शेखपुरा के कृषि विज्ञान केंद्र, अरियरी में मशरूम उत्पादन पर चल रहा पांच दिवसीय प्रशिक्षण पूरा हो गया। कार्यक्रम 28 अक्टूबर से शुरू हुआ था। इसमें जिले के 30 प्रशिक्षणार्थियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को मशरूम की अलग-अलग किस्मों को उगाने की तकनीक सिखाई गई। साथ ही पराली के इस्तेमाल से रोजगार और उद्यमिता के अवसर बनाने की जानकारी दी गई। पराली जलाने के बजाय मशरूम उत्पादन में करें इस्तेमाल केंद्र के प्रधान ई. प्रमोद कुमार चौधरी ने युवाओं से मशरूम उत्पादन के जरिए पराली का इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मशरूम उगाने के लिए जरूरी कच्चा माल पराली और भूसा जिले में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि जिले में पराली जलाने की घटनाएं भी सामने आती हैं। इससे मिट्टी की सेहत और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। कृषि विभाग और जिला प्रशासन की कार्रवाई की चेतावनी के बावजूद पराली जलाने की घटनाएं कम नहीं हुई हैं। ओएस्टर, बटन और मिल्की मशरूम उगाने की तकनीक सिखाई प्रमोद कुमार चौधरी ने कहा कि मशरूम उत्पादन और पराली प्रबंधन से युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर बन सकते हैं। युवा इसे अपनी आजीविका का साधन बना सकते हैं। प्रशिक्षण की विषय निदेशक और गृह विज्ञान विशेषज्ञ संगीता कुमारी ने ओएस्टर, बटन, मिल्की और पराली मशरूम उगाने की तकनीक सिखाई। प्रशिक्षण में सैद्धांतिक जानकारी के साथ व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। इस मौके पर केंद्र की शस्य विशेषज्ञ डॉ. अल्काज्योति शर्मा भी मौजूद रहीं। शेखपुरा के कृषि विज्ञान केंद्र, अरियरी में मशरूम उत्पादन पर चल रहा पांच दिवसीय प्रशिक्षण पूरा हो गया। कार्यक्रम 28 अक्टूबर से शुरू हुआ था। इसमें जिले के 30 प्रशिक्षणार्थियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को मशरूम की अलग-अलग किस्मों को उगाने की तकनीक सिखाई गई। साथ ही पराली के इस्तेमाल से रोजगार और उद्यमिता के अवसर बनाने की जानकारी दी गई। पराली जलाने के बजाय मशरूम उत्पादन में करें इस्तेमाल केंद्र के प्रधान ई. प्रमोद कुमार चौधरी ने युवाओं से मशरूम उत्पादन के जरिए पराली का इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मशरूम उगाने के लिए जरूरी कच्चा माल पराली और भूसा जिले में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि जिले में पराली जलाने की घटनाएं भी सामने आती हैं। इससे मिट्टी की सेहत और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। कृषि विभाग और जिला प्रशासन की कार्रवाई की चेतावनी के बावजूद पराली जलाने की घटनाएं कम नहीं हुई हैं। ओएस्टर, बटन और मिल्की मशरूम उगाने की तकनीक सिखाई प्रमोद कुमार चौधरी ने कहा कि मशरूम उत्पादन और पराली प्रबंधन से युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर बन सकते हैं। युवा इसे अपनी आजीविका का साधन बना सकते हैं। प्रशिक्षण की विषय निदेशक और गृह विज्ञान विशेषज्ञ संगीता कुमारी ने ओएस्टर, बटन, मिल्की और पराली मशरूम उगाने की तकनीक सिखाई। प्रशिक्षण में सैद्धांतिक जानकारी के साथ व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। इस मौके पर केंद्र की शस्य विशेषज्ञ डॉ. अल्काज्योति शर्मा भी मौजूद रहीं।

