भागलपुर में घोघा के पन्नुचक निवासी मंगल ऋषि के परिवार को अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां नहीं मिली थी। जिसके बाद शव को दफनाना पड़ा था। ये खबर भास्कर में आई। जिसके बाद सोमवार को कहलगांव के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) राकेश रंजन और प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) राजीव रंजन अधिकारियों की टीम के साथ पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। पति को खोने के बाद सोनी देवी के सामने पांच बच्चों की परवरिश और परिवार चलाने की चुनौती है। गरीबी पहले भी थी, लेकिन मंगल ऋषि के रहते परिवार को किसी तरह सहारा मिला हुआ था। अब वही सहारा छिन गया है। सोनी देवी ने प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखते हुए वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, राशन की सुविधा और जमीन से जुड़े मामले में मदद की गुहार लगाई है। एसडीओ ने परिवार की जरूरतों को समझते हुए राशन कार्ड, विधवा पेंशन, सिलाई मशीन और जमीन जैसी मदद का भरोसा दिया। नवजात बच्ची को मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना का लाभ दिलाने और बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की पहल की गई है। मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र भी बनवाया जाएगा, ताकि आगे पेंशन जैसी सहायता मिल सके। कागजी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही प्रशासन के मुताबिक, परिवार का राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, मजदूर कार्ड और मनरेगा जॉब कार्ड पहले से बना हुआ है। हालांकि, छोटे बच्चों के नाम राशन कार्ड में नहीं जुड़े हैं। अब उन्हें जोड़ने की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। पात्रता और जरूरी दस्तावेजों के आधार पर विधवा पेंशन, लक्ष्मीबाई पेंशन और कबीर अंत्येष्टि योजना का लाभ दिलाने के लिए पंचायत सचिव के माध्यम से कागजी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
सिलाई मशीन से संवारने की कोशिश होगी परिवार की जिंदगी मंगल ऋषि ईंट-भट्ठे पर मजदूरी कर परिवार का पेट पालते थे। उनकी कमाई से ही घर का चूल्हा जलता था और बच्चों की जरूरतें पूरी होती थीं। उनकी मौत ने परिवार की आर्थिक रीढ़ तोड़ दी। अब परिवार को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी पहल की जा रही है। एसडीओ ने बताया कि परिवार की महिलाएं सिलाई का काम सीखकर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हैं। इसके लिए जिला प्रशासन के आरसेटी के माध्यम से निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण और सिलाई मशीन उपलब्ध कराने की पहल की जाएगी। इसके अलावा परिवार को असंगठित कामगारों से जुड़ी योजनाओं और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से जोड़ने की संभावना भी तलाशी जाएगी। जमीन के विवाद की जांच परिवार के सामने सबसे बड़ी समस्याओं में से एक जमीन और रहने की जगह का संकट भी है। जमीन से जुड़ा मामला सिविल न्यायालय में लंबित बताया गया है। एसडीओ ने स्पष्ट किया कि पहले पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट ली जाएगी। यदि जांच में परिवार वास्तव में भूमिहीन पाया जाता है, तो अभियान बसेरा के तहत जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की जाएगी। यह मामला केवल एक परिवार तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी कॉलोनी से जुड़ा बताया जा रहा है। इसलिए जांच और रिपोर्ट के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं थे, अधजला शव दफनाया:भागलपुर में मजदूर की मौत के बाद चंदा भी नहीं जुटा पाया परिवार, पांच बच्चों का था पिता
मंगल ऋषि नाम के इस व्यक्ति की 18 अक्टूबर को मौत हो गई थी। वह ईंट-भट्ठे पर मजदूरी कर पांच बच्चों का पेट पालते थे। मंगल ऋषि के जाने के बाद परिवार के पास कफन और लकड़ियों का इंतजाम करने के पैसे नहीं थे। लोगों से चंदा मांगने पर भी पर्याप्त लकड़ियां नहीं जुट पाईं। इसके बाद परिजनों ने शव को गड्ढा खोदकर दफना दिया। यह मामला घोघा थाना क्षेत्र का है। मीडिया में खबर आने के बाद लोगों ने मदद की। संचिता बसु के परिवार और प्राची सेवा ट्रस्ट ने परिवार को 11 हजार रुपये और राशन दिया। पढ़ें पूरी खबर… भागलपुर में घोघा के पन्नुचक निवासी मंगल ऋषि के परिवार को अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां नहीं मिली थी। जिसके बाद शव को दफनाना पड़ा था। ये खबर भास्कर में आई। जिसके बाद सोमवार को कहलगांव के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) राकेश रंजन और प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) राजीव रंजन अधिकारियों की टीम के साथ पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। पति को खोने के बाद सोनी देवी के सामने पांच बच्चों की परवरिश और परिवार चलाने की चुनौती है। गरीबी पहले भी थी, लेकिन मंगल ऋषि के रहते परिवार को किसी तरह सहारा मिला हुआ था। अब वही सहारा छिन गया है। सोनी देवी ने प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखते हुए वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, राशन की सुविधा और जमीन से जुड़े मामले में मदद की गुहार लगाई है। एसडीओ ने परिवार की जरूरतों को समझते हुए राशन कार्ड, विधवा पेंशन, सिलाई मशीन और जमीन जैसी मदद का भरोसा दिया। नवजात बच्ची को मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना का लाभ दिलाने और बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की पहल की गई है। मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र भी बनवाया जाएगा, ताकि आगे पेंशन जैसी सहायता मिल सके। कागजी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही प्रशासन के मुताबिक, परिवार का राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, मजदूर कार्ड और मनरेगा जॉब कार्ड पहले से बना हुआ है। हालांकि, छोटे बच्चों के नाम राशन कार्ड में नहीं जुड़े हैं। अब उन्हें जोड़ने की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। पात्रता और जरूरी दस्तावेजों के आधार पर विधवा पेंशन, लक्ष्मीबाई पेंशन और कबीर अंत्येष्टि योजना का लाभ दिलाने के लिए पंचायत सचिव के माध्यम से कागजी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
सिलाई मशीन से संवारने की कोशिश होगी परिवार की जिंदगी मंगल ऋषि ईंट-भट्ठे पर मजदूरी कर परिवार का पेट पालते थे। उनकी कमाई से ही घर का चूल्हा जलता था और बच्चों की जरूरतें पूरी होती थीं। उनकी मौत ने परिवार की आर्थिक रीढ़ तोड़ दी। अब परिवार को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी पहल की जा रही है। एसडीओ ने बताया कि परिवार की महिलाएं सिलाई का काम सीखकर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हैं। इसके लिए जिला प्रशासन के आरसेटी के माध्यम से निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण और सिलाई मशीन उपलब्ध कराने की पहल की जाएगी। इसके अलावा परिवार को असंगठित कामगारों से जुड़ी योजनाओं और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से जोड़ने की संभावना भी तलाशी जाएगी। जमीन के विवाद की जांच परिवार के सामने सबसे बड़ी समस्याओं में से एक जमीन और रहने की जगह का संकट भी है। जमीन से जुड़ा मामला सिविल न्यायालय में लंबित बताया गया है। एसडीओ ने स्पष्ट किया कि पहले पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट ली जाएगी। यदि जांच में परिवार वास्तव में भूमिहीन पाया जाता है, तो अभियान बसेरा के तहत जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की जाएगी। यह मामला केवल एक परिवार तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी कॉलोनी से जुड़ा बताया जा रहा है। इसलिए जांच और रिपोर्ट के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं थे, अधजला शव दफनाया:भागलपुर में मजदूर की मौत के बाद चंदा भी नहीं जुटा पाया परिवार, पांच बच्चों का था पिता
मंगल ऋषि नाम के इस व्यक्ति की 18 अक्टूबर को मौत हो गई थी। वह ईंट-भट्ठे पर मजदूरी कर पांच बच्चों का पेट पालते थे। मंगल ऋषि के जाने के बाद परिवार के पास कफन और लकड़ियों का इंतजाम करने के पैसे नहीं थे। लोगों से चंदा मांगने पर भी पर्याप्त लकड़ियां नहीं जुट पाईं। इसके बाद परिजनों ने शव को गड्ढा खोदकर दफना दिया। यह मामला घोघा थाना क्षेत्र का है। मीडिया में खबर आने के बाद लोगों ने मदद की। संचिता बसु के परिवार और प्राची सेवा ट्रस्ट ने परिवार को 11 हजार रुपये और राशन दिया। पढ़ें पूरी खबर…

