IAS संजय कुमार सिंह होंगे CM के प्रधान सचिव!:नीतीश कुमार के करीबी अधिकारी को सम्राट ने बुलाया, साधेंगे लव-कुश समीकरण

IAS संजय कुमार सिंह होंगे CM के प्रधान सचिव!:नीतीश कुमार के करीबी अधिकारी को सम्राट ने बुलाया, साधेंगे लव-कुश समीकरण

बिहार सरकार में ओडिशा कैडर के सीनियर IAS अधिकारी संजय कुमार सिंह की एंट्री होने जा रही है। वह सीएम सम्राट चौधरी के प्रधान सचिव बनने वाले हैं। संजय सिंह की गिनती पूर्व सीएम नीतीश कुमार के करीबी अधिकारियों में होती है। सम्राट चौधरी ने उन्हें बिहार डेप्यूट करने की डिमांड रखी है। भास्कर की स्पेशल रिपोर्ट में जानिए, कौन हैं आईएएस संजय कुमार सिंह? बिहार से उनका क्या नाता है? क्यों सीएम के प्रधान सचिव का पद मिलने वाला है? सीएम सम्राट की मांग के बाद विजिलेंस ने दी NOC ओडिशा कैडर के सीनियर IAS अधिकारी संजय सिंह के बिहार वापसी की प्रशासनिक प्रक्रिया आखिरी चरण में है। एक दो दिन में नोटिफिकेशन जारी होने की उम्मीद है। 1997 बैच के IAS अफसर संजय को ओडिशा से बिहार कैडर में इंटर-कैडर प्रतिनियुक्ति पर लाने की औपचारिकता भर बाकी है। ओडिशा सरकार से विजिलेंस रिपोर्ट मिलने के बाद उन्हें बिहार भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट ने संजय सिंह को बिहार डेप्यूट करने की डिमांड रखी है। उनकी मांग के बाद ओडिशा सरकार ने इंटर स्टेट डेप्यूटेशन को हरी झंडी दी। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने ओडिशा सरकार से एनओसी की मांग की है। मंत्रालय ने आईएएस संजय की सतर्कता स्थिति और संपत्ति की जानकारी मांगी है। मंत्रालय ने इस संबंध में 22 अक्टूबर 2026 को पत्र जारी किया था। सीएम सम्राट के प्रधान सचिव बनेंगे संजय आईएएस संजय कुमार सिंह को सीएम सचिवालय में तैनात किया जा सकता है। सीएम सचिवालय के सूत्रों की मानें तो संजय को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का प्रधान सचिव बनाया जा सकता है। ऐसा होता है तो वे नीतीश कुमार की पसंद के उन अधिकारियों में पहले होंगे, जिन्हें सम्राट चौधरी अपने साथ सीएम सचिवालय में अहम जिम्मेदारी देंगे। सम्राट चौधरी के इस संभावित फैसले को उनकी प्रशासनिक रणनीति में यू-टर्न के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद सम्राट ने नीतीश के कार्यकाल में सीएम सचिवालय में अहम भूमिका निभाने वाले अधिकारियों को धीरे-धीरे विदा किया था। क्या नीतीश कुमार की सोशल इंजीनियरिंग पर लौटेंगे सम्राट? नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में प्रशासनिक नियुक्तियों के स्तर पर भी सोशल इंजीनियरिंग की झलक दिखती थी। सीएम सचिवालय में अलग-अलग सामाजिक वर्ग से आने वाले आईएएस अधिकारियों को जगह दी जाती थी। सम्राट के सत्ता संभालने के बाद सचिवालय की पुरानी टीम बदल गई। मौजूदा समय में सीएम सचिवालय में दो आईएएस अधिकारी लोकेश कुमार सिंह और संजय कुमार सिंह (बिहार कैडर, 2007 बैच) तैनात हैं। दोनों सचिव के पद पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कौन हैं ओडिशा कैडर के आईएएस संजय कुमार सिंह? आईएएस संजय नीतीश सरकार में 7 साल तक सेवा दे चुके हैं। पटना के DM से CM के संयुक्त सचिव तक का अनुभव रखते हैं। मूल रूप से बिहार के नालंदा के रहने वाले हैं। सीएम नीतीश कुमार के काफी करीब माने जाते हैं। नीतीश कुमार की सरकार के दौरान 12 फरवरी 2008 को बिहार प्रतिनियुक्ति पर आए थे। शुरुआत में उन्हें गृह विभाग में अपर सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस पद पर उन्होंने 12 फरवरी से 17 मार्च 2008 तक काम किया। इसके बाद राज्य सरकार ने उन्हें गयाजी का जिलाधिकारी नियुक्त किया। 18 मार्च 2008 को संजय सिंह ने गयाजी के जिलाधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इस पद पर 11 फरवरी 2011 तक रहे। इसके बाद पटना का जिलाधिकारी बने। पटना जैसे महत्वपूर्ण जिले की कमान संभालना उनके प्रशासनिक करियर का अहम पड़ाव रहा। पटना में जिलाधिकारी के रूप में उन्होंने 11 मार्च 2013 तक काम किया। राजधानी का प्रशासनिक नेतृत्व करने के बाद उनकी भूमिका जिला प्रशासन तक सीमित नहीं रही। नीतीश सरकार ने उन्हें मुख्यमंत्री सचिवालय में स्पेशल सेक्रेटरी की जिम्मेदारी सौंपी और वे सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय की व्यवस्था से जुड़ गए। नीतीश कुमार के कार्यकाल में संजय कुमार सिंह मुख्यमंत्री सचिवालय में स्पेशल सेक्रेटरी के पद पर तैनात रहे। इस भूमिका में उन्हें सरकार के शीर्ष स्तर पर काम करने का अनुभव मिला। ओडिशा में भी संभाल रहे अहम जिम्मेदारियां बिहार में प्रतिनियुक्ति का कार्यकाल पूरा होने के बाद संजय कुमार सिंह अपने गृह कैडर ओडिशा लौट गए। वहां भी उन्होंने महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर काम किया। वे ओडिशा सरकार में मुख्यमंत्री के सचिव के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। फिलहाल वे ओडिशा सरकार के ग्रामीण विकास विभाग में प्रधान सचिव के पद पर तैनात हैं। इसके साथ ही उनके पास सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के प्रधान सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी है। ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी के साथ सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का अतिरिक्त कार्यभार संभालना उनके मौजूदा प्रशासनिक दायित्वों का दायरा दिखाता है। दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र की पढ़ाई संजय सिंह की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी मजबूत रही है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। वह हिंदी और अंग्रेजी के साथ ओड़िया भाषा भी समझते और बोलते हैं। संजय सिंह ने IAS बनने से पहले बैंकिंग और शिक्षण के क्षेत्र में भी काम किया है। उनके करियर की शुरुआत अक्टूबर 1994 में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) में असिस्टेंट मैनेजर के रूप में हुई थी। उन्होंने यहां फरवरी 1996 तक करीब एक साल पांच महीने काम किया। इसके बाद दिसंबर 1996 से अगस्त 1997 तक मगध विश्वविद्यालय में लेक्चरर रहे। केंद्र ने क्यों मांगी विजिलेंस रिपोर्ट? DoPT के अवर सचिव रुपेश कुमार ने 22 अक्टूबर को ओडिशा के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर संजय कुमार सिंह की मौजूदा विजिलेंस स्थिति और नवीनतम IPR फाइलिंग स्टेटस उपलब्ध कराने को कहा है। आईएएस अधिकारी के संपत्ति का ब्योरा भी मांगा गया है। पत्र में कहा गया है कि यह प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया में जरूरी है। लव-कुश समीकरण से भी जोड़कर देखी जा रही वापसी बिहार की राजनीति में कुर्मी और कुशवाहा समुदाय के सामाजिक-राजनीतिक समीकरण को ‘लव-कुश’ समीकरण कहा जाता है। सम्राट चौधरी सरकार में संजय कुमार सिंह की संभावित भूमिका को लेकर इस राजनीतिक संदर्भ की भी चर्चा हो रही है। संजय सिंह कुर्मी जाति से हैं। बिहार सरकार में ओडिशा कैडर के सीनियर IAS अधिकारी संजय कुमार सिंह की एंट्री होने जा रही है। वह सीएम सम्राट चौधरी के प्रधान सचिव बनने वाले हैं। संजय सिंह की गिनती पूर्व सीएम नीतीश कुमार के करीबी अधिकारियों में होती है। सम्राट चौधरी ने उन्हें बिहार डेप्यूट करने की डिमांड रखी है। भास्कर की स्पेशल रिपोर्ट में जानिए, कौन हैं आईएएस संजय कुमार सिंह? बिहार से उनका क्या नाता है? क्यों सीएम के प्रधान सचिव का पद मिलने वाला है? सीएम सम्राट की मांग के बाद विजिलेंस ने दी NOC ओडिशा कैडर के सीनियर IAS अधिकारी संजय सिंह के बिहार वापसी की प्रशासनिक प्रक्रिया आखिरी चरण में है। एक दो दिन में नोटिफिकेशन जारी होने की उम्मीद है। 1997 बैच के IAS अफसर संजय को ओडिशा से बिहार कैडर में इंटर-कैडर प्रतिनियुक्ति पर लाने की औपचारिकता भर बाकी है। ओडिशा सरकार से विजिलेंस रिपोर्ट मिलने के बाद उन्हें बिहार भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट ने संजय सिंह को बिहार डेप्यूट करने की डिमांड रखी है। उनकी मांग के बाद ओडिशा सरकार ने इंटर स्टेट डेप्यूटेशन को हरी झंडी दी। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने ओडिशा सरकार से एनओसी की मांग की है। मंत्रालय ने आईएएस संजय की सतर्कता स्थिति और संपत्ति की जानकारी मांगी है। मंत्रालय ने इस संबंध में 22 अक्टूबर 2026 को पत्र जारी किया था। सीएम सम्राट के प्रधान सचिव बनेंगे संजय आईएएस संजय कुमार सिंह को सीएम सचिवालय में तैनात किया जा सकता है। सीएम सचिवालय के सूत्रों की मानें तो संजय को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का प्रधान सचिव बनाया जा सकता है। ऐसा होता है तो वे नीतीश कुमार की पसंद के उन अधिकारियों में पहले होंगे, जिन्हें सम्राट चौधरी अपने साथ सीएम सचिवालय में अहम जिम्मेदारी देंगे। सम्राट चौधरी के इस संभावित फैसले को उनकी प्रशासनिक रणनीति में यू-टर्न के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद सम्राट ने नीतीश के कार्यकाल में सीएम सचिवालय में अहम भूमिका निभाने वाले अधिकारियों को धीरे-धीरे विदा किया था। क्या नीतीश कुमार की सोशल इंजीनियरिंग पर लौटेंगे सम्राट? नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में प्रशासनिक नियुक्तियों के स्तर पर भी सोशल इंजीनियरिंग की झलक दिखती थी। सीएम सचिवालय में अलग-अलग सामाजिक वर्ग से आने वाले आईएएस अधिकारियों को जगह दी जाती थी। सम्राट के सत्ता संभालने के बाद सचिवालय की पुरानी टीम बदल गई। मौजूदा समय में सीएम सचिवालय में दो आईएएस अधिकारी लोकेश कुमार सिंह और संजय कुमार सिंह (बिहार कैडर, 2007 बैच) तैनात हैं। दोनों सचिव के पद पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कौन हैं ओडिशा कैडर के आईएएस संजय कुमार सिंह? आईएएस संजय नीतीश सरकार में 7 साल तक सेवा दे चुके हैं। पटना के DM से CM के संयुक्त सचिव तक का अनुभव रखते हैं। मूल रूप से बिहार के नालंदा के रहने वाले हैं। सीएम नीतीश कुमार के काफी करीब माने जाते हैं। नीतीश कुमार की सरकार के दौरान 12 फरवरी 2008 को बिहार प्रतिनियुक्ति पर आए थे। शुरुआत में उन्हें गृह विभाग में अपर सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस पद पर उन्होंने 12 फरवरी से 17 मार्च 2008 तक काम किया। इसके बाद राज्य सरकार ने उन्हें गयाजी का जिलाधिकारी नियुक्त किया। 18 मार्च 2008 को संजय सिंह ने गयाजी के जिलाधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इस पद पर 11 फरवरी 2011 तक रहे। इसके बाद पटना का जिलाधिकारी बने। पटना जैसे महत्वपूर्ण जिले की कमान संभालना उनके प्रशासनिक करियर का अहम पड़ाव रहा। पटना में जिलाधिकारी के रूप में उन्होंने 11 मार्च 2013 तक काम किया। राजधानी का प्रशासनिक नेतृत्व करने के बाद उनकी भूमिका जिला प्रशासन तक सीमित नहीं रही। नीतीश सरकार ने उन्हें मुख्यमंत्री सचिवालय में स्पेशल सेक्रेटरी की जिम्मेदारी सौंपी और वे सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय की व्यवस्था से जुड़ गए। नीतीश कुमार के कार्यकाल में संजय कुमार सिंह मुख्यमंत्री सचिवालय में स्पेशल सेक्रेटरी के पद पर तैनात रहे। इस भूमिका में उन्हें सरकार के शीर्ष स्तर पर काम करने का अनुभव मिला। ओडिशा में भी संभाल रहे अहम जिम्मेदारियां बिहार में प्रतिनियुक्ति का कार्यकाल पूरा होने के बाद संजय कुमार सिंह अपने गृह कैडर ओडिशा लौट गए। वहां भी उन्होंने महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर काम किया। वे ओडिशा सरकार में मुख्यमंत्री के सचिव के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। फिलहाल वे ओडिशा सरकार के ग्रामीण विकास विभाग में प्रधान सचिव के पद पर तैनात हैं। इसके साथ ही उनके पास सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के प्रधान सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी है। ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी के साथ सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का अतिरिक्त कार्यभार संभालना उनके मौजूदा प्रशासनिक दायित्वों का दायरा दिखाता है। दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र की पढ़ाई संजय सिंह की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी मजबूत रही है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। वह हिंदी और अंग्रेजी के साथ ओड़िया भाषा भी समझते और बोलते हैं। संजय सिंह ने IAS बनने से पहले बैंकिंग और शिक्षण के क्षेत्र में भी काम किया है। उनके करियर की शुरुआत अक्टूबर 1994 में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) में असिस्टेंट मैनेजर के रूप में हुई थी। उन्होंने यहां फरवरी 1996 तक करीब एक साल पांच महीने काम किया। इसके बाद दिसंबर 1996 से अगस्त 1997 तक मगध विश्वविद्यालय में लेक्चरर रहे। केंद्र ने क्यों मांगी विजिलेंस रिपोर्ट? DoPT के अवर सचिव रुपेश कुमार ने 22 अक्टूबर को ओडिशा के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर संजय कुमार सिंह की मौजूदा विजिलेंस स्थिति और नवीनतम IPR फाइलिंग स्टेटस उपलब्ध कराने को कहा है। आईएएस अधिकारी के संपत्ति का ब्योरा भी मांगा गया है। पत्र में कहा गया है कि यह प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया में जरूरी है। लव-कुश समीकरण से भी जोड़कर देखी जा रही वापसी बिहार की राजनीति में कुर्मी और कुशवाहा समुदाय के सामाजिक-राजनीतिक समीकरण को ‘लव-कुश’ समीकरण कहा जाता है। सम्राट चौधरी सरकार में संजय कुमार सिंह की संभावित भूमिका को लेकर इस राजनीतिक संदर्भ की भी चर्चा हो रही है। संजय सिंह कुर्मी जाति से हैं।  

​

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *