महाराष्ट्र के ठाणे जिले से मुंबई स्थित राज्य सचिवालय की ओर विभिन्न मांगों को लेकर पदयात्रा कर रहे हजारों आदिवासियों ने अधिकारियों को उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कार्रवाई में तेजी लाने का मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा निर्देश दिए जाने के बाद अपना आंदोलन वापस ले लिया। श्रमजीवी संगठन के संस्थापक विवेक पंडित के नेतृत्व में ‘संविधान हक संघर्ष मोर्चा’ के तहत मंगलवार दोपहर ठाणे के भिवंडी से करीब 49,000 लोग मुंबई के लिए रवाना हुए थे। प्रदर्शनकारी ठाणे, पालघर, रायगढ़ और नासिक से आए थे।
संगठन के नेताओं ने मांग की कि सभी आदिवासी विद्यार्थियों को 18 वर्ष की आयु तक मुफ्त, गुणवत्तापूर्ण और कौशल आधारित शिक्षा दी जाए। इसके साथ ही प्रत्येक तालुका में विशेष शैक्षणिक परिसर स्थापित किए जाएं। अन्य मांगों में वन अधिकार अधिनियम के तहत दावों का तत्काल निपटारा और उन्हें मंजूरी देना तथा सभी आदिवासी बस्तियों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना शामिल हैं।
आदिवासी समुदायों के अधिकारों के लिए काम करने वाले श्रमजीवी संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री फडणवीस से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे आदिवासी समुदायों की शिक्षा, वन अधिकार, पुनर्वास, जलापूर्ति और आधार पंजीकरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करें और कार्रवाई में तेजी लाएं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं ठाणे के प्रभारी मंत्री एकनाथ शिंदे देर रात ठाणे पहुंचे।
उन्होंने खारीगांव टोल प्लाजा पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया और उन्हें उनकी मांगों के समाधान के लिए जारी किए गए कई शासकीय आदेशों (जीआर) की जानकारी दी। शिंदे ने कहा कि उन्होंने एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में शासकीय आदेश जारी होते पहले कभी नहीं देखे। उन्होंने इसे प्रदर्शनकारियों और उनके नेतृत्व की जीत बताया।
उन्होंने इन आदेशों की प्रतियां पंडित को सौंपीं, जिसके बाद आदिवासियों ने मार्च रोक दिया। इससे पहले, मंगलवार को हुई बैठक के दौरान फडणवीस ने कहा था कि श्रमजीवी संगठन और समर्थन संगठन को ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिपत्र को तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे आदिवासी विद्यार्थियों को मुफ्त ट्यूशन और पर्याप्त छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने, आश्रम या आवासीय विद्यालयों में खाली पद भरने तथा जिला परिषद के विद्यालयों में कक्षाओं, लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालयों और खेल सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाएं।
वन अधिकार अधिनियम के तहत पात्र दावों के निपटारे के लिए 15 दिसंबर तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। फडणवीस ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे यह सुनिश्चित करें कि ग्राम स्तरीय समितियों से मंजूरी प्राप्त सभी पात्र व्यक्तिगत और सामुदायिक दावों का निपटारा किया जाए और कोई भी दावा लंबित न रहे।

