रायसेन में भोपाल-विदिशा नेशनल हाईवे-146 पर सफर को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए फोरलेन निर्माण के दौरान सड़क का अलाइनमेंट सुधारा जा रहा है। पहाड़ियों के बीच बने पुराने रास्ते के अंधे मोड़ों को खत्म करने के लिए पहाड़ काटकर सड़क को सीधा किया जा रहा है। इससे वाहन ड्राइवरों को सामने से आने वाले वाहन पहले ही दिखाई दे सकेंगे और दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी। पुराने मार्ग पर पहाड़ी हिस्सों में कई जगह तीखे घुमाव हैं। इन मोड़ों पर सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देने के कारण ड्राइवरों को परेशानी होती है। खासकर तेज रफ्तार वाहनों के लिए इन जगहों पर हादसों का खतरा बना रहता है। अब फोरलेन निर्माण के दौरान ऐसे हिस्सों की बनावट बदली जा रही है। सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के साथ घुमाव कम किए जा रहे हैं, ताकि वाहन चालकों को आगे का रास्ता स्पष्ट दिखाई दे। 100 किमी प्रति घंटे की डिजाइन गति के मानकों पर निर्माण
हाईवे को 100 किमी प्रति घंटे की डिजाइन गति के मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। इसके लिए सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के साथ उसके अलाइनमेंट और घुमावों में सुधार किया जा रहा है। पहाड़ी हिस्सों में रास्ता सीधा होने से वाहन ड्राइवरों को समय रहते सामने की स्थिति का अंदाजा लगाने और जरूरत पड़ने पर गति नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, वास्तविक सुरक्षित गति मौसम, यातायात और सड़क पर लागू गति सीमा के अनुसार ही तय होगी। 42 किमी हिस्से को बनाया जा रहा फोरलेन
NHAI के अनुसार, भारतमाला परियोजना के तहत भोपाल के रत्नागिरी तिराहे से विदिशा के मोरी-कोड़ी तक नेशनल हाईवे-146 के 42.040 किमी हिस्से को फोरलेन बनाया जा रहा है। परियोजना में पुराने मार्ग के कुछ हिस्सों का अलाइनमेंट बदलने के साथ बाइपास निर्माण के काम भी शामिल हैं। फोरलेन बनने के बाद इस मार्ग पर यातायात की क्षमता बढ़ेगी और वाहनों की आवाजाही पहले की तुलना में अधिक सुगम होने की उम्मीद है। पहाड़ी हिस्सों में अंधे मोड़ों को खत्म कर सड़क को सीधा करने से सुरक्षित आवागमन की दिशा में भी सुधार होगा।

