक्टिविटी खराब है, वहां जानकारी दर्ज करने के लिए मस्टर रोल का इस्तेमाल किया जाए। अपने पत्र में, उन्होंने जंगलों में काम करने वाली बुजुर्ग महिलाओं के लिए बीमा राशि बढ़ाने की मांग की क्योंकि वहां सर्पदंश और जंगली जानवरों के हमले का खतरा रहता है, और काम के दौरान बीमार पड़ जाने पर उनकी पूरी मजदूरी न देने की परिपाटी को बंद करने का भी आग्रह किया।

प्रियंका ने कहा कि भले ही कानून में वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग जनों और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों के लिए विशेष प्रावधान हैं, फिर भी उन्हें रोजगार पाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पिछली रोजगार गारंटी योजना के विपरीत, इस नयी पहल को लेकर शिकायतें आ रही हैं कि इसमें कौशल को बहुत अधिक महत्व दिया जा रहा है। कांग्रेस सांसद ने अपने वायनाड लोकसभा क्षेत्र में कॉफी की बागवानी पर पड़ रहे असर का मुद्दा भी उठाया, क्योंकि इसे केवल परती भूमि तक ही सीमित कर दिया गया था।

पत्र में उन्होंने मांग की है कि मौजूदा नियमों में संशोधन किया जाए, ताकि कृषि योग्य और अन्य उपयुक्त जमीन पर भी कॉफी की बागवानी की जा सके।

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