चक्रवाती हवा से धान की फसल खेतों में गिरी:बक्सर में किसानों ने नुकसान का आकलन कर मुआवजा मांगा; कृषि विभाग सर्वे में जुटा

चक्रवाती हवा से धान की फसल खेतों में गिरी:बक्सर में किसानों ने नुकसान का आकलन कर मुआवजा मांगा; कृषि विभाग सर्वे में जुटा

बक्सर में अर्नब चक्रवात के असर से तेज हवा और बारिश ने धान की तैयार फसल को नुकसान पहुंचाया है। तेज हवाओं से खेतों में फसल जमीन पर गिर गई। कई खेतों में पानी जमा होने से फसल को और नुकसान पहुंचने की आशंका है। रेडक्रॉस के सचिव श्रवण तिवारी ने राज्य सरकार से प्रभावित किसानों का जल्द सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग की है। कृषि विभाग फसल के नुकसान का आकलन कर रहा है और किसानों को गिरी फसल बचाने की सलाह दी गई है। 120 रुपए किलो के भाव से बीज खरीदा किसानों ने बताया कि धान की खेती में बीज, रोपाई, सिंचाई, खाद और कीटनाशक पर खर्च होता है। किसान विक्की ने बताया कि उन्होंने खेत 20 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से बंदोबस्ती पर लिया था। 25 मई को रोहिणी नक्षत्र में 120 रुपए किलो के भाव से बीज खरीदकर बिचड़ा तैयार किया। 44 डिग्री तापमान में विक्की के मुताबिक, उन्होंने करीब 154 दिन मेहनत कर फसल तैयार की। 44 डिग्री तापमान में भी खेतों में काम किया। चक्रवाती हवाओं ने 54 मिनट में पूरी फसल जमीन पर गिरा दी। उन्हें उम्मीद थी कि फसल से बच्चे का शहर के अच्छे स्कूल में दाखिला करा पाएंगे। किसान संतोष ने बताया कि धान की फसल से परिवार का सालभर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और बेटी की शादी की तैयारी करनी थी। अब फसल गिरने के बाद उन्हें परिवार की जरूरतें पूरी करने और खेती के लिए लिया कर्ज चुकाने की चिंता है। श्रवण तिवारी ने मांगा विशेष मुआवजा

रेडक्रॉस सचिव श्रवण तिवारी ने कहा कि किसान के लिए फसल केवल अनाज नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सालभर की आजीविका होती है। प्राकृतिक आपदा ने किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रभावित पंचायतों में प्रशासनिक टीम भेजकर खेतों का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए। छोटे और सीमांत किसानों के नुकसान को प्राथमिकता दी जाए। वास्तविक क्षति के अनुसार मुआवजा दिया जाए। साथ ही, जिन इलाकों में बड़े पैमाने पर फसल बर्बाद हुई है, वहां विशेष राहत पैकेज की व्यवस्था हो। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर आर्थिक सहायता मिलेगी, तभी वे अगली खेती की तैयारी कर सकेंगे। फसल को बचाने के लिए किसान अपनाएं ये उपाय

किसान गोपाल पांडेय ने गिरी हुई धान की फसल को बचाने के लिए कुछ जरूरी उपाय बताए हैं। उन्होंने कहा कि बारिश और तेज हवा से खेत में गिरी फसल को लंबे समय तक पानी में छोड़ना नुकसानदायक हो सकता है। इससे धान की बालियों में दाने अंकुरित होने, सड़ने और फंगस लगने का खतरा रहता है।

उन्होंने किसानों को सलाह दी कि सबसे पहले खेतों में जमा पानी की निकासी का प्रयास करें। जहां संभव हो, वहां गिरे हुए धान के पौधों के चार से पांच गुच्छों को एक साथ हल्के से बांध दें, ताकि उन्हें आपस में सहारा मिल सके और बालियां पानी से ऊपर रहें। फसल को संभालते समय ध्यान रखें कि बालियां टूटें नहीं और दानों को नुकसान न पहुंचे। मौसम साफ होने पर खेत की स्थिति के अनुसार कटाई और सुरक्षित सुखाने की व्यवस्था करें।

33 प्रतिशत नुकसान पर ही मुआवजे का प्रावधान

जिला कृषि पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि चक्रवात से प्रभावित फसलों की क्षति का आकलन कराया जा रहा है। सिंचित फसल के लिए 17 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे का प्रावधान है। हालांकि, नियमानुसार किसी पंचायत के कुल कृषि रकबे के 33 प्रतिशत हिस्से में फसल क्षति होने पर ही निर्धारित मुआवजे का लाभ दिया जा सकता है। ऐसे में किसानों की नजर अब सर्वे और सरकार की राहत प्रक्रिया पर टिकी है। किसानों की मांग है कि उनकी वास्तविक परेशानी को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द सहायता उपलब्ध कराई जाए। बक्सर में अर्नब चक्रवात के असर से तेज हवा और बारिश ने धान की तैयार फसल को नुकसान पहुंचाया है। तेज हवाओं से खेतों में फसल जमीन पर गिर गई। कई खेतों में पानी जमा होने से फसल को और नुकसान पहुंचने की आशंका है। रेडक्रॉस के सचिव श्रवण तिवारी ने राज्य सरकार से प्रभावित किसानों का जल्द सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग की है। कृषि विभाग फसल के नुकसान का आकलन कर रहा है और किसानों को गिरी फसल बचाने की सलाह दी गई है। 120 रुपए किलो के भाव से बीज खरीदा किसानों ने बताया कि धान की खेती में बीज, रोपाई, सिंचाई, खाद और कीटनाशक पर खर्च होता है। किसान विक्की ने बताया कि उन्होंने खेत 20 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से बंदोबस्ती पर लिया था। 25 मई को रोहिणी नक्षत्र में 120 रुपए किलो के भाव से बीज खरीदकर बिचड़ा तैयार किया। 44 डिग्री तापमान में विक्की के मुताबिक, उन्होंने करीब 154 दिन मेहनत कर फसल तैयार की। 44 डिग्री तापमान में भी खेतों में काम किया। चक्रवाती हवाओं ने 54 मिनट में पूरी फसल जमीन पर गिरा दी। उन्हें उम्मीद थी कि फसल से बच्चे का शहर के अच्छे स्कूल में दाखिला करा पाएंगे। किसान संतोष ने बताया कि धान की फसल से परिवार का सालभर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और बेटी की शादी की तैयारी करनी थी। अब फसल गिरने के बाद उन्हें परिवार की जरूरतें पूरी करने और खेती के लिए लिया कर्ज चुकाने की चिंता है। श्रवण तिवारी ने मांगा विशेष मुआवजा

रेडक्रॉस सचिव श्रवण तिवारी ने कहा कि किसान के लिए फसल केवल अनाज नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सालभर की आजीविका होती है। प्राकृतिक आपदा ने किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रभावित पंचायतों में प्रशासनिक टीम भेजकर खेतों का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए। छोटे और सीमांत किसानों के नुकसान को प्राथमिकता दी जाए। वास्तविक क्षति के अनुसार मुआवजा दिया जाए। साथ ही, जिन इलाकों में बड़े पैमाने पर फसल बर्बाद हुई है, वहां विशेष राहत पैकेज की व्यवस्था हो। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर आर्थिक सहायता मिलेगी, तभी वे अगली खेती की तैयारी कर सकेंगे। फसल को बचाने के लिए किसान अपनाएं ये उपाय

किसान गोपाल पांडेय ने गिरी हुई धान की फसल को बचाने के लिए कुछ जरूरी उपाय बताए हैं। उन्होंने कहा कि बारिश और तेज हवा से खेत में गिरी फसल को लंबे समय तक पानी में छोड़ना नुकसानदायक हो सकता है। इससे धान की बालियों में दाने अंकुरित होने, सड़ने और फंगस लगने का खतरा रहता है।

उन्होंने किसानों को सलाह दी कि सबसे पहले खेतों में जमा पानी की निकासी का प्रयास करें। जहां संभव हो, वहां गिरे हुए धान के पौधों के चार से पांच गुच्छों को एक साथ हल्के से बांध दें, ताकि उन्हें आपस में सहारा मिल सके और बालियां पानी से ऊपर रहें। फसल को संभालते समय ध्यान रखें कि बालियां टूटें नहीं और दानों को नुकसान न पहुंचे। मौसम साफ होने पर खेत की स्थिति के अनुसार कटाई और सुरक्षित सुखाने की व्यवस्था करें।

33 प्रतिशत नुकसान पर ही मुआवजे का प्रावधान

जिला कृषि पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि चक्रवात से प्रभावित फसलों की क्षति का आकलन कराया जा रहा है। सिंचित फसल के लिए 17 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे का प्रावधान है। हालांकि, नियमानुसार किसी पंचायत के कुल कृषि रकबे के 33 प्रतिशत हिस्से में फसल क्षति होने पर ही निर्धारित मुआवजे का लाभ दिया जा सकता है। ऐसे में किसानों की नजर अब सर्वे और सरकार की राहत प्रक्रिया पर टिकी है। किसानों की मांग है कि उनकी वास्तविक परेशानी को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द सहायता उपलब्ध कराई जाए।  

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