समस्तीपुर में बेल्ट्रॉन के जरिए सरकारी विभागों में काम कर रहे डाटा एंट्री ऑपरेटरों और अन्य कर्मियों ने रविवार को मार्च निकाला। सरकार से राजकीय कर्मी का दर्जा देने, सेवा सुरक्षा और वेतनमान लागू करने की मांग की गई है। मार्च बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा के बैनर तले मार्च राजपत्रित कर्मचारी संघ भवन से शुरू होकर पुरानी बस स्टैंड तक पहुंचा। इसमें जिले के अलग-अलग विभागों में काम करने वाले हजारों कर्मी शामिल हुए। मार्च में महिलाओं ने भी हिस्सा लिया। जिला मुख्यालय, अनुमंडल, प्रखंड, अंचल और पंचायत के सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले बेल्ट्रॉन कर्मी भी शामिल थे। इनमें डाटा एंट्री ऑपरेटर, प्रोग्रामर, स्टेनोग्राफर और आईटी कर्मी शामिल थे। नोडल विभाग घोषित करने की मांग प्रदर्शनमें शामिल कर्मियों ने सरकार के प्रति नाराजगी जताई। उन्होंने सभी बेल्ट्रॉन कर्मियों को राजकीय कर्मी का दर्जा देने और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को इस व्यवस्था का नोडल विभाग घोषित करने की मांग की। बेल्ट्रॉन के जरिए बिहार के सरकारी कार्यालयों में करीब 20 हजार लोग काम कर रहे हैं। इनमें कई लोग 29 साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं। उनका कहना था कि अब तक सेवा शर्तों के स्पष्ट नियम नहीं बने हैं और सेवा सुरक्षा की गारंटी भी नहीं मिली है। ठोस व्यवस्था करने की मांग संयुक्त मोर्चा जिला इकाई के अध्यक्ष अनुराग नंदन और सचिव सुमन सौरभ ने कहा कि राज्य सरकार पिछले 29 साल से बेल्ट्रॉन कर्मियों से अलग-अलग विभागों में काम ले रही है। इसके बावजूद कर्मियों के भविष्य को लेकर अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। न तो सेवा शर्त नियमावली का लाभ मिल रहा है और न ही सेवा सुरक्षा प्रदान की गई है। इससे हजारों कर्मियों के सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि बेल्ट्रॉन के माध्यम से कार्यरत सभी कर्मियों के लिए अलग से पद सृजित किया जाए। साथ ही उन्हें राजकीय कर्मी का दर्जा देते हुए निर्धारित वेतनमान लागू किया जाए। इसके अलावा सेवा सुरक्षा एवं अन्य सुविधाओं को लेकर स्पष्ट नियमावली बनाई जाए, ताकि वर्षों से सरकारी कार्यालयों में काम कर रहे कर्मियों को उनका अधिकार मिल सके। समस्तीपुर में बेल्ट्रॉन के जरिए सरकारी विभागों में काम कर रहे डाटा एंट्री ऑपरेटरों और अन्य कर्मियों ने रविवार को मार्च निकाला। सरकार से राजकीय कर्मी का दर्जा देने, सेवा सुरक्षा और वेतनमान लागू करने की मांग की गई है। मार्च बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा के बैनर तले मार्च राजपत्रित कर्मचारी संघ भवन से शुरू होकर पुरानी बस स्टैंड तक पहुंचा। इसमें जिले के अलग-अलग विभागों में काम करने वाले हजारों कर्मी शामिल हुए। मार्च में महिलाओं ने भी हिस्सा लिया। जिला मुख्यालय, अनुमंडल, प्रखंड, अंचल और पंचायत के सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले बेल्ट्रॉन कर्मी भी शामिल थे। इनमें डाटा एंट्री ऑपरेटर, प्रोग्रामर, स्टेनोग्राफर और आईटी कर्मी शामिल थे। नोडल विभाग घोषित करने की मांग प्रदर्शनमें शामिल कर्मियों ने सरकार के प्रति नाराजगी जताई। उन्होंने सभी बेल्ट्रॉन कर्मियों को राजकीय कर्मी का दर्जा देने और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को इस व्यवस्था का नोडल विभाग घोषित करने की मांग की। बेल्ट्रॉन के जरिए बिहार के सरकारी कार्यालयों में करीब 20 हजार लोग काम कर रहे हैं। इनमें कई लोग 29 साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं। उनका कहना था कि अब तक सेवा शर्तों के स्पष्ट नियम नहीं बने हैं और सेवा सुरक्षा की गारंटी भी नहीं मिली है। ठोस व्यवस्था करने की मांग संयुक्त मोर्चा जिला इकाई के अध्यक्ष अनुराग नंदन और सचिव सुमन सौरभ ने कहा कि राज्य सरकार पिछले 29 साल से बेल्ट्रॉन कर्मियों से अलग-अलग विभागों में काम ले रही है। इसके बावजूद कर्मियों के भविष्य को लेकर अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। न तो सेवा शर्त नियमावली का लाभ मिल रहा है और न ही सेवा सुरक्षा प्रदान की गई है। इससे हजारों कर्मियों के सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि बेल्ट्रॉन के माध्यम से कार्यरत सभी कर्मियों के लिए अलग से पद सृजित किया जाए। साथ ही उन्हें राजकीय कर्मी का दर्जा देते हुए निर्धारित वेतनमान लागू किया जाए। इसके अलावा सेवा सुरक्षा एवं अन्य सुविधाओं को लेकर स्पष्ट नियमावली बनाई जाए, ताकि वर्षों से सरकारी कार्यालयों में काम कर रहे कर्मियों को उनका अधिकार मिल सके।

