उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के कैडर की समीक्षा करने के उसके निर्देश का उल्लंघन किया है। उसने कैडर समीक्षा समिति से 30 नवंबर तक मंजूरी के लिए अपना प्रस्ताव जमा करने को कहा। न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने केंद्र को पांचों सीएपीएफ-सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी)-में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से जुड़ा डेटा उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया।
उसने कहा कि यह डेटा वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (एसएजी) स्तर तक की प्रतिनियुक्ति का होना चाहिए, जो पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) रैंक के अधिकारी के समकक्ष होता है। पीठ ने कहा, “शुरुआत में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि सीएपीएफ की ओर से कैडर समीक्षा प्रस्ताव पेश किए गए हैं और कैडर समीक्षा समिति इनकी जांच कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि 30 नवंबर तक कैडर समीक्षा समिति मंजूरी के लिए एक प्रस्ताव पेश कर देगी।”
उसने भाटी को निर्देश दिया कि वह सुनवाई की अगली तारीख तक एक हलफनामा दाखिल करें, जिसमें 23 मई 2025 की स्थिति के अनुसार प्रत्येक सीएपीएफ में एसएजी स्तर तक की प्रतिनियुक्ति का ब्योरा शामिल हो।
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए नौ दिसंबर की तारीख तय की। उसने कहा कि मंजूरी के लिए कैडर समीक्षा समिति (सीआरसी) की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव के बारे में विवरण देते हुए भी एक हलफनामा दाखिल किया जाए। सीएपीएफ अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि केंद्र ने सभी सीएपीएफ में कैडर की समीक्षा करने के निर्देश का पालन नहीं किया है।
यह समीक्षा 2021 से ही लंबित थी और 23 मई 2025 के आदेश के अनुसार इसे छह महीने के भीतर पूरा किया जाना था। शीर्ष अदालत नये सीएपीएफ अधिनियम को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इनमें सीएपीएफ अधिकारियों की ओर से दायर की गई अवमानना याचिका भी शामिल है, जो न्यायालय के मई 2025 के निर्देश का पालन न किए जाने से जुड़ी हुई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गुरु कृष्णकुमार ने दलील दी कि 23 मई 2025 को अदालत ने आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया था, लेकिन सरकार ने इसे घटाने के बजाय बढ़ा दिया है। वहीं, भाटी ने कहा कि अधिनियम के तहत बने नियमों में आईपीएस अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर भेजने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि पांच सीएपीएफ में ग्रुप ‘ए’ के कुल 13,491 पद में से आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के लिए केवल 213 पद स्वीकृत हैं और फिलहाल इनमें से 129 पदों पर ही ऐसे अधिकारी तैनात हैं।
पीठ ने 2025 के फैसले में दिए गए निर्देशों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार से आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को शून्य करने के लिए नहीं कहा गया है, बल्कि इसमें धीरे-धीरे कमी लाने का निर्देश दिया गया है। उसने कहा, “फिलहाल हमारे पास इस बात का कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं है कि फैसले की तारीख को प्रतिनियुक्ति का प्रतिशत क्या था। हमारे पास आज की तारीख में प्रतिनियुक्ति की पूरी जानकारी मौजूद है।”
न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, “हम देखना चाहते हैं कि फैसले का पालन पूरी तरह से (अक्षरशः और भावना के अनुरूप) किया गया है या सिर्फ कागजों पर; इसके लिए हमें 23 मई 2025 को आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से जुड़े आंकड़े के बारे में जानना होगा।”

