सुस्त वसूली:मिलावटखोरों पर ‌3.15 करोड़ का जुर्माना, सिर्फ 40% वसूली, अब कुर्की की तैयारी

सुस्त वसूली:मिलावटखोरों पर ‌3.15 करोड़ का जुर्माना, सिर्फ 40% वसूली, अब कुर्की की तैयारी

एक अप्रैल से लेकर 22 अक्टूबर तक मिलावटखोरी करने वालों पर जुर्माना तो लगा, लेकिन वसूली में प्रशासन सुस्त है। प्रदेश के 5 बड़े शहरों में भोपाल की स्थिति सबसे बेहतर है। यहां 6.5 लाख रुपए जुर्माना लगा, जिसमें 4 लाख से अधिक वसूले गए। लेकिन दूसरे जिलों की स्थिति काफी खराब है। जबलपुर सबसे पीछे है। यहां 82% जुर्माना अब तक नहीं वसूला जा सका है। प्रदेशभर में 1 अप्रैल से 22 अक्टूबर 2026 तक 3.15 करोड़ रुपए से ज्यादा जुर्माना लगा। इसमें 1.23 करोड़ वसूले गए, जबकि 1.92 करोड़ यानी 61% बकाया है। विभागीय आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया कि जबलपुर में 11.05 लाख में से 2.02 लाख, ग्वालियर में 66.84 लाख में से 21.83 लाख और इंदौर में 50.50 लाख में से 16.77 लाख रुपए वसूले गए। ग्वालियर-इंदौर में करीब 67% रकम बाकी है। उज्जैन में 16.56 लाख में से सिर्फ 8.55 लाख रुपए जमा हुए। एक अप्रैल से 22 अक्टूबर के बीच मिलावटखोरों पर कार्रवाई एडीएम कोर्ट से लगाया जाता है जुर्माना खाद्य सुरक्षा विभाग सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेजता है। मिलावट या नियमों का उल्लंघन मिलने पर मामला एडीएम कोर्ट पहुंचता है। वहां दोषी पाए जाने पर जुर्माना लगाया जाता है। फिर राजस्व वसूली करता है। नोटिस दिए हैं, फिर आरसी जारी करेंगे जुर्माना जमा नहीं करने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन की मदद से आरआरसी की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद भी रकम जमा नहीं हुई तो प्रॉपर्टी कुर्क कर बकाया राशि वसूली जाएगी।
-डीके वर्मा, वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी मुरैना से आया 7 क्विंटल संदिग्ध पनीर, कारोबारी मुकरा तो जब्त किया दिवाली पर मुरैना से ट्रेन से भोपाल पहुंचा 7 क्विंटल संदिग्ध पनीर खाद्य सुरक्षा विभाग ने जब्त किया। टीम रात 9 बजे स्टेशन पहुंची, लेकिन जब्ती रात 2 बजे हुई। पनीर मुरैना के केशवदत्त शर्मा के नाम से भोपाल के शमशाद को भेजा गया था। कोलियाखेड़ी के माखन डेयरी संचालक शमशाद ने माल लेने से इनकार कर दिया। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी शिवराज पावक ने रेलवे से बिल्टी रद्द कर पनीर सौंपने को कहा, लेकिन अधिकारियों ने मना कर दिया। वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद जब्ती हुई। एनालॉग पनीर के संदेह में सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। पावक के मुताबिक, एनालॉग पनीर वनस्पति वसा से बनता है। गलत सामग्री या लेबलिंग नियमों का उल्लंघन है। मप्र में इस पर रोक है।

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