पटना को स्मार्ट सिटी बनाने के तमाम दावों और योजनाओं की पोल पटना जंक्शन के आसपास खुल रही है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब, अंडरग्राउंड सब-वे और स्टेशन एरिया री-डेवलपमेंट के नाम पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए बहाए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी जस की तस है। स्टेशन गोलंबर, महावीर मंदिर रोड, करबिगहिया साइड, टाटा पार्क और न्यू मार्केट का पूरा इलाका अवैध वेंडरों, ऑटो और टोटो की बेतरतीब कतारों से जाम रहता है। हालत यह है कि पटना जंक्शन की पार्किंग से बाहर निकलने के बाद यात्रियों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए भारी जद्दोजहद करनी पड़ती है। जाम में फंसकर लोगों की ट्रेनें छूट रही हैं। वहीं, नगर निगम, जिला प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस का साझा अतिक्रमण हटाओ अभियान खानापूर्ति साबित हो रहा है। दोपहर में अभियान चलता है और शाम ढलते ही फुटपाथ से लेकर आधी सड़क तक दुकानें सज जाती हैं। आरोप है कि इस अवैध कब्जे के पीछे निचले अमले और स्थानीय दबंगों का सिंडिकेट काम कर रहा है, जिससे निगम की कार्रवाई की भनक वेंडरों को पहले ही लग जाती है। नाला रोड : मैनहोल धंसा, हादसे का खतरा वैसे तो शहर के सभी 75 वार्डों में जर्जर सड़कों के चलते लोग परेशान हैं, लेकिन कई इलाके ऐसे भी हैं, जहां की सड़कों पर जलजमाव भी हो जाता है। सरिस्ताबाद इलाके में मुख्य सड़क पूरी तरह से खराब हो गई है। इस सड़क पर जगह-जगह जलजमाव है, जिसके चलते स्थानीय निवासियों को घर से निकलने पर भी दिक्कत हो रही है। सड़कों की मरम्मत को लेकर कोई ठोस उपाय न तो नगर निगम कर रहा है और न ही सरकार के स्तर पर कोई प्लानिंग है। इसके चलते आम लोग पूरे समय परेशान रहते हैं। ग्राउंड रियलिटी : पांच प्वाइंट्स में समझें हालात 1. फुटपाथ गायब, सड़क पर दुकानें : स्टेशन गोलंबर से जीपीओ और स्टेशन रोड के दोनों किनारों पर पैदल चलने वालों के लिए बने फुटपाथ पूरी तरह गायब हो चुके हैं। फल, कपड़े और फास्ट फूड के ठेलों ने स्थायी कब्जा जमा लिया है। 2. 50 मीटर चलने में 25 मिनट : डाकबंगला चौराहा या जीपीओ से जंक्शन प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में 20 से 30 मिनट लग रहे हैं। 50 मीटर का फासला तय करने में 25 मिनट का समय बर्बाद हो रहा है। 3. मुख्य सड़क पर अघोषित स्टैंड : सड़क का एक तिहाई हिस्सा अवैध ऑटो और ई-रिक्शा चालकों के हवाले है। ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी में भी बीच सड़क पर ही सवारी बैठाने और उतारने की होड़ मची रहती है। 4. करबिगहिया छोर भी हुआ चोक : जंक्शन के मुख्य निकास पर दबाव घटाने के लिए करबिगहिया साइड को विकसित किया गया था, लेकिन वहां भी निजी वाहनों की अवैध पार्किंग और अनियंत्रित वेंडरों ने पूरे रास्ते को घेर लिया है। 5. वेंडिंग जोन कागजों में सीमित : फुटपाथी दुकानदारों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट करने और आई-कार्ड जारी करने का निगम का प्रोजेक्ट कागजों से बाहर नहीं निकल सका है। पूर्व डिप्टी मेयर की शिकायत पर भी कागजी कार्रवाई पटना जंक्शन का इलाका नगर निगम के वार्ड संख्या-28 में आता है। यहां के पार्षद एवं पूर्व उपमहापौर विनय कुमार पप्पू ने सहयोग पोर्टल (आवेदन संख्या आरईएफ 743700) के जरिए महावीर मंदिर से गोरियाटोली तक अवैध बस-ऑटो स्टैंड और अतिक्रमण की शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि पुलिस विभाग ने रिपोर्ट में व्यवस्था सुचारू करने और अतिक्रमण हटाने का दावा कर मामले की महज खानापूर्ति कर दी, जबकि धरातल पर हालात आज भी बदतर हैं। वैसे तो शहर के सभी 75 वार्डों में जर्जर सड़कों के चलते लोग परेशान हैं, लेकिन कई इलाके ऐसे भी हैं, जहां की सड़कों पर जलजमाव भी हो जाता है। सरिस्ताबाद इलाके में मुख्य सड़क पूरी तरह से खराब हो गई है। इस सड़क पर जगह-जगह जलजमाव है, जिसके चलते स्थानीय निवासियों को घर से निकलने पर भी दिक्कत हो रही है। सड़कों की मरम्मत को लेकर कोई ठोस उपाय न तो नगर निगम कर रहा है और न ही सरकार के स्तर पर कोई प्लानिंग है। इसके चलते आम लोग पूरे समय परेशान रहते हैं। आप भी 8770590562 पर या ईमेल आईडी bhaskar.patna@dbcorp.in पर आप अपनी कॉलोनी, मोहल्ले और क्षेत्र की जर्जर सड़कें, जलजमाव, चोक ड्रेनेज व नालों की तस्वीरें भेजें। साथ ही कारण भी बताएं। हम इसको प्रकाशित करेंगे और जिम्मेदार अफसर व जनप्रतिनिधियों से बात करेंगे। जनता के चार सवाल…जवाब कौन देगा? 1. दुकानें फिर सजने पर : अतिक्रमण हटाने के चंद घंटे बाद ही दुकानें दोबारा कैसे सज जाती हैं? जंक्शन के आसपास फुटपाथी दुकानदारों को व्यवस्थित करने के लिए तय वेंडिंग जोन का प्रोजेक्ट अब तक जमीन पर क्यों नहीं उतरा? 2. अवैध स्टैंड और कब्जे पर : स्टेशन के 100 मीटर के दायरे को नो-पार्किंग और नो-वेंडिंग जोन घोषित किया गया है, फिर जवानों की तैनाती के बीच मुख्य सड़क पर अवैध ऑटो और टोटो का कब्जा किसके संरक्षण में बना हुआ है? 3. सिंडिकेट और वसूली पर : अतिक्रमण हटाओ अभियान खानापूर्ति तक सीमित क्यों है? फुटपाथों पर अवैध कब्जा कराने वाले दबंगों और सिंडिकेट के खिलाफ बीएनएस की गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर दर्ज क्यों नहीं होती? 4. करोड़ों की बर्बादी पर : सब-वे और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के निर्माण पर करोड़ों बहा दिए गए, लेकिन जब एंट्री और एग्जिट प्वाइंट ही चोक रहेंगे, तो जनता को इस पूरे प्रोजेक्ट का क्या फायदा मिलेगा? पटना को स्मार्ट सिटी बनाने के तमाम दावों और योजनाओं की पोल पटना जंक्शन के आसपास खुल रही है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब, अंडरग्राउंड सब-वे और स्टेशन एरिया री-डेवलपमेंट के नाम पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए बहाए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी जस की तस है। स्टेशन गोलंबर, महावीर मंदिर रोड, करबिगहिया साइड, टाटा पार्क और न्यू मार्केट का पूरा इलाका अवैध वेंडरों, ऑटो और टोटो की बेतरतीब कतारों से जाम रहता है। हालत यह है कि पटना जंक्शन की पार्किंग से बाहर निकलने के बाद यात्रियों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए भारी जद्दोजहद करनी पड़ती है। जाम में फंसकर लोगों की ट्रेनें छूट रही हैं। वहीं, नगर निगम, जिला प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस का साझा अतिक्रमण हटाओ अभियान खानापूर्ति साबित हो रहा है। दोपहर में अभियान चलता है और शाम ढलते ही फुटपाथ से लेकर आधी सड़क तक दुकानें सज जाती हैं। आरोप है कि इस अवैध कब्जे के पीछे निचले अमले और स्थानीय दबंगों का सिंडिकेट काम कर रहा है, जिससे निगम की कार्रवाई की भनक वेंडरों को पहले ही लग जाती है। नाला रोड : मैनहोल धंसा, हादसे का खतरा वैसे तो शहर के सभी 75 वार्डों में जर्जर सड़कों के चलते लोग परेशान हैं, लेकिन कई इलाके ऐसे भी हैं, जहां की सड़कों पर जलजमाव भी हो जाता है। सरिस्ताबाद इलाके में मुख्य सड़क पूरी तरह से खराब हो गई है। इस सड़क पर जगह-जगह जलजमाव है, जिसके चलते स्थानीय निवासियों को घर से निकलने पर भी दिक्कत हो रही है। सड़कों की मरम्मत को लेकर कोई ठोस उपाय न तो नगर निगम कर रहा है और न ही सरकार के स्तर पर कोई प्लानिंग है। इसके चलते आम लोग पूरे समय परेशान रहते हैं। ग्राउंड रियलिटी : पांच प्वाइंट्स में समझें हालात 1. फुटपाथ गायब, सड़क पर दुकानें : स्टेशन गोलंबर से जीपीओ और स्टेशन रोड के दोनों किनारों पर पैदल चलने वालों के लिए बने फुटपाथ पूरी तरह गायब हो चुके हैं। फल, कपड़े और फास्ट फूड के ठेलों ने स्थायी कब्जा जमा लिया है। 2. 50 मीटर चलने में 25 मिनट : डाकबंगला चौराहा या जीपीओ से जंक्शन प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में 20 से 30 मिनट लग रहे हैं। 50 मीटर का फासला तय करने में 25 मिनट का समय बर्बाद हो रहा है। 3. मुख्य सड़क पर अघोषित स्टैंड : सड़क का एक तिहाई हिस्सा अवैध ऑटो और ई-रिक्शा चालकों के हवाले है। ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी में भी बीच सड़क पर ही सवारी बैठाने और उतारने की होड़ मची रहती है। 4. करबिगहिया छोर भी हुआ चोक : जंक्शन के मुख्य निकास पर दबाव घटाने के लिए करबिगहिया साइड को विकसित किया गया था, लेकिन वहां भी निजी वाहनों की अवैध पार्किंग और अनियंत्रित वेंडरों ने पूरे रास्ते को घेर लिया है। 5. वेंडिंग जोन कागजों में सीमित : फुटपाथी दुकानदारों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट करने और आई-कार्ड जारी करने का निगम का प्रोजेक्ट कागजों से बाहर नहीं निकल सका है। पूर्व डिप्टी मेयर की शिकायत पर भी कागजी कार्रवाई पटना जंक्शन का इलाका नगर निगम के वार्ड संख्या-28 में आता है। यहां के पार्षद एवं पूर्व उपमहापौर विनय कुमार पप्पू ने सहयोग पोर्टल (आवेदन संख्या आरईएफ 743700) के जरिए महावीर मंदिर से गोरियाटोली तक अवैध बस-ऑटो स्टैंड और अतिक्रमण की शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि पुलिस विभाग ने रिपोर्ट में व्यवस्था सुचारू करने और अतिक्रमण हटाने का दावा कर मामले की महज खानापूर्ति कर दी, जबकि धरातल पर हालात आज भी बदतर हैं। वैसे तो शहर के सभी 75 वार्डों में जर्जर सड़कों के चलते लोग परेशान हैं, लेकिन कई इलाके ऐसे भी हैं, जहां की सड़कों पर जलजमाव भी हो जाता है। सरिस्ताबाद इलाके में मुख्य सड़क पूरी तरह से खराब हो गई है। इस सड़क पर जगह-जगह जलजमाव है, जिसके चलते स्थानीय निवासियों को घर से निकलने पर भी दिक्कत हो रही है। सड़कों की मरम्मत को लेकर कोई ठोस उपाय न तो नगर निगम कर रहा है और न ही सरकार के स्तर पर कोई प्लानिंग है। इसके चलते आम लोग पूरे समय परेशान रहते हैं। आप भी 8770590562 पर या ईमेल आईडी bhaskar.patna@dbcorp.in पर आप अपनी कॉलोनी, मोहल्ले और क्षेत्र की जर्जर सड़कें, जलजमाव, चोक ड्रेनेज व नालों की तस्वीरें भेजें। साथ ही कारण भी बताएं। हम इसको प्रकाशित करेंगे और जिम्मेदार अफसर व जनप्रतिनिधियों से बात करेंगे। जनता के चार सवाल…जवाब कौन देगा? 1. दुकानें फिर सजने पर : अतिक्रमण हटाने के चंद घंटे बाद ही दुकानें दोबारा कैसे सज जाती हैं? जंक्शन के आसपास फुटपाथी दुकानदारों को व्यवस्थित करने के लिए तय वेंडिंग जोन का प्रोजेक्ट अब तक जमीन पर क्यों नहीं उतरा? 2. अवैध स्टैंड और कब्जे पर : स्टेशन के 100 मीटर के दायरे को नो-पार्किंग और नो-वेंडिंग जोन घोषित किया गया है, फिर जवानों की तैनाती के बीच मुख्य सड़क पर अवैध ऑटो और टोटो का कब्जा किसके संरक्षण में बना हुआ है? 3. सिंडिकेट और वसूली पर : अतिक्रमण हटाओ अभियान खानापूर्ति तक सीमित क्यों है? फुटपाथों पर अवैध कब्जा कराने वाले दबंगों और सिंडिकेट के खिलाफ बीएनएस की गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर दर्ज क्यों नहीं होती? 4. करोड़ों की बर्बादी पर : सब-वे और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के निर्माण पर करोड़ों बहा दिए गए, लेकिन जब एंट्री और एग्जिट प्वाइंट ही चोक रहेंगे, तो जनता को इस पूरे प्रोजेक्ट का क्या फायदा मिलेगा?

