प्रिय पाठक, दीपावली अपनों के साथ खुशियां बांटने का त्योहार है। घरों को रोशन करने का, दिलों के करीब आने का। लेकिन हमारे आसपास कुछ घर ऐसे भी हैं, जहां त्योहार की खुशियां जुटाना आसान नहीं होता। दैनिक भास्कर की पहल ‘सार्थक दीपावली’ हमें हर साल याद दिलाती है कि रोशनी सिर्फ दीयों से नहीं होती। कभी किसी की छोटी सी मदद भी किसी के जीवन में उजाला कर जाती है। इसी भावना से हम हर साल जरूरतमंद लोगों को उपहार देते हैं। लेकिन अक्सर ये उपहार दीपावली के दिन या उसके बाद पहुंचते हैं, जब त्योहार की तैयारियां पूरी हो चुकी होती हैं या जश्न बीत चुका होता है। लेकिन किसी जरूरतमंद के लिए दीपावली से पहले मिला उपहार बहुत मायने रखता है। वह इसका इस्तेमाल त्योहार की तैयारियों में कर सकता है और अपनी दीपावली की खुशियों में इसे शामिल कर सकता है। इसी संदेश को आप तक पहुंचाने के लिए हमने एक छोटी-सी फिल्म बनाई है। उम्मीद है, यह फिल्म आपको उपहार देने के अपने तरीके पर फिर से सोचने और इस बार किसी की दीपावली थोड़ी और खूबसूरत बनाने के लिए प्रेरित करेगी। एक छोटी-सी गुजारिश और है। इस फिल्म को अपने परिवार, दोस्तों और करीबियों तक भी पहुंचाएं। क्या पता, आपकी ओर से भेजा गया यह संदेश किसी और के मन में भी मदद का एक छोटा-सा दीया जला दे। फिर वह रोशनी आगे बढ़ती रहे। किसी के चेहरे पर मुस्कान बनकर, किसी के मन में उम्मीद बनकर। इस बार खुशियां बांटें जरूर, बस थोड़ी पहले। क्योंकि कुछ रोशनियां दीयों से होती हैं, और कुछ किसी के लिए किए गए छोटे से काम से। सादर भास्कर परिवार
दैनिक भास्कर की पहल, एक सार्थक दीपावली:इस बार खुशियां थोड़ी जल्दी लाएं, किसी की दिवाली को सार्थक बनाएं

