‘राजद नेता को प्रशासन-जनता से माफी मांगनी चाहिए’:जेडीयू विधायक बोले- रिजल्ट का धैर्यपूर्वक इंतजार करना चाहिए था, स्नातक सीट पर हार की समीक्षा करेंगे

‘राजद नेता को प्रशासन-जनता से माफी मांगनी चाहिए’:जेडीयू विधायक बोले- रिजल्ट का धैर्यपूर्वक इंतजार करना चाहिए था, स्नातक सीट पर हार की समीक्षा करेंगे

दरभंगा के बेनीपुर से जेडीयू विधायक प्रो. विनय कुमार चौधरी ने राजद पर निशाना साधा है। एमएलसी काउंटिंग के दौरान राजद नेताओं की ओर से जिला प्रशासन और चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों को अनावश्यक और मर्यादाहीन बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव और विधान पार्षद सुनील सिंह को जिला प्रशासन, जिलाधिकारी और चुनाव आयोग से माफी मांगनी चाहिए। स्नातक सीट के लिए मतगणना पूरी होने से पहले ही तेजस्वी यादव ने प्रशासन पर बेईमानी और वोट चोरी का आरोप लगा दिया था। उन्हें पहले चुनाव परिणाम का धैर्यपूर्वक इंतजार करना चाहिए था। आज उसी जिला प्रशासन और आयुक्त ने राजद प्रत्याशी अनिल कुमार झआ को जीत का प्रमाण पत्र दिया है। ऐसे में तेजस्वी यादव को अपनी बातों के लिए माफी मांगनी चाहिए। प्रशासन पर संदेह जताने वालों को अब जनता के फैसले का सम्मान करना चाहिए। ‘भाषा और व्यवहार में मर्यादा रखनी चाहिए’ जेडीयू विधायक ने कहा कि राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं के व्यवहार में राजनीतिक संस्कार-मर्यादा की कमी दिखाई दे रही है। विधान पार्षद सुनील सिंह की ओर से सोशल मीडिया पर जिलाधिकारी के लिए इस्तेमाल की गई भाषा की आलोचना करते हुए कहा कि उच्च सदन के सदस्य को अपनी भाषा और व्यवहार में मर्यादा रखनी चाहिए। अभद्र टिप्पणी के बावजूद जिला प्रशासन ने राजद प्रत्याशी को प्रमाण पत्र दिया। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन ने निष्पक्ष तरीके से अपनी जिम्मेदारी निभाई। चुनाव में जनता वोट देती है तो प्रत्याशी जीतता है। प्रशासन किसी को अपनी मर्जी से नहीं जिताता। जनता के फैसले पर भरोसा करना चाहिए। छह साल का कार्यकाल बहुत लंबा नहीं होता है। अगर इसी तरह का व्यवहार रहा तो आने वाले चुनाव में जनता फिर अपना फैसला सुना सकती है। बैलेट पेपर से चुनाव की मांग करने वालों को भी मिला जवाब विधायक ने राजद की ओर से बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस बार एमएलसी का चुनाव बैलेट पेपर से ही हुआ है, फिर भी राजद प्रत्याशी प्रथम वरीयता के मतों में पीछे रहने के बाद द्वितीय वरीयता की मतगणना के जरिए विजयी हुए। बैलेट पेपर से मतगणना में समय लगता है। स्नातक निर्वाचन में मतगणना की एक निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया है। प्रथम वरीयता के मतों के बाद द्वितीय वरीयता के मतों की गिनती भी नियम के अनुसार होती है। दरभंगा में करीब पांच हजार मत अवैध घोषित हुए। यह किसी एक प्रत्याशी के मत नहीं थे, बल्कि सभी प्रत्याशियों के मतों में ऐसे वोट शामिल थे। चुनाव आयोग ने मतदान के लिए पहले से ही दिशा-निर्देश और मानक निर्धारित कर रखे हैं। प्रत्याशियों की जिम्मेदारी थी कि वे अपने मतदाताओं को सही तरीके से मतदान करने की जानकारी देते। एनडीए प्रत्याशी की हार की होगी समीक्षा प्रो. विनय चौधरी ने स्वीकार किया कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट एनडीए के हाथ से निकलने को लेकर पार्टी गंभीर है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दरभंगा सर्किट हाउस में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर फीडबैक लिया है। भाजपा और जदयू दोनों स्तरों पर हार के कारणों की समीक्षा की जा रही है। किन क्षेत्रों में जनता का भरोसा कम हुआ और कहां संगठन से चूक हुई, इसकी बिंदुवार समीक्षा होगी। प्रथम वरीयता के मतों में एनडीए प्रत्याशी सर्वेश कुमार आगे थे, लेकिन निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया के तहत द्वितीय वरीयता के मतों की गिनती में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। यह चुनावी नियमों के अनुसार हुआ है। भरोसा जताया कि समीक्षा के बाद एनडीए जनता का खोया हुआ विश्वास दोबारा हासिल करेगा। ‘छह साल बाद फिर एनडीए के पास आएगी सीट’ जेडीयू विधायक ने दावा किया कि आगामी छह साल बाद होने वाले चुनाव में यह सीट फिर एनडीए के खाते में आएगी। एनडीए कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर अपनी कमियों को दूर करेंगे और संगठन को मजबूत बनाएंगे। एमएलसी चुनाव में मतदान की प्रक्रिया सामान्य चुनाव से अलग और तकनीकी होती है। मतदाताओं को सही तरीके से मतपत्र भरने की जानकारी देना जरूरी है। इसी तरह की जानकारी के अभाव में बड़ी संख्या में मत अवैध हुए हैं। चुनाव परिणाम को स्वीकार करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। हार-जीत को लेकर प्रशासन और चुनाव आयोग पर आरोप लगाने के बजाय राजनीतिक दलों को जनता के बीच अपनी कमियों की समीक्षा करनी चाहिए। दरभंगा के बेनीपुर से जेडीयू विधायक प्रो. विनय कुमार चौधरी ने राजद पर निशाना साधा है। एमएलसी काउंटिंग के दौरान राजद नेताओं की ओर से जिला प्रशासन और चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों को अनावश्यक और मर्यादाहीन बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव और विधान पार्षद सुनील सिंह को जिला प्रशासन, जिलाधिकारी और चुनाव आयोग से माफी मांगनी चाहिए। स्नातक सीट के लिए मतगणना पूरी होने से पहले ही तेजस्वी यादव ने प्रशासन पर बेईमानी और वोट चोरी का आरोप लगा दिया था। उन्हें पहले चुनाव परिणाम का धैर्यपूर्वक इंतजार करना चाहिए था। आज उसी जिला प्रशासन और आयुक्त ने राजद प्रत्याशी अनिल कुमार झआ को जीत का प्रमाण पत्र दिया है। ऐसे में तेजस्वी यादव को अपनी बातों के लिए माफी मांगनी चाहिए। प्रशासन पर संदेह जताने वालों को अब जनता के फैसले का सम्मान करना चाहिए। ‘भाषा और व्यवहार में मर्यादा रखनी चाहिए’ जेडीयू विधायक ने कहा कि राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं के व्यवहार में राजनीतिक संस्कार-मर्यादा की कमी दिखाई दे रही है। विधान पार्षद सुनील सिंह की ओर से सोशल मीडिया पर जिलाधिकारी के लिए इस्तेमाल की गई भाषा की आलोचना करते हुए कहा कि उच्च सदन के सदस्य को अपनी भाषा और व्यवहार में मर्यादा रखनी चाहिए। अभद्र टिप्पणी के बावजूद जिला प्रशासन ने राजद प्रत्याशी को प्रमाण पत्र दिया। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन ने निष्पक्ष तरीके से अपनी जिम्मेदारी निभाई। चुनाव में जनता वोट देती है तो प्रत्याशी जीतता है। प्रशासन किसी को अपनी मर्जी से नहीं जिताता। जनता के फैसले पर भरोसा करना चाहिए। छह साल का कार्यकाल बहुत लंबा नहीं होता है। अगर इसी तरह का व्यवहार रहा तो आने वाले चुनाव में जनता फिर अपना फैसला सुना सकती है। बैलेट पेपर से चुनाव की मांग करने वालों को भी मिला जवाब विधायक ने राजद की ओर से बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस बार एमएलसी का चुनाव बैलेट पेपर से ही हुआ है, फिर भी राजद प्रत्याशी प्रथम वरीयता के मतों में पीछे रहने के बाद द्वितीय वरीयता की मतगणना के जरिए विजयी हुए। बैलेट पेपर से मतगणना में समय लगता है। स्नातक निर्वाचन में मतगणना की एक निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया है। प्रथम वरीयता के मतों के बाद द्वितीय वरीयता के मतों की गिनती भी नियम के अनुसार होती है। दरभंगा में करीब पांच हजार मत अवैध घोषित हुए। यह किसी एक प्रत्याशी के मत नहीं थे, बल्कि सभी प्रत्याशियों के मतों में ऐसे वोट शामिल थे। चुनाव आयोग ने मतदान के लिए पहले से ही दिशा-निर्देश और मानक निर्धारित कर रखे हैं। प्रत्याशियों की जिम्मेदारी थी कि वे अपने मतदाताओं को सही तरीके से मतदान करने की जानकारी देते। एनडीए प्रत्याशी की हार की होगी समीक्षा प्रो. विनय चौधरी ने स्वीकार किया कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट एनडीए के हाथ से निकलने को लेकर पार्टी गंभीर है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दरभंगा सर्किट हाउस में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर फीडबैक लिया है। भाजपा और जदयू दोनों स्तरों पर हार के कारणों की समीक्षा की जा रही है। किन क्षेत्रों में जनता का भरोसा कम हुआ और कहां संगठन से चूक हुई, इसकी बिंदुवार समीक्षा होगी। प्रथम वरीयता के मतों में एनडीए प्रत्याशी सर्वेश कुमार आगे थे, लेकिन निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया के तहत द्वितीय वरीयता के मतों की गिनती में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। यह चुनावी नियमों के अनुसार हुआ है। भरोसा जताया कि समीक्षा के बाद एनडीए जनता का खोया हुआ विश्वास दोबारा हासिल करेगा। ‘छह साल बाद फिर एनडीए के पास आएगी सीट’ जेडीयू विधायक ने दावा किया कि आगामी छह साल बाद होने वाले चुनाव में यह सीट फिर एनडीए के खाते में आएगी। एनडीए कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर अपनी कमियों को दूर करेंगे और संगठन को मजबूत बनाएंगे। एमएलसी चुनाव में मतदान की प्रक्रिया सामान्य चुनाव से अलग और तकनीकी होती है। मतदाताओं को सही तरीके से मतपत्र भरने की जानकारी देना जरूरी है। इसी तरह की जानकारी के अभाव में बड़ी संख्या में मत अवैध हुए हैं। चुनाव परिणाम को स्वीकार करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। हार-जीत को लेकर प्रशासन और चुनाव आयोग पर आरोप लगाने के बजाय राजनीतिक दलों को जनता के बीच अपनी कमियों की समीक्षा करनी चाहिए।  

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