श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार और पुनर सुरजीत के नेता ज्ञानी हरप्रीत सिंह मानसा पहुंचे। उन्होंने परविंदर सिंह झोटा के परिवार से मुलाकात की और नशे के खिलाफ पूरे पंजाब को एकजुट होने की अपील की। उन्होंने परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर दुख साझा किया और उन्हें इंसाफ दिलाने की लड़ाई में साथ देने की बात कही। इस दौरान उन्होंने पंजाब में बढ़ते नशे के कारोबार पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नशे को खत्म करना किसी एक व्यक्ति या संगठन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए पूरे पंजाब को एक मंच पर आना होगा। 18 दिनों से धरना दे रहे परिवार के लोग दरअसल, 13 अक्टूबर को मानसा में नशा तस्करों द्वारा परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद से ही परिवार और समर्थकों की ओर से इंसाफ की मांग को लेकर धरना दिया जा रहा है। इंसाफ मोर्चे का प्रदर्शन लगातार जारी है और शनिवार को यह 18वें दिन में पहुंच गया। इसी बीच ज्ञानी हरप्रीत सिंह परिवार से मिलने पहुंचे और मोर्चे को अपना समर्थन दिया। ड्रग माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने से डर रही सरकारें ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि पंजाब में ड्रग माफिया इतना ताकतवर हो चुका है कि सरकारें भी उसके खिलाफ कार्रवाई करने से संकोच कर रही हैं। यह राज्य के लिए बेहद चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि नशे का कारोबार लगातार फैल रहा है और अब इसकी पहुंच स्कूलों तक हो गई है। 10वीं कक्षा तक के बच्चे भी नशे की चपेट में आ रहे हैं। अगर समय रहते इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया तो पंजाब की आने वाली पीढ़ी का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। राजनीति से ऊपर उठकर लड़नी होगी लड़ाई उन्होंने कहा कि पंजाब से नशे को खत्म करने के लिए हर समाज के व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। इसमें सभी राजनीतिक पार्टियों को भी एक साथ आना चाहिए। नशे के खिलाफ लड़ाई किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि पूरे पंजाब की लड़ाई है। सभी को मिलकर ऐसे प्रयास करने होंगे, जिससे युवाओं को नशे से बचाया जा सके। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि परविंदर सिंह झोटा को इंसाफ दिलाने के लिए मानसा में जो मोर्चा चल रहा है, उसमें हर व्यक्ति को शामिल होना चाहिए। अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के नेता भी इस धरने में पहुंच रहे हैं। उन्होंने नेताओं से अपील की कि वे राजनीति से ऊपर उठकर इस मामले में आवाज उठाएं। इस समय सबसे जरूरी है कि नशे के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ी जाए और परविंदर सिंह झोटा के परिवार को इंसाफ मिले।

