लखनऊ में रविवार को दीवानी न्यायालय कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर रविवार को लखनऊ के इको गार्डन में प्रदेशभर के जनपद न्यायालय कर्मचारियों ने लंबित मांगों को लेकर सत्याग्रह किया। विभिन्न जिलों से पहुंचे हजारों कर्मचारियों ने वेतनमान में सुधार, पदोन्नति, सेवा नियमितीकरण और सेवा शर्तों में बदलाव की मांग उठाई। प्रदेश महासचिव नरेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि कर्मचारियों की कई मांगें वर्षों से लंबित हैं। इनमें FTC कर्मचारियों की वार्षिक 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि, सेवा नियमितीकरण, कनिष्ठ सहायक से वरिष्ठ सहायक पद पर पदोन्नति के लिए अर्हकारी सेवा में छूट, पेड अप्रेंटिस पदों का कनिष्ठ सहायक पदों में समायोजन और न्यायालयों में बयान लेखक के पदों का सृजन शामिल हैं। इसके अलावा प्रशासनिक अधिकारियों के पदों को राजपत्रित दर्जा देने, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के समाप्त पदों को बहाल करने, अतिरिक्त कार्यभार के अनुरूप पद सृजन और मकान किराया भत्ते के पुनरीक्षण की मांग भी उठाई गई। प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक सिंह ने कहा कि न्यायालयों के लिपिकीय संवर्ग में भर्ती के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक और शुरुआती वेतनमान 4200 ग्रेड पे (पे लेवल-6) निर्धारित करने की मांग की गई है। कर्मचारियों ने दिल्ली के जिला न्यायालयों के समान वेतनमान और सुविधाएं देने की भी मांग रखी। प्रांतीय कोषाध्यक्ष नीरज श्रीवास्तव ने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सत्याग्रह के अंत में प्रस्ताव पारित किया गया कि मांगों पर विचार के लिए उच्च न्यायालय को प्रस्ताव भेजा जाए। साथ ही, दिसंबर के पहले सप्ताह से असहयोग आंदोलन और सामूहिक अवकाश शुरू करने की तैयारी की जाएगी। इसके लिए संघर्ष समिति गठित की जाएगी। मांगें पूरी नहीं होने पर जनवरी 2027 में संपूर्ण कार्य बहिष्कार पर निर्णय लेने की बात कही गई। कार्यक्रम में विभिन्न जनपदों से आए प्रतिनिधियों ने विचार रखे। आयोजकों ने शासन से लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपेक्षा जताई।

