भास्कर न्यूज | गढ़वा जिले में गव्य विकास विभाग में पदाधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के कारण पशुपालकों एवं दुग्ध उत्पादकों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। विभाग में पर्याप्त कर्मियों के अभाव में करीब तीन करोड़ रुपए की योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है। यदि वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक निर्धारित राशि खर्च नहीं की गई, तो इसके लैप्स होने की आशंका है। इससे पशुपालकों को आर्थिक सहायता मिलने में देरी होने के साथ दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने की योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार, गढ़वा जिले के विभिन्न प्रखंडों में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की ओर से योजनाएं संचालित की जानी हैं। इसके तहत जिले के 14 लाभुकों के बीच करीब एक करोड़ 70 लाख रुपये मूल्य के पशुधन का वितरण किया जाना है। वहीं, दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न उपकरणों और अन्य आवश्यक सामग्रियों पर एक करोड़ 30 लाख रुपए से अधिक की राशि खर्च की जानी है। इस प्रकार दोनों मदों में करीब तीन करोड़ रुपए की योजनाओं का लाभ पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों तक पहुंचाना है। विभागीय प्रक्रिया पूरी करने में हो रही परेशानी: बताया जाता है कि इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों को विभागीय स्तर पर निर्धारित प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। लाभुकों के दस्तावेजों की जांच, पात्रता का सत्यापन तथा अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही योजनाओं का लाभ दिया जाता है। लेकिन विभाग में पदाधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के कारण इन प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करने में परेशानी हो रही है। इसका सीधा असर योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है। लक्ष्य पर काम किया जा रहा है : श्रीकांत ^स्टाफ की कमी है। फिर भी योजना को पूरा करने का लक्ष्य तक काम किया जाता है। उन्होंने कहा कि जल्द ही बची योजना को पूर्ण किया जाएगा। ^ श्रीकांत रामदास बारबुदे , गव्य विकास विभाग के पदाधिकारी। सरकार की इन योजनाओं का उद्देश्य पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना, दुग्ध उत्पादन बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। लेकिन समय पर योजनाओं का लाभ नहीं मिलने से संबंधित लाभुकों को इंतजार करना पड़ रहा है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले राशि खर्च नहीं हुई, तो आवंटित राशि लैप्स हो सकती है। ऐसे में विभाग के सामने निर्धारित समय सीमा के भीतर योजनाओं को पूरा करने की चुनौती है। कर्मचारियों की कमी दूर कर लाभ समय पर पहुंचाना जरूरी है। भास्कर न्यूज | गढ़वा जिले में गव्य विकास विभाग में पदाधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के कारण पशुपालकों एवं दुग्ध उत्पादकों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। विभाग में पर्याप्त कर्मियों के अभाव में करीब तीन करोड़ रुपए की योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है। यदि वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक निर्धारित राशि खर्च नहीं की गई, तो इसके लैप्स होने की आशंका है। इससे पशुपालकों को आर्थिक सहायता मिलने में देरी होने के साथ दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने की योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार, गढ़वा जिले के विभिन्न प्रखंडों में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की ओर से योजनाएं संचालित की जानी हैं। इसके तहत जिले के 14 लाभुकों के बीच करीब एक करोड़ 70 लाख रुपये मूल्य के पशुधन का वितरण किया जाना है। वहीं, दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न उपकरणों और अन्य आवश्यक सामग्रियों पर एक करोड़ 30 लाख रुपए से अधिक की राशि खर्च की जानी है। इस प्रकार दोनों मदों में करीब तीन करोड़ रुपए की योजनाओं का लाभ पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों तक पहुंचाना है। विभागीय प्रक्रिया पूरी करने में हो रही परेशानी: बताया जाता है कि इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों को विभागीय स्तर पर निर्धारित प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। लाभुकों के दस्तावेजों की जांच, पात्रता का सत्यापन तथा अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही योजनाओं का लाभ दिया जाता है। लेकिन विभाग में पदाधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के कारण इन प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करने में परेशानी हो रही है। इसका सीधा असर योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है। लक्ष्य पर काम किया जा रहा है : श्रीकांत ^स्टाफ की कमी है। फिर भी योजना को पूरा करने का लक्ष्य तक काम किया जाता है। उन्होंने कहा कि जल्द ही बची योजना को पूर्ण किया जाएगा। ^ श्रीकांत रामदास बारबुदे , गव्य विकास विभाग के पदाधिकारी। सरकार की इन योजनाओं का उद्देश्य पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना, दुग्ध उत्पादन बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। लेकिन समय पर योजनाओं का लाभ नहीं मिलने से संबंधित लाभुकों को इंतजार करना पड़ रहा है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले राशि खर्च नहीं हुई, तो आवंटित राशि लैप्स हो सकती है। ऐसे में विभाग के सामने निर्धारित समय सीमा के भीतर योजनाओं को पूरा करने की चुनौती है। कर्मचारियों की कमी दूर कर लाभ समय पर पहुंचाना जरूरी है।

