दिल्ली की एक अदालत ने अपने पति की हत्या की साजिश रचने की आरोपी एक महिला को नियमित जमानत दे दी है। अदालत ने यह देखते हुए यह फैसला लिया कि महिला चार साल से अधिक समय से हिरासत में है, जांच पूरी हो चुकी है, और मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष के मुख्य गवाहों से पूछताछ भी हो चुकी है। रोहिणी कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मुनीश गर्ग ने बेगमपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज हत्या की साजिश के मामले में महिला की तीसरी जमानत याचिका को मंजूर कर लिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला 21 फरवरी 2022 का है, जब पुलिस को सूचना मिली कि रोहिणी के सेक्टर 24 के पास एक व्यक्ति घायल अवस्था में मिला है। पीड़ित को डॉ. बीएसए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि यह हत्या एक पहले से रची गई साजिश का नतीजा थी, जिसमें महिला और अन्य आरोपी शामिल थे। यह भी आरोप लगाया गया है कि मृतक की पत्नी, जो एक अन्य आरोपी के संपर्क में थी, ने घटना से कुछ समय पहले ही उसे अपने पति की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी थी। महिला के खिलाफ अभियोजन पक्ष का मामला सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, वित्तीय लेन-देन और गवाहों के बयानों पर आधारित है। महिला की ओर से पेश वकील रवि ड्राल ने जमानत की मांग करते हुए दलील दी कि वह अपराध स्थल पर मौजूद नहीं थी और उसके पास से कोई हथियार या अपराध से जुड़ी कोई अन्य वस्तु बरामद नहीं हुई है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि साजिश के आरोपों को मुख्य रूप से परिस्थितियों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर साबित करने की कोशिश की गई है।
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जमानत याचिका का विरोध करते हुए, राज्य पक्ष ने तर्क दिया कि आरोप गंभीर हैं और महिला ने इस कथित साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई थी। अभियोजन पक्ष ने यह आशंका भी जताई कि महिला की रिहाई से मुकदमे की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है, क्योंकि अभियोजन पक्ष के 40 गवाहों में से अब तक केवल 16 से ही पूछताछ की गई है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद, अदालत ने गौर किया कि महिला पर खुद हमला करने का आरोप नहीं है और अपराध में इस्तेमाल किया गया कोई भी हथियार उसके पास से बरामद नहीं हुआ है। अदालत ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि वह 22 फरवरी, 2022 से हिरासत में है, जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। फिलहाल यह मामला अभियोजन पक्ष के साक्ष्य पेश किए जाने के चरण में है। महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने गौर किया कि मृतक के पिता और बेटी, जिनके बयानों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने घटना से पहले की परिस्थितियों को साबित करने की कोशिश की थी, उनसे मुकदमे के दौरान पहले ही पूछताछ की जा चुकी है। जमानत की कार्यवाही के दौरान, बचाव पक्ष ने यह भी आश्वासन दिया कि रिहा होने के बाद महिला दिल्ली के रिठाला स्थित पाल कॉलोनी में अपने ससुराल नहीं जाएगी। उसने यह भी भरोसा दिलाया कि मुकदमे के दौरान वह उक्त संपत्ति, या अपने दिवंगत पति की किसी भी संपत्ति (चाहे वह उनकी अपनी हो या विरासत में मिली हो) को लेकर कोई दीवानी (सिविल) कार्यवाही शुरू नहीं करेगी। हिरासत की अवधि और मुकदमे के मौजूदा चरण को देखते हुए, अदालत ने माना कि उसे और अधिक समय तक हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है और उसे नियमित जमानत दे दी।
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अदालत ने उसे एक निजी मुचलका और उतनी ही राशि की एक ज़मानत देने पर रिहा करने का निर्देश दिया, जो आदेश में बताई गई शर्तों के अधीन होगा। महिला के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर चल रहे मुकदमे में फैसला होना अभी बाकी है।

