मुजफ्फरपुर में बेल्ट्रॉन के माध्यम से विभिन्न सरकारी कार्यालयों में नियोजित डाटा एंट्री ऑपरेटर, प्रोग्रामर, स्टेनोग्राफर और आईटी कर्मियों ने रविवार को अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर कर्मियों ने सेयागंज टावर चौक से समाहरणालय तक रोड मार्च निकाला। इसमें बड़ी संख्या में महिला और पुरुष कर्मी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने राज्यकर्मी का दर्जा देने और सूचना प्रावैधिकी विभाग को नोडल विभाग घोषित करने की मांग की। उनका कहना था कि वर्षों से सरकारी कार्यालयों में काम करने के बावजूद उन्हें सरकारी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं और लाभ नहीं मिल रहे हैं। सरकारी कर्मचारियों की तरह काम, लेकिन सुविधाएं नहीं आंदोलन में शामिल आरती सिन्हा ने कहा कि उनकी मांग सिर्फ राज्यकर्मी का दर्जा देने की है। उनसे सरकारी कर्मचारियों की तरह काम लिया जाता है, लेकिन वैसा दर्जा और सुविधाएं नहीं दी जाती। जब अपने अधिकार की मांग करते हैं तो नौकरी से हटाने तक की बात कही जाती है। हमलोगो लंबे समय से काम कर रहे हैं। उन्हें भी सम्मान तथा नौकरी की सुरक्षा मिलनी चाहिए। वहीं, अनीशा ने कहा कि कर्मियों से पूरा काम लिया जाता है, लेकिन सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाला कोई लाभ नहीं दिया जाता। उनका भी परिवार है और परिवार की जिम्मेदारी उनके ऊपर है। इसके बावजूद उनके साथ दोहरा व्यवहार किया जा रहा है। लंबे समय से सेवा देने के बाद भी अधिकारों से वंचित रखना अन्याय है। ‘सरकार की नजर में हमारी कोई जगह’ आंदोलन कर रहे अवनीश कुमार चौधरी ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, ‘नौकर ऐसा चाहिए जो मांगने पर वेतन न मांगे, छुट्टी कभी न जाए।’ उन्होंने कहा कि वे 20 साल से लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन सरकार की नजर में उनकी कोई जगह नहीं है। कर्मियों से हर तरह का काम लिया जाता है, लेकिन उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा नहीं दिया जाता। रविवार का प्रदर्शन एक दिवसीय आंदोलन है। मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन आगे भी अनवरत जारी रहेगा। 38 जिलों में एक साथ निकाला गया रोड मार्च संयुक्त मोर्चा के अनुसार, राज्य के सभी 38 जिलों में एक साथ रोड मार्च आयोजित किया गया। मोर्चा का कहना है कि राज्य में करीब 20 हजार डाटा एंट्री ऑपरेटर, प्रोग्रामर, स्टेनोग्राफर और आईटी ब्वॉय-गर्ल बेल्ट्रॉन के माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं। ये कर्मी सरकारी कार्यालयों में टाइपिंग, डाटा एंट्री और ऑनलाइन कामकाज सहित कई जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा और सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। 29 साल की सेवा के बाद भी नहीं मिला सेवानिवृत्ति लाभ संयुक्त मोर्चा के जिला अध्यक्ष श्रीप्रकाश कुमार ने कहा कि सरकार वर्ष 1997 से इन कर्मियों की सेवा ले रही है। करीब 29 वर्षों की सेवा के दौरान सैकड़ों कर्मी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उन्हें सेवानिवृत्ति का कोई लाभ नहीं मिला। इन कर्मियों से लिए जा रहे कार्य स्थायी प्रकृति के हैं। ऐसे में सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में जल्द नीतिगत निर्णय लेना चाहिए। मोर्चा की प्रमुख मांग है कि बेल्ट्रॉन के माध्यम से नियोजित सभी कर्मियों को राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए और सूचना प्रावैधिकी विभाग को नोडल विभाग घोषित किया जाए। जिला सदस्य अमर कुमार, जितेंद्र कुमार और अंकित कुमार ने कहा कि सरकार ने जल्द मांगें नहीं मानीं तो प्रदेश स्तर पर हड़ताल और चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। मुजफ्फरपुर में बेल्ट्रॉन के माध्यम से विभिन्न सरकारी कार्यालयों में नियोजित डाटा एंट्री ऑपरेटर, प्रोग्रामर, स्टेनोग्राफर और आईटी कर्मियों ने रविवार को अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर कर्मियों ने सेयागंज टावर चौक से समाहरणालय तक रोड मार्च निकाला। इसमें बड़ी संख्या में महिला और पुरुष कर्मी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने राज्यकर्मी का दर्जा देने और सूचना प्रावैधिकी विभाग को नोडल विभाग घोषित करने की मांग की। उनका कहना था कि वर्षों से सरकारी कार्यालयों में काम करने के बावजूद उन्हें सरकारी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं और लाभ नहीं मिल रहे हैं। सरकारी कर्मचारियों की तरह काम, लेकिन सुविधाएं नहीं आंदोलन में शामिल आरती सिन्हा ने कहा कि उनकी मांग सिर्फ राज्यकर्मी का दर्जा देने की है। उनसे सरकारी कर्मचारियों की तरह काम लिया जाता है, लेकिन वैसा दर्जा और सुविधाएं नहीं दी जाती। जब अपने अधिकार की मांग करते हैं तो नौकरी से हटाने तक की बात कही जाती है। हमलोगो लंबे समय से काम कर रहे हैं। उन्हें भी सम्मान तथा नौकरी की सुरक्षा मिलनी चाहिए। वहीं, अनीशा ने कहा कि कर्मियों से पूरा काम लिया जाता है, लेकिन सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाला कोई लाभ नहीं दिया जाता। उनका भी परिवार है और परिवार की जिम्मेदारी उनके ऊपर है। इसके बावजूद उनके साथ दोहरा व्यवहार किया जा रहा है। लंबे समय से सेवा देने के बाद भी अधिकारों से वंचित रखना अन्याय है। ‘सरकार की नजर में हमारी कोई जगह’ आंदोलन कर रहे अवनीश कुमार चौधरी ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, ‘नौकर ऐसा चाहिए जो मांगने पर वेतन न मांगे, छुट्टी कभी न जाए।’ उन्होंने कहा कि वे 20 साल से लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन सरकार की नजर में उनकी कोई जगह नहीं है। कर्मियों से हर तरह का काम लिया जाता है, लेकिन उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा नहीं दिया जाता। रविवार का प्रदर्शन एक दिवसीय आंदोलन है। मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन आगे भी अनवरत जारी रहेगा। 38 जिलों में एक साथ निकाला गया रोड मार्च संयुक्त मोर्चा के अनुसार, राज्य के सभी 38 जिलों में एक साथ रोड मार्च आयोजित किया गया। मोर्चा का कहना है कि राज्य में करीब 20 हजार डाटा एंट्री ऑपरेटर, प्रोग्रामर, स्टेनोग्राफर और आईटी ब्वॉय-गर्ल बेल्ट्रॉन के माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं। ये कर्मी सरकारी कार्यालयों में टाइपिंग, डाटा एंट्री और ऑनलाइन कामकाज सहित कई जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा और सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। 29 साल की सेवा के बाद भी नहीं मिला सेवानिवृत्ति लाभ संयुक्त मोर्चा के जिला अध्यक्ष श्रीप्रकाश कुमार ने कहा कि सरकार वर्ष 1997 से इन कर्मियों की सेवा ले रही है। करीब 29 वर्षों की सेवा के दौरान सैकड़ों कर्मी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उन्हें सेवानिवृत्ति का कोई लाभ नहीं मिला। इन कर्मियों से लिए जा रहे कार्य स्थायी प्रकृति के हैं। ऐसे में सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में जल्द नीतिगत निर्णय लेना चाहिए। मोर्चा की प्रमुख मांग है कि बेल्ट्रॉन के माध्यम से नियोजित सभी कर्मियों को राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए और सूचना प्रावैधिकी विभाग को नोडल विभाग घोषित किया जाए। जिला सदस्य अमर कुमार, जितेंद्र कुमार और अंकित कुमार ने कहा कि सरकार ने जल्द मांगें नहीं मानीं तो प्रदेश स्तर पर हड़ताल और चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।

