सहरसा के मजदूर की कर्नाटक में गला घोंटकर हत्या:11 दिन बाद घर पहुंचा शव; पत्नी से संबंध को लेकर विवाद; दोस्तों पर हत्या का आरोप

सहरसा के मजदूर की कर्नाटक में गला घोंटकर हत्या:11 दिन बाद घर पहुंचा शव; पत्नी से संबंध को लेकर विवाद; दोस्तों पर हत्या का आरोप

सहरसा के 26 वर्षीय मजदूर संतोष ठाकुर की 20 अक्टूबर को कर्नाटक में हत्या कर दी गई। शनिवार को कर्नाटक पुलिस एंबुलेंस से उनका शव सहरसा लेकर पहुंची। परिजनों ने पत्नी के दूसरे व्यक्ति से संबंध को हत्या की वजह बताया है। मामले में पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में लिया है, जबकि दूसरा फरार बताया जा रहा है। संतोष सहरसा नगर निगम के धमसैनी वार्ड नंबर 46 के रहने वाले थे। वह सत्यनारायण ठाकुर के बेटे और चार भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। 9 अक्टूबर को काम के लिए कर्नाटक गए थे संतोष संतोष करीब डेढ़ साल से कर्नाटक के कोप्पल थाना क्षेत्र की एक फैक्ट्री में मजदूरी कर रहे थे। उनके बड़े भाई गौतम कुमार ने बताया कि संतोष 9 अक्टूबर को काम के लिए कर्नाटक गए थे। परिवार से उनकी आखिरी बार 19 अक्टूबर को बात हुई थी। गौतम के मुताबिक, 20 अक्टूबर से संतोष का फोन नहीं लग रहा था। उन्होंने फोन की लोकेशन पता की, जो कर्नाटक के कोप्पल में दिख रही थी। इसके बाद उन्होंने कंपनी के सुपरवाइजर अमिताभ दास से संपर्क किया। सुपरवाइजर ने बताया कि संतोष पांच दिनों से काम पर नहीं आ रहे थे। सुपरवाइजर से पूछताछ में सामने आई हत्या की बात गौतम ने बताया कि कंपनी के सुपरवाइजर ने संतोष के दोस्तों राजकिशोर और मनीष से पूछताछ की। इस दौरान राजकिशोर ने कथित तौर पर बताया कि फैक्ट्री में काम करने के दौरान मनीष का संतोष की पत्नी से संबंध हो गया था। इसकी जानकारी संतोष को मिलने पर दोनों के बीच विवाद हुआ था। राजकिशोर के मुताबिक, मनीष को लगता था कि संतोष उनके संबंधों में रुकावट बन रहे हैं। इसी वजह से वह संतोष से नाराज था और उसने उनकी हत्या की योजना बनाई। राजकिशोर ने बताया कि मनीष ने इस काम में उससे भी सहयोग मांगा था। गमछे से गला घोंटा, पत्थर से सिर पर किए वार राजकिशोर ने सुपरवाइजर को कथित तौर पर बताया कि 20 अक्टूबर की शाम करीब 7 बजे वह और मनीष संतोष को फैक्ट्री के पास स्थित एक पहाड़ी पर ले गए। वहां मनीष ने संतोष के गले में गमछा डालकर उनका गला घोंट दिया, जबकि राजकिशोर ने उनके दोनों हाथ पीछे से पकड़ रखे थे। इसके बाद मनीष ने वहां पड़े पत्थर से संतोष के सिर पर कई वार किए। इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। राजकिशोर के अनुसार, हत्या के बाद दोनों शव को पास के एक गड्ढे में डालकर वहां से भाग गए। उसने यह भी बताया कि मनीष ने घटना की जानकारी किसी को देने पर उसे जान से मारने की धमकी दी थी। इसी डर से उसने अब तक किसी को कुछ नहीं बताया था। एक आरोपी पुलिस के हवाले, दूसरा फरार कंपनी के सुपरवाइजर अमिताभ दास ने घटना की जानकारी कोप्पल पुलिस को दी। इसके बाद राजकिशोर को कंपनी के सुपरवाइजर ने पुलिस के हवाले कर दिया, जबकि मनीष फरार हो गया। संतोष की मौत की खबर मिलने के बाद उनके बड़े भाई गौतम समेत परिवार के अन्य सदस्य 27 अक्टूबर को कर्नाटक पहुंचे। शव की पहचान और जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 31 अक्टूबर को वे संतोष का शव लेकर सहरसा पहुंचे। इसके बाद उनके बेटे ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया। परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की संतोष के भाई रंजीत ठाकुर ने बताया कि हत्या में सहरसा नगर निगम के वार्ड नंबर 46 के रहने वाले राजकिशोर यादव और मनीष यादव शामिल हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। सहरसा सदर थानाध्यक्ष अजय पासवान ने बताया कि घटना दूसरे राज्य की है। आरोपी सहरसा क्षेत्र के रहने वाले हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। सहरसा के 26 वर्षीय मजदूर संतोष ठाकुर की 20 अक्टूबर को कर्नाटक में हत्या कर दी गई। शनिवार को कर्नाटक पुलिस एंबुलेंस से उनका शव सहरसा लेकर पहुंची। परिजनों ने पत्नी के दूसरे व्यक्ति से संबंध को हत्या की वजह बताया है। मामले में पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में लिया है, जबकि दूसरा फरार बताया जा रहा है। संतोष सहरसा नगर निगम के धमसैनी वार्ड नंबर 46 के रहने वाले थे। वह सत्यनारायण ठाकुर के बेटे और चार भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। 9 अक्टूबर को काम के लिए कर्नाटक गए थे संतोष संतोष करीब डेढ़ साल से कर्नाटक के कोप्पल थाना क्षेत्र की एक फैक्ट्री में मजदूरी कर रहे थे। उनके बड़े भाई गौतम कुमार ने बताया कि संतोष 9 अक्टूबर को काम के लिए कर्नाटक गए थे। परिवार से उनकी आखिरी बार 19 अक्टूबर को बात हुई थी। गौतम के मुताबिक, 20 अक्टूबर से संतोष का फोन नहीं लग रहा था। उन्होंने फोन की लोकेशन पता की, जो कर्नाटक के कोप्पल में दिख रही थी। इसके बाद उन्होंने कंपनी के सुपरवाइजर अमिताभ दास से संपर्क किया। सुपरवाइजर ने बताया कि संतोष पांच दिनों से काम पर नहीं आ रहे थे। सुपरवाइजर से पूछताछ में सामने आई हत्या की बात गौतम ने बताया कि कंपनी के सुपरवाइजर ने संतोष के दोस्तों राजकिशोर और मनीष से पूछताछ की। इस दौरान राजकिशोर ने कथित तौर पर बताया कि फैक्ट्री में काम करने के दौरान मनीष का संतोष की पत्नी से संबंध हो गया था। इसकी जानकारी संतोष को मिलने पर दोनों के बीच विवाद हुआ था। राजकिशोर के मुताबिक, मनीष को लगता था कि संतोष उनके संबंधों में रुकावट बन रहे हैं। इसी वजह से वह संतोष से नाराज था और उसने उनकी हत्या की योजना बनाई। राजकिशोर ने बताया कि मनीष ने इस काम में उससे भी सहयोग मांगा था। गमछे से गला घोंटा, पत्थर से सिर पर किए वार राजकिशोर ने सुपरवाइजर को कथित तौर पर बताया कि 20 अक्टूबर की शाम करीब 7 बजे वह और मनीष संतोष को फैक्ट्री के पास स्थित एक पहाड़ी पर ले गए। वहां मनीष ने संतोष के गले में गमछा डालकर उनका गला घोंट दिया, जबकि राजकिशोर ने उनके दोनों हाथ पीछे से पकड़ रखे थे। इसके बाद मनीष ने वहां पड़े पत्थर से संतोष के सिर पर कई वार किए। इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। राजकिशोर के अनुसार, हत्या के बाद दोनों शव को पास के एक गड्ढे में डालकर वहां से भाग गए। उसने यह भी बताया कि मनीष ने घटना की जानकारी किसी को देने पर उसे जान से मारने की धमकी दी थी। इसी डर से उसने अब तक किसी को कुछ नहीं बताया था। एक आरोपी पुलिस के हवाले, दूसरा फरार कंपनी के सुपरवाइजर अमिताभ दास ने घटना की जानकारी कोप्पल पुलिस को दी। इसके बाद राजकिशोर को कंपनी के सुपरवाइजर ने पुलिस के हवाले कर दिया, जबकि मनीष फरार हो गया। संतोष की मौत की खबर मिलने के बाद उनके बड़े भाई गौतम समेत परिवार के अन्य सदस्य 27 अक्टूबर को कर्नाटक पहुंचे। शव की पहचान और जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 31 अक्टूबर को वे संतोष का शव लेकर सहरसा पहुंचे। इसके बाद उनके बेटे ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया। परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की संतोष के भाई रंजीत ठाकुर ने बताया कि हत्या में सहरसा नगर निगम के वार्ड नंबर 46 के रहने वाले राजकिशोर यादव और मनीष यादव शामिल हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। सहरसा सदर थानाध्यक्ष अजय पासवान ने बताया कि घटना दूसरे राज्य की है। आरोपी सहरसा क्षेत्र के रहने वाले हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।  

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