ब्राजील में लूला ने रचा इतिहास, पहले दौर में पिछड़ने के बाद हासिल की जीत, पीएम मोदी ने दी बधाई, कैसा रहा है राजनीतिक सफर?

ब्राजील में लूला ने रचा इतिहास, पहले दौर में पिछड़ने के बाद हासिल की जीत, पीएम मोदी ने दी बधाई, कैसा रहा है राजनीतिक सफर?

Lula da Silva Brazil Presidential Election: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्राजील राष्ट्रपति चुनाव में शानदार जीत हासिल करने पर लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा को बधाई दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके लिखा कि मेरे प्रिय मित्र, राष्ट्रपति लूला को शानदार पुनर्निर्वाचन पर हार्दिक बधाई। मैं भारत-ब्राजील की बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा तथा व्यापक बनाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने को तत्पर हूं।

उन्होंने एक्स पर आगे लिखा कि हम साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों में अपने सहयोग को मजबूत करना जारी रखेंगे, ‘ग्लोबल साउथ’ की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाएंगे, और एक अधिक समावेशी, न्यायसंगत तथा टिकाऊ दुनिया के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।

फरवरी 2026 में भारत दौरे पर आए थे लूला डी सिल्वा

गौरतलब बात यह है कि ब्राजील के राष्ट्रपति लूला फरवरी 2026 में भारत आए थे, जहां हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता हुई थी। दोनों नेताओं ने तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, कृषि और ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों को लेकर आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था।

लूला ने चौथी बार चुनावी जीत दर्ज की

बता दें कि रविवार को ब्राजील में दूसरे दौर की वोटिंग हुई। इसके बाद परिणामों का ऐलान किया गया। 80 साल के लूला दा सिल्वा ने चौथी बार जीत हासिल की। वे पहले दौर की वोटिंग में फ्लावियो बोल्सोनारो से पिछड़ गए थे, लेकिन दूसरे और अंतिम दौर में बाजी पलट गई।

लूला ने 51.78 प्रतिशत वोटों के साथ चुनावी जीत दर्ज की

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 99.89 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने पर, लूला को कुल वैध वोटों का 51.78 प्रतिशत हिस्सा मिला। वहीं, लिबरल पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे, फ्लेवियो बोल्सोनारो को 48.23 प्रतिशत वोट मिले। पहले दौर में लूला पिछड़ गए थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी की। लूला 5 जनवरी 2027 को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। यह चौथी बार होगा जब वे ब्राजील के राष्ट्रपति बनेंगे।

लूला डी सिल्वा ने रच दिया इतिहास

1989 में ब्राजील में सीधे राष्ट्रपति चुनाव शुरू हुए थे। उसके बाद यह पहली बार हुआ, जब पहले दौर में दूसरे पायदान पर रहने वाला उम्मीदवार आखिरी दौर में जीत गया। बोल्सोनारो परिवार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का करीबी माना जाता है। उन्हें पहले चरण में 47 फीसदी वोट मिले थे। वहीं लूला को 45.16 फीसदी वोट मिले थे। लूला ने 2022 के चुनाव में फ्लावियो के पिता और ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो को भी हराया था। उस चुनाव में लूला को दूसरे चरण में 50.90 फीसदी वोट मिले थे, जबकि जायर बोल्सोनारो को 49.10 फीसदी वोट मिले थे।

कैसे शुरू हुआ लूला डी सिल्वा का राजनीतिक सफर

27 अक्टूबर 1945 को ब्राजील के पेर्नाम्बुको में जन्मे लूला ने बचपन में मूंगफली बेची और मजदूरी की। वे मेटलवर्कर बने और इसी दौरान राजनीतिक बैठकों व यूनियन बैठकों में जाने लगे। साल 1969 में वे यूनियन नेतृत्व से जुड़े और बातचीत में माहिर होने के कारण 1975 में, 30 साल की उम्र से पहले ही, यूनियन के अध्यक्ष चुने गए। उन्हें करीब एक लाख मजदूरों का समर्थन मिला। साल 1978 से 1980 के बीच सैन्य तानाशाही के खिलाफ मोर्चा खोला। कई बार जेल भी गए। फरवरी 1980 में उन्होंने यूनियन नेताओं, बुद्धिजीवियों और चर्च से जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर वर्कर्स पार्टी (PT) की स्थापना की। कुछ ही महीनों बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और करीब एक महीना जेल में रहना पड़ा। 1982 में वे साओ पाउलो के गवर्नर का चुनाव हार गए, लेकिन पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा। 1986 में वे सबसे ज्यादा वोटों से संसद के लिए चुने गए। यहीं से उनका राष्ट्रीय राजनीतिक सफर शुरू हुआ, जो आगे चलकर राष्ट्रपति पद तक पहुंचा।

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