लद्दाख के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने रविवार को लद्दाख को ‘‘भारत का पहला 100 प्रतिशत जैविक केंद्र शासित प्रदेश’’ घोषित किया। प्रशासन ने कुछ महीने पहले ही कृषि कार्यों में रासायनिक और कृत्रिम उर्वरकों की बिक्री, वितरण और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। उपराज्यपाल ने कहा, ‘‘यह लद्दाख और पूरे देश के लिए बहुत गर्व का क्षण है।
हमारे किसानों ने साबित कर दिया है कि सबसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार खेती की जा सकती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पूरी तरह से जैविक केंद्र शासित प्रदेश बनना केवल एक उपलब्धि नहीं है; बल्कि यह हमारे नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करने, पारंपरिक खेती के तरीकों को सहेजने और हमारे किसानों की आजीविका बेहतर बनाने की प्रतिबद्धता भी है।’’
उपराज्यपाल ने जुलाई में एक बड़े नीतिगत कदम के तहत पूरे लद्दाख में कृषि कार्यों के लिए रासायनिक और कृत्रिम उर्वरकों की खरीद, वितरण, बिक्री, विपणन और इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था। प्रशासन ने मार्च में ही गांवों के किसानों के बीच जैविक उर्वरकों का वितरण शुरू कर दिया था ताकि बुवाई के मौसम से पहले ये समय पर उपलब्ध हो सकें। किसानों और अन्य संबंधित पक्षों को बधाई देते हुए सक्सेना ने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि लद्दाख को जैविक क्षेत्र का दर्जा मिलने से किसानों को बेहतर बाजार पहुंच, उपज का उचित मूल्य और टिकाऊ आजीविका के माध्यम से वास्तविक लाभ मिले।
हमें पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक सहयोग के साथ जोड़ना होगा, जैविक उत्पादों की मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना होगा और अपने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करनी होगी।’’
लोक भवन के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस जैविक बदलाव से लद्दाख के किसानों के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

