सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और आर्थिक परेशानी के कारण इलाज में होने वाली देरी को रोकने के लिए सरकार की ओर से पीएम राहत योजना संचालित की जा रही है। बांका में इस योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। दुर्घटना की तारीख से सात दिनों तक निर्धारित सीमा के भीतर इलाज का खर्च योजना के तहत वहन किया जाता है। इससे हादसे में घायल लोगों और उनके परिजनों को तत्काल इलाज के लिए पैसों की व्यवस्था करने की चिंता से राहत मिल सकती है। नियमों के अनुसार कैशलेस इलाज की सुविधा जिला परिवहन पदाधिकारी अन्नू कुमारी ने बताया कि सड़क दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। कई बार आर्थिक तंगी के कारण परिजन घायल का इलाज शुरू कराने में देरी कर देते हैं। ऐसे में सरकार की इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र दुर्घटना पीड़ितों को आर्थिक कठिनाई के कारण उपचार के लिए इंतजार नहीं करना पड़े। उन्होंने कहा कि योजना के तहत निर्धारित पात्रता, प्रक्रिया और नियमों के अनुसार कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। 112 नंबर पर किया जा सकता संपर्क जिला परिवहन पदाधिकारी ने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल में इलाज के दौरान कैशलेस सुविधा मिलने में परेशानी हो रही है या योजना से संबंधित कोई समस्या सामने आती है, तो टोल फ्री नंबर 14555 पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पीड़ितों और उनके परिजनों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना तथा इलाज से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना है। वहीं, सड़क दुर्घटना की सूचना देने और आपातकालीन सहायता प्राप्त करने के लिए 112 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। सड़क दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति की मदद करना मानवीय जिम्मेदारी के साथ किसी की जान बचाने का महत्वपूर्ण अवसर भी है। जल्द अस्पताल पहुंचाने में आम लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण सरकार की ओर से दुर्घटना में घायल व्यक्ति की सहायता करने वाले नेक व्यक्ति यानी गुड समैरिटन को प्रोत्साहित करने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य लोगों को दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने को प्रेरित करना है। अक्सर सड़क हादसों के बाद लोग पुलिस की पूछताछ या कानूनी औपचारिकताओं के डर से घायलों की मदद करने से पीछे हट जाते हैं। जबकि दुर्घटना के बाद घायल को जल्द अस्पताल पहुंचाने में आम लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में नेक व्यक्ति को प्रोत्साहित करने की व्यवस्था से लोगों का भरोसा बढ़ाने और घायलों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। दुर्घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस या आपातकालीन सेवा को सूचित करना और सुरक्षित तरीके से घायल की सहायता करना जरूरी है। गोल्डन आवर में इलाज मिलने से बच सकती है जान सड़क दुर्घटना के बाद शुरुआती एक घंटे को गोल्डन आवर कहा जाता है। यह समय घायल व्यक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। गंभीर चोट लगने, अत्यधिक रक्तस्राव होने या अन्य जानलेवा स्थिति में शुरुआती समय के भीतर चिकित्सा सहायता मिलने से जान बचने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए दुर्घटना की सूचना मिलते ही आपातकालीन सेवा को जानकारी देने और घायल को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने में सहयोग करना चाहिए। जिला परिवहन पदाधिकारी अन्नू कुमारी ने आम लोगों से अपील की कि सड़क दुर्घटना के समय घायलों की मदद करने से पीछे नहीं हटें। उन्होंने कहा कि सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से पात्र दुर्घटना पीड़ितों को इलाज के खर्च में राहत मिल सकती है। लोगों को योजना के प्रति जागरूक होने के साथ-साथ दुर्घटना के समय मानवीय संवेदनशीलता दिखानी चाहिए, ताकि जरूरतमंदों को समय पर उपचार मिल सके और आर्थिक परेशानी के कारण किसी की जान जोखिम में न पड़े। सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और आर्थिक परेशानी के कारण इलाज में होने वाली देरी को रोकने के लिए सरकार की ओर से पीएम राहत योजना संचालित की जा रही है। बांका में इस योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। दुर्घटना की तारीख से सात दिनों तक निर्धारित सीमा के भीतर इलाज का खर्च योजना के तहत वहन किया जाता है। इससे हादसे में घायल लोगों और उनके परिजनों को तत्काल इलाज के लिए पैसों की व्यवस्था करने की चिंता से राहत मिल सकती है। नियमों के अनुसार कैशलेस इलाज की सुविधा जिला परिवहन पदाधिकारी अन्नू कुमारी ने बताया कि सड़क दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। कई बार आर्थिक तंगी के कारण परिजन घायल का इलाज शुरू कराने में देरी कर देते हैं। ऐसे में सरकार की इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र दुर्घटना पीड़ितों को आर्थिक कठिनाई के कारण उपचार के लिए इंतजार नहीं करना पड़े। उन्होंने कहा कि योजना के तहत निर्धारित पात्रता, प्रक्रिया और नियमों के अनुसार कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। 112 नंबर पर किया जा सकता संपर्क जिला परिवहन पदाधिकारी ने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल में इलाज के दौरान कैशलेस सुविधा मिलने में परेशानी हो रही है या योजना से संबंधित कोई समस्या सामने आती है, तो टोल फ्री नंबर 14555 पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पीड़ितों और उनके परिजनों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना तथा इलाज से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना है। वहीं, सड़क दुर्घटना की सूचना देने और आपातकालीन सहायता प्राप्त करने के लिए 112 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। सड़क दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति की मदद करना मानवीय जिम्मेदारी के साथ किसी की जान बचाने का महत्वपूर्ण अवसर भी है। जल्द अस्पताल पहुंचाने में आम लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण सरकार की ओर से दुर्घटना में घायल व्यक्ति की सहायता करने वाले नेक व्यक्ति यानी गुड समैरिटन को प्रोत्साहित करने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य लोगों को दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने को प्रेरित करना है। अक्सर सड़क हादसों के बाद लोग पुलिस की पूछताछ या कानूनी औपचारिकताओं के डर से घायलों की मदद करने से पीछे हट जाते हैं। जबकि दुर्घटना के बाद घायल को जल्द अस्पताल पहुंचाने में आम लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में नेक व्यक्ति को प्रोत्साहित करने की व्यवस्था से लोगों का भरोसा बढ़ाने और घायलों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। दुर्घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस या आपातकालीन सेवा को सूचित करना और सुरक्षित तरीके से घायल की सहायता करना जरूरी है। गोल्डन आवर में इलाज मिलने से बच सकती है जान सड़क दुर्घटना के बाद शुरुआती एक घंटे को गोल्डन आवर कहा जाता है। यह समय घायल व्यक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। गंभीर चोट लगने, अत्यधिक रक्तस्राव होने या अन्य जानलेवा स्थिति में शुरुआती समय के भीतर चिकित्सा सहायता मिलने से जान बचने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए दुर्घटना की सूचना मिलते ही आपातकालीन सेवा को जानकारी देने और घायल को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने में सहयोग करना चाहिए। जिला परिवहन पदाधिकारी अन्नू कुमारी ने आम लोगों से अपील की कि सड़क दुर्घटना के समय घायलों की मदद करने से पीछे नहीं हटें। उन्होंने कहा कि सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से पात्र दुर्घटना पीड़ितों को इलाज के खर्च में राहत मिल सकती है। लोगों को योजना के प्रति जागरूक होने के साथ-साथ दुर्घटना के समय मानवीय संवेदनशीलता दिखानी चाहिए, ताकि जरूरतमंदों को समय पर उपचार मिल सके और आर्थिक परेशानी के कारण किसी की जान जोखिम में न पड़े।

