बिहार शरीफ में नवजात की मौत:सरकारी डॉक्टर पर डराकर प्राइवेट अस्पताल ले जाने का आरोप; 5 सदस्यीय जांच टीम गठित

बिहार शरीफ में नवजात की मौत:सरकारी डॉक्टर पर डराकर प्राइवेट अस्पताल ले जाने का आरोप; 5 सदस्यीय जांच टीम गठित

बिहारशरीफ के मॉडल (सदर) अस्पताल में मरीज को बहला-फुसलाकर डॉक्टर की ओर से अपने निजी क्लिनिक में ले जाने का मामला सामने आया है। आरोप शिशु विभाग में तैनात डॉ. पंकज कुमार पर लगा है। परिजन का आरोप है कि उन्होंने डरा-धमकाकर एक स्वस्थ नवजात को इतवारी बाजार स्थित अपने निजी क्लिनिक ‘मम्मी बेबी केयर’ में भर्ती करा लिया, जहां इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई। इस घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने जमकर हंगामा किया। शव लेकर सिविल सर्जन कार्यालय पहुंच गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. जय प्रकाश सिंह ने 5 सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी है। ‘सदर अस्पताल में हुआ था जन्म, धूप दिखाने गए तो डॉक्टर ने डराया’ नवादा जिले के कासीचक प्रखंड अंतर्गत बेलड़ गांव निवासी आदर्श राज ने अपनी पत्नी पूनम कुमारी को डिलीवरी के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल में भर्ती कराया था। ऑपरेशन से बच्चे का जन्म हुआ। नवजात पूरी तरह स्वस्थ था। बुआ सरिता कुमारी और पिता आदर्श राज ने बताया कि रात भर बच्चा बिल्कुल ठीक रहा और दूध भी पिया। अगली सुबह जब वे बच्चे को धूप दिखाने ले गए, तो शरीर में हल्का पीलापन महसूस हुआ बच्चे को दिखाने सदर अस्पताल के शिशु वार्ड में गए, जहां डॉ. पंकज कुमार ऑन-ड्यूटी थे। आरोप है कि डॉ. पंकज ने बच्चे को देखते ही कहा कि यह ‘इमरजेंसी’ में है और चार घंटे के अंदर बाहर से जांच रिपोर्ट मांगी। जब परिजनों ने इतनी जल्दी रिपोर्ट लाने में असमर्थता जताई और सलाह मांगी, तो डॉक्टर ने वार्ड के गेट से बाहर बुलाकर कहा कि सरकारी अस्पताल में कुछ नहीं हो पाता है। इसे इतवारी बाजार स्थित उनके निजी क्लिनिक ‘मम्मी बेबी हेल्थ केयर’ ले जाओ। 100% गारंटी देकर रोका, रात 3 बजे मुंह से खून फेंकने पर किया रेफर डॉक्टर के झांसे में आकर परिजन सुबह 8 बजे बच्चे को उनके निजी क्लिनिक ले गए। वहां ऑक्सीजन लेवल कम और पीलिया बताकर बच्चे को भर्ती कर लिया गया और मोटी रकम (करीब 15-20 हजार रुपए) की मांग की गई। पिता आदर्श राज ने बताया कि दिन भर में बच्चे की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। शाम 5:30 बजे परिजनों ने डॉक्टर के आगे हाथ जोड़े कि वे इतना खर्च नहीं उठा सकते और बच्चे में सुधार भी नहीं है, इसलिए उन्हें छुट्टी दे दी जाए। तीन-चार बार गुहार लगाने के बाद भी डॉक्टर ने बच्चा नहीं दिया और कहा कि हड़बड़ा क्यों रहे हैं? हम 100 प्रतिशत गारंटी लेते हैं कि बच्चे को मरने नहीं देंगे। इसके बाद रात में डॉक्टर क्लिनिक छोड़कर अपने घर चले गए। तड़के करीब 3 बजे जब बच्चे का ऑक्सीजन लेवल गिरकर 25 पर आ गया और उसके नाक-मुंह से खून आने लगा, तब स्टाफ ने आनन-फानन में वेंटिलेटर का बहाना बनाकर बच्चे को नाला रोड स्थित एक अन्य निजी क्लिनिक में रेफर कर दिया। जहां पहुंचते ही बच्चे ने दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत के बाद क्लिनिक कर्मियों ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। पीड़ित बुआ और पिता ने इसे ‘हत्या’ करार देते हुए आरोपी डॉक्टर को नौकरी से बर्खास्त करने की मांग की है। सिविल सर्जन ने बनाई 5 सदस्यीय जांच कमेटी परिजनों की शिकायत पर सिविल सर्जन डॉ. जय प्रकाश सिंह ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने कहा कि शिशु विभाग के डॉक्टरों और कर्मियों की ऐसी गलत गतिविधियों से सरकारी अस्पताल की बदनामी होती है और मरीजों का भरोसा टूटता है, जबकि एसएनसीयू में संबंधित डॉक्टर के निजी क्लिनिक से कहीं बेहतर व्यवस्था उपलब्ध है। सीएस ने जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. राकेश कुमार के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जांच में दोषी पाए जाने पर डॉक्टर के निलंबन के लिए विभाग को अनुशंसा भेजी जाएगी। डॉ. पंकज ने आरोपों को बताया गलत वहीं, इस पूरे मामले पर डॉ. पंकज कुमार ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि सदर अस्पताल में ड्यूटी के दौरान उनकी मुलाकात बच्चे के परिजनों से हुई ही नहीं थी, इसलिए बहलाकर क्लिनिक लाने का आरोप गलत है। डॉक्टर ने दावा किया कि परिजन तीन साल पहले भी अपने एक बच्चे का इलाज उनसे करा चुके थे, इसीलिए वे खुद इस नवजात को लेकर उनके पास आए थे। उनके पास सरकारी अस्पताल का कोई पर्चा या रिपोर्ट नहीं थी। जब बच्चे को भर्ती कराया गया, तब उसकी हालत बेहद गंभीर थी। बिलीरुबिन (पीलिया) का स्तर 32 पहुंच चुका था, ऐसी स्थिति में बच्चे को बचाना मुश्किल होता है। बिहारशरीफ के मॉडल (सदर) अस्पताल में मरीज को बहला-फुसलाकर डॉक्टर की ओर से अपने निजी क्लिनिक में ले जाने का मामला सामने आया है। आरोप शिशु विभाग में तैनात डॉ. पंकज कुमार पर लगा है। परिजन का आरोप है कि उन्होंने डरा-धमकाकर एक स्वस्थ नवजात को इतवारी बाजार स्थित अपने निजी क्लिनिक ‘मम्मी बेबी केयर’ में भर्ती करा लिया, जहां इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई। इस घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने जमकर हंगामा किया। शव लेकर सिविल सर्जन कार्यालय पहुंच गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. जय प्रकाश सिंह ने 5 सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी है। ‘सदर अस्पताल में हुआ था जन्म, धूप दिखाने गए तो डॉक्टर ने डराया’ नवादा जिले के कासीचक प्रखंड अंतर्गत बेलड़ गांव निवासी आदर्श राज ने अपनी पत्नी पूनम कुमारी को डिलीवरी के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल में भर्ती कराया था। ऑपरेशन से बच्चे का जन्म हुआ। नवजात पूरी तरह स्वस्थ था। बुआ सरिता कुमारी और पिता आदर्श राज ने बताया कि रात भर बच्चा बिल्कुल ठीक रहा और दूध भी पिया। अगली सुबह जब वे बच्चे को धूप दिखाने ले गए, तो शरीर में हल्का पीलापन महसूस हुआ बच्चे को दिखाने सदर अस्पताल के शिशु वार्ड में गए, जहां डॉ. पंकज कुमार ऑन-ड्यूटी थे। आरोप है कि डॉ. पंकज ने बच्चे को देखते ही कहा कि यह ‘इमरजेंसी’ में है और चार घंटे के अंदर बाहर से जांच रिपोर्ट मांगी। जब परिजनों ने इतनी जल्दी रिपोर्ट लाने में असमर्थता जताई और सलाह मांगी, तो डॉक्टर ने वार्ड के गेट से बाहर बुलाकर कहा कि सरकारी अस्पताल में कुछ नहीं हो पाता है। इसे इतवारी बाजार स्थित उनके निजी क्लिनिक ‘मम्मी बेबी हेल्थ केयर’ ले जाओ। 100% गारंटी देकर रोका, रात 3 बजे मुंह से खून फेंकने पर किया रेफर डॉक्टर के झांसे में आकर परिजन सुबह 8 बजे बच्चे को उनके निजी क्लिनिक ले गए। वहां ऑक्सीजन लेवल कम और पीलिया बताकर बच्चे को भर्ती कर लिया गया और मोटी रकम (करीब 15-20 हजार रुपए) की मांग की गई। पिता आदर्श राज ने बताया कि दिन भर में बच्चे की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। शाम 5:30 बजे परिजनों ने डॉक्टर के आगे हाथ जोड़े कि वे इतना खर्च नहीं उठा सकते और बच्चे में सुधार भी नहीं है, इसलिए उन्हें छुट्टी दे दी जाए। तीन-चार बार गुहार लगाने के बाद भी डॉक्टर ने बच्चा नहीं दिया और कहा कि हड़बड़ा क्यों रहे हैं? हम 100 प्रतिशत गारंटी लेते हैं कि बच्चे को मरने नहीं देंगे। इसके बाद रात में डॉक्टर क्लिनिक छोड़कर अपने घर चले गए। तड़के करीब 3 बजे जब बच्चे का ऑक्सीजन लेवल गिरकर 25 पर आ गया और उसके नाक-मुंह से खून आने लगा, तब स्टाफ ने आनन-फानन में वेंटिलेटर का बहाना बनाकर बच्चे को नाला रोड स्थित एक अन्य निजी क्लिनिक में रेफर कर दिया। जहां पहुंचते ही बच्चे ने दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत के बाद क्लिनिक कर्मियों ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। पीड़ित बुआ और पिता ने इसे ‘हत्या’ करार देते हुए आरोपी डॉक्टर को नौकरी से बर्खास्त करने की मांग की है। सिविल सर्जन ने बनाई 5 सदस्यीय जांच कमेटी परिजनों की शिकायत पर सिविल सर्जन डॉ. जय प्रकाश सिंह ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने कहा कि शिशु विभाग के डॉक्टरों और कर्मियों की ऐसी गलत गतिविधियों से सरकारी अस्पताल की बदनामी होती है और मरीजों का भरोसा टूटता है, जबकि एसएनसीयू में संबंधित डॉक्टर के निजी क्लिनिक से कहीं बेहतर व्यवस्था उपलब्ध है। सीएस ने जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. राकेश कुमार के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जांच में दोषी पाए जाने पर डॉक्टर के निलंबन के लिए विभाग को अनुशंसा भेजी जाएगी। डॉ. पंकज ने आरोपों को बताया गलत वहीं, इस पूरे मामले पर डॉ. पंकज कुमार ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि सदर अस्पताल में ड्यूटी के दौरान उनकी मुलाकात बच्चे के परिजनों से हुई ही नहीं थी, इसलिए बहलाकर क्लिनिक लाने का आरोप गलत है। डॉक्टर ने दावा किया कि परिजन तीन साल पहले भी अपने एक बच्चे का इलाज उनसे करा चुके थे, इसीलिए वे खुद इस नवजात को लेकर उनके पास आए थे। उनके पास सरकारी अस्पताल का कोई पर्चा या रिपोर्ट नहीं थी। जब बच्चे को भर्ती कराया गया, तब उसकी हालत बेहद गंभीर थी। बिलीरुबिन (पीलिया) का स्तर 32 पहुंच चुका था, ऐसी स्थिति में बच्चे को बचाना मुश्किल होता है।  

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