Zakir Naik Taliban Statement: अफगानिस्तान में लड़कियों और महिलाओं की पढ़ाई पर तालिबान की ओर से लगी पाबंदियों का इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक ने बचाव किया है। नाइक ने दावा किया कि लड़कियों की शिक्षा पर कोई पक्का बैन नहीं लगा है, बल्कि सुरक्षा कारणों और महिला शिक्षकों की कमी की वजह से इसे कुछ वक्त के लिए टाला भर गया है। जाकिर नाइक इस बयान पर भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों ने सवाल उठाए हैं। मलाला यूसुफजई के पिता जियाउद्दीन यूसुफजई ने भी नाइक के तर्क को चिंताजनक बताया है।
‘सिर्फ माहौल सुरक्षित होने का इंतजार’- नाइक
भारतीय जांच एजेंसियों की लिस्ट में वांछित और फिलहाल मलेशिया में शरण लेकर रह रहे जाकिर नाइक ने एक वीडियो मैसेज में दावा किया कि उन्होंने तालिबान के प्रतिनिधियों से खुद बातचीत की है। नाइक का कहना है कि तालिबान छठी कक्षा तक की बच्चियों को पढ़ाई की छूट देता है और उससे आगे की शिक्षा सिर्फ इसलिए रोकी गई है ताकि माहौल को सुरक्षित बनाया जा सके।
नाइक ने यह तर्क भी दिया कि अफगानिस्तान में महिला शिक्षकों की भारी किल्लत है और वहां की महिलाएं इस्लामिक स्टडीज, अरबी व शरिया में मास्टर डिग्री व पीएचडी कर सकती हैं। हालांकि, जमीन पर संयुक्त राष्ट्र और यूनिसेफ की रिपोर्ट नाइक के इन दावों की पोल खोलती हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2021 में सत्ता संभालने के बाद से तालिबान ने 26 लाख से ज्यादा लड़कियों को माध्यमिक और उच्च शिक्षा से पूरी तरह बेदखल कर दिया है।
‘अगर लड़कियां पढ़ेंगी ही नहीं, तो महिला टीचर्स कहां से आएंगी?’
जाकिर नाइक की इस दलील पर अफगानिस्तान और पाकिस्तान के प्रमुख कार्यकर्ताओं ने जमकर हमला बोला। अफगानिस्तान की निर्वासित सांसद मरियम सोलैमंखिल ने नाइक पर तंज कसते हुए लिखा, ‘नाइक के हिसाब से लड़कियां सिर्फ उन महिला शिक्षकों का इंतजार कर रही हैं, जिनके काम करने पर खुद तालिबान ने रोक लगा रखी है! क्या शानदार तर्क है।’
वहीं, नोबेल विजेता मलाला यूसुफजई के पिता जियाउद्दीन यूसुफजई ने कहा कि अनिश्चितकालीन पाबंदी को अस्थायी कहना और बिना हल बताए महिला टीचर्स की कमी का रोना रोना एक बेहद चिंताजनक तर्क है। इसके अलावा, बेल्जियम में रह रहे अफगान विशेषज्ञ अजीम शिनवारी ने पूछा कि जब बच्चियों के स्कूल ही बंद रहेंगे तो भविष्य के लिए योग्य शिक्षिकाएं आसमान से टपकेंगी क्या?
मलेशियाई प्रधानमंत्री पर भी उठे सवाल
नाइक के इस विवादित बयान के बाद भारतीय विद्वानों और वैज्ञानिकों ने मलेशियाई सरकार के रुख की आलोचना की है। भारतीय इस्लामिक विद्वान ए फैजुर रहमान और इतिहासकार एस इरफान हबीब ने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम को टैग करते हुए सवाल उठाया कि आखिर कट्टरपंथी सोच का समर्थन करने वाले व्यक्ति को शरण क्यों दी जा रही है। गौरतलब है कि जाकिर नाइक 2016 में भारत से फरार हो गया था, जिसके बाद उस पर नफरत फैलाने, मनी लॉन्ड्रिंग और गैरकानूनी गतिविधियों के केस दर्ज किए गए थे। 2017 से वह मलेशिया में स्थायी निवासी के तौर पर रह रहा है और भारत की प्रत्यर्पण की कोशिशें अब तक अधूरी हैं।
2030 तक अफगानिस्तान में महिला शिक्षकों की कमी का खतरा
UNICEF के ताजा अनुमान के अनुसार, अगर तालिबान का यही रवैया बना रहा, तो 2030 तक अफगानिस्तान में 20,000 महिला शिक्षकों और 5,400 महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भयानक कमी हो जाएगी।

