कटिहार, ट्रेन में अचानक आग लग जाए और बोगियों में यात्री फंस जाएं तो उन्हें सुरक्षित बाहर कैसे निकाला जाएगा? रेलवे, एनडीआरएफ और दमकल विभाग की टीम ने गुरुवार को रहमतपुर रेलवे स्टेशन पर इसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों का अभ्यास किया। मॉक ड्रिल के दौरान ट्रेन की दो बोगियों में आग लगने और दो दर्जन से अधिक यात्रियों के फंसने की स्थिति बनाई गई। इसके बाद बचाव दल ने यात्रियों को बाहर निकालने, घायलों को प्राथमिक उपचार देने और अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया का पूर्वाभ्यास किया। मॉक ड्रिल के तहत अररिया कोर्ट जंक्शन से रहमतपुर स्टेशन की ओर आ रही एक पैसेंजर ट्रेन में शॉर्ट सर्किट के कारण दो बोगियों में आग लगने की स्थिति बनाई गई। बोगियों में दो दर्जन से अधिक यात्रियों के फंसे होने का परिदृश्य तैयार किया गया। इसका उद्देश्य यह जांचना था कि ऐसी स्थिति में रेलवे और अन्य आपातकालीन एजेंसियां कितनी तेजी से कार्रवाई करती हैं। देखें, मौके से आई तस्वीरें… सूचना मिलते ही कंट्रोल रूम और बचाव दल सक्रिय अभ्यास के दौरान स्टेशन मास्टर ने घटना की सूचना कंट्रोल रूम, आरपीएफ, जीआरपी, दमकल विभाग और एनडीआरएफ को दी। सूचना मिलते ही संबंधित टीमों के मौके पर पहुंचने और राहत-बचाव अभियान शुरू करने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। दमकल कर्मियों ने पानी की मदद से आग बुझाने की कार्रवाई का पूर्वाभ्यास किया। स्ट्रेचर, रस्सी और कटर से यात्रियों को निकाला एनडीआरएफ के जवानों ने बोगियों में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने के लिए स्ट्रेचर, रस्सी और कटर का इस्तेमाल किया। अभ्यास में यात्रियों को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया अपनाई गई। इसके बाद घायलों को प्राथमिक उपचार देने और एंबुलेंस से सदर अस्पताल पहुंचाने का पूर्वाभ्यास किया गया। 40 NDRF जवानों ने लिया हिस्सा एनडीआरएफ की 9वीं बटालियन के कमांडेंट एचपीएस कंडारी ने बताया कि मॉक ड्रिल में एनडीआरएफ के करीब 40 जवान शामिल हुए। टीम ने बोगियों में फंसे सभी यात्रियों को सुरक्षित निकालने का अभ्यास किया। रेलवे अधिकारियों ने बचाव अभियान में लगे समय और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का आकलन भी किया। आपात स्थिति में तालमेल बेहतर करना उद्देश्य एडीआरएम मनोज सिंह ने बताया कि रेलवे और एनडीआरएफ संयुक्त रूप से हर साल अलग-अलग जिलों में मॉक ड्रिल करते हैं। इसका उद्देश्य वास्तविक दुर्घटना के समय विभागों के बीच तालमेल बेहतर करना और राहत-बचाव कार्य को तेजी से पूरा करना है। अभ्यास में रेलवे के अधिकारी, आरपीएफ इंस्पेक्टर, स्टेशन प्रबंधक, अररिया जिला प्रशासन के प्रतिनिधि और आरएस थाना की पुलिस भी मौजूद रही। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के अभ्यास से वास्तविक हादसे के दौरान जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। कटिहार, ट्रेन में अचानक आग लग जाए और बोगियों में यात्री फंस जाएं तो उन्हें सुरक्षित बाहर कैसे निकाला जाएगा? रेलवे, एनडीआरएफ और दमकल विभाग की टीम ने गुरुवार को रहमतपुर रेलवे स्टेशन पर इसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों का अभ्यास किया। मॉक ड्रिल के दौरान ट्रेन की दो बोगियों में आग लगने और दो दर्जन से अधिक यात्रियों के फंसने की स्थिति बनाई गई। इसके बाद बचाव दल ने यात्रियों को बाहर निकालने, घायलों को प्राथमिक उपचार देने और अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया का पूर्वाभ्यास किया। मॉक ड्रिल के तहत अररिया कोर्ट जंक्शन से रहमतपुर स्टेशन की ओर आ रही एक पैसेंजर ट्रेन में शॉर्ट सर्किट के कारण दो बोगियों में आग लगने की स्थिति बनाई गई। बोगियों में दो दर्जन से अधिक यात्रियों के फंसे होने का परिदृश्य तैयार किया गया। इसका उद्देश्य यह जांचना था कि ऐसी स्थिति में रेलवे और अन्य आपातकालीन एजेंसियां कितनी तेजी से कार्रवाई करती हैं। देखें, मौके से आई तस्वीरें… सूचना मिलते ही कंट्रोल रूम और बचाव दल सक्रिय अभ्यास के दौरान स्टेशन मास्टर ने घटना की सूचना कंट्रोल रूम, आरपीएफ, जीआरपी, दमकल विभाग और एनडीआरएफ को दी। सूचना मिलते ही संबंधित टीमों के मौके पर पहुंचने और राहत-बचाव अभियान शुरू करने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। दमकल कर्मियों ने पानी की मदद से आग बुझाने की कार्रवाई का पूर्वाभ्यास किया। स्ट्रेचर, रस्सी और कटर से यात्रियों को निकाला एनडीआरएफ के जवानों ने बोगियों में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने के लिए स्ट्रेचर, रस्सी और कटर का इस्तेमाल किया। अभ्यास में यात्रियों को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया अपनाई गई। इसके बाद घायलों को प्राथमिक उपचार देने और एंबुलेंस से सदर अस्पताल पहुंचाने का पूर्वाभ्यास किया गया। 40 NDRF जवानों ने लिया हिस्सा एनडीआरएफ की 9वीं बटालियन के कमांडेंट एचपीएस कंडारी ने बताया कि मॉक ड्रिल में एनडीआरएफ के करीब 40 जवान शामिल हुए। टीम ने बोगियों में फंसे सभी यात्रियों को सुरक्षित निकालने का अभ्यास किया। रेलवे अधिकारियों ने बचाव अभियान में लगे समय और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का आकलन भी किया। आपात स्थिति में तालमेल बेहतर करना उद्देश्य एडीआरएम मनोज सिंह ने बताया कि रेलवे और एनडीआरएफ संयुक्त रूप से हर साल अलग-अलग जिलों में मॉक ड्रिल करते हैं। इसका उद्देश्य वास्तविक दुर्घटना के समय विभागों के बीच तालमेल बेहतर करना और राहत-बचाव कार्य को तेजी से पूरा करना है। अभ्यास में रेलवे के अधिकारी, आरपीएफ इंस्पेक्टर, स्टेशन प्रबंधक, अररिया जिला प्रशासन के प्रतिनिधि और आरएस थाना की पुलिस भी मौजूद रही। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के अभ्यास से वास्तविक हादसे के दौरान जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।

