क्या अब आजम की यूनिवर्सिटी पर ताला लगेगा:मामला ₹426 करोड़ का तो ED ₹1100 करोड़ की प्रॉपर्टी क्यों कुर्क की

क्या अब आजम की यूनिवर्सिटी पर ताला लगेगा:मामला ₹426 करोड़ का तो ED ₹1100 करोड़ की प्रॉपर्टी क्यों कुर्क की

28 अक्टूबर को ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी कुर्क कर दी। एजेंसी का कहना है कि इसे बनाने में लगा 85% पैसा ‘अपराध की कमाई’ से आया था। सरकारी ठेकों और विधायक निधि का पैसा भी यूनिवर्सिटी में लगा है। हैरत की बात यह है अपराध की कमाई का मामला 426.46 करोड़ रुपए का है। लेकिन, ED ने 1100 करोड़ से ज्यादा की प्रॉपर्टी कुर्क की है। आखिर ED ने ऐसा क्यों किया? क्या अब जौहर यूनिवर्सिटी बंद हो जाएगी? ऐसे में वहां पढ़ रहे स्टूडेंट्स का क्या होगा? जानेंगे आज यूपी एक्सप्लेनर में… सवाल 1: मामला ₹426.46 करोड़ का, तो ₹1100 करोड़ की प्रॉपर्टी क्यों कुर्क हुई? जवाब: आयकर विभाग के जिला मूल्यांकन अधिकारी, रामपुर ने 10 नवंबर, 2023 की रिपोर्ट में बताया कि जमीन खरीदकर यूनिवर्सिटी बनाने में कुल 499.09 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। ED का आरोप है कि आजम खान और जौहर ट्रस्ट इसमें से केवल 72.63 करोड़ का ही हिसाब दे पाए। बाकी बचे 426.46 करोड़ को ED ने ‘अपराध की कमाई’ माना। सवाल 2: यूनिवर्सिटी बनाने में ‘अपराध की कमाई’ कैसे लगाई गई? जवाब: यूनिवर्सिटी बनाने के लिए आजम खान ने जौहर ट्रस्ट के जरिए 114 जमीनों की रजिस्ट्री कराई। उनके खिलाफ दर्ज FIR के मुताबिक इसमें किसानों और वक्फ की जमीनें शामिल थीं। 2017 में भाजपा सरकार आने के बाद आजम खान के खिलाफ जांच शुरू हुई। सवाल 3: क्या यूनिवर्सिटी बंद होगी? छात्रों की पढ़ाई और डिग्री का क्या होगा? जवाब: प्रॉपर्टी अटैच करने या कुर्की का मतलब होता है संपत्ति को ‘अस्थायी रूप से फ्रीज या लॉक’ कर देना। ऐसा इसलिए किया जाता है, जिससे केस चलने के दौरान आरोपी संपत्ति को बेच या किसी और के नाम ट्रांसफर न कर सके। संपत्ति अटैच पर बैंक लोन भी नहीं लिया जा सकता है। अगर उस संपत्ति से किराया वगैरह मिल रहा है, तो वह आरोपी के बैंक खाते में जाने के बजाय सरकारी खाते में जमा होने लगता है। सवाल 4: अगर साबित हुआ कि यूनिवर्सिटी अवैध कमाई से बनी, तो क्या होगा? जवाब: तब यूनिवर्सिटी की इमारतें और जमीन हमेशा के लिए सरकार की हो जाएगी। लेकिन, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि यूनिवर्सिटी की पढ़ाई तुरंत बंद कर दी जाएगी या बिल्डिंग गिरा दी जाएगी। छात्रों के भविष्य को देखते हुए कानून में ऐसे रास्ते मौजूद हैं जिससे पढ़ाई प्रभावित न हो… सरकारी रिसीवर बैठाना: सरकार अपनी तरफ से किसी अधिकारी को यूनिवर्सिटी का मुखिया नियुक्त कर सकती है। इसके बाद यूनिवर्सिटी का सारा कामकाज सरकारी देख-रेख में वैसे ही चलता रहेगा जैसे पहले चल रहा था। किसी सरकारी यूनिवर्सिटी से जोड़ना: सरकार जौहर यूनिवर्सिटी को किसी सरकारी यूनिवर्सिटी जैसे- बरेली या लखनऊ यूनिवर्सिटी से संबद्ध कर सकती है। इससे मैनेजमेंट सीधे सरकारी यूनिवर्सिटी के हाथ में आ जाएगा। यूनिवर्सिटी टेकओवर करना: सरकार के पास यह अधिकार भी है। उत्तर प्रदेश प्राइवेट यूनिवर्सिटी एक्ट-2019 के तहत, अगर किसी प्राइवेट यूनिवर्सिटी के खिलाफ भ्रष्टाचार, पैसों की हेराफेरी या नियमों के बड़े उल्लंघन के आरोप साबित होते हैं, तो सरकार उसकी मान्यता रद्द करके पूरी संपत्ति अपने कब्जे में ले सकती है। ——————————————– ये एक्सप्लेनर भी पढ़ें… इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव लड़ने के लिए ‘हत्यारे’ को छोड़ा, क्या आजम को भी राहत मिलेगी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी नंदलाल राय की ‘सजा और दोषसिद्धि’ पर रोक लगा दी, जिससे वह चुनाव लड़ सके। निचली अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा दी थी। हाईकोर्ट ने कहा- चुनाव लड़ना नेता की ‘रोजी-रोटी’ जैसा अधिकार है। तो क्या आजम खान भी 2027 का चुनाव लड़ सकते हैं? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *