शरद पूर्णिमा पर मंदिरों में लगेगा खीर का भोग:चंद्रमा 16 कलाओं से होगा परिपूर्ण; गजकेसरी और सर्वार्थ सिद्धि सहित कई शुभ योग

शरद पूर्णिमा पर मंदिरों में लगेगा खीर का भोग:चंद्रमा 16 कलाओं से होगा परिपूर्ण; गजकेसरी और सर्वार्थ सिद्धि सहित कई शुभ योग

शरद पूर्णिमा का पर्व रविवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी शीतल चांदनी अमृत के समान लाभकारी होती है। इसी विश्वास के चलते लोग रात में खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखते हैं और सुबह उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। शहर के विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों की तैयारियां की गई हैं। चांदनी में खीर रखने की परंपरा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में विशेष ऊर्जा होती है। इसी वजह से खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। श्रद्धालु रातभर खीर खुले आसमान के नीचे रखते हैं और अगले दिन परिवार के सदस्यों के साथ प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। मान्यता है कि इससे स्वास्थ्य लाभ होता है। हालांकि, यह धार्मिक आस्था से जुड़ी परंपरा है। सर्वार्थ सिद्धि योग सहित बनेंगे कई शुभ योग इस बार शरद पूर्णिमा पर कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि रविवार सुबह 11:57 बजे शुरू होकर सोमवार 26 अक्टूबर को सुबह 9:42 बजे तक रहेगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, रविवार शाम 7:22 बजे से चंद्रमा मेष राशि में रहेगा। इस दौरान गजकेसरी, लक्ष्मीनारायण और हंस जैसे योग बनने की बात कही गई है। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि और हर्षण योग का भी संयोग रहेगा। इन योगों को पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए विशेष माना जाता है। मंदिरों में खीर का भोग, प्रसाद वितरण शहर के प्रमुख मंदिरों में शरद पूर्णिमा पर विशेष आयोजन होंगे। जनकगंज स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर में भगवान को मेवायुक्त दूध की खीर का भोग लगाया जाएगा। मंदिर की वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार, यहां शरदोत्सव श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। सनातन धर्म मंदिर में भगवान चक्रधर का विशेष शृंगार किया जाएगा। भजन-कीर्तन के साथ 2 क्विंटल खीर का भोग लगाया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। वहीं, अचलेश्वर महादेव मंदिर में सोमवार को शरदोत्सव आयोजित होगा। यहां करीब 3 हजार किलो दूध की खीर तैयार की जाएगी। भगवान को भोग लगाने के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया जाएगा। साहित्य और संगीत के कार्यक्रम भी होंगे शरद पूर्णिमा पर धार्मिक आयोजनों के साथ साहित्य और संगीत की प्रस्तुतियां भी होंगी। लक्ष्मीबाई कॉलोनी स्थित गंगादास की बड़ी शाला में शाम 6 बजे से रामायण की संगीतमय प्रस्तुति होगी। वहीं, तवालीयार साहित्य संस्थान की ओर से शाम 4 बजे पाटनकर चौराहे के पास कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें श्रीमद्भागवत महापुराण की लोकभाषा में कथा सुनाई जाएगी। साथ ही कवि सीताराम बघेल का सम्मान भी किया जाएगा।

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