अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी राजगीर स्थित ऐतिहासिक रत्नागिरि पर्वत पर रविवार को विश्व शांति स्तूप का 57वां स्थापना दिवस धूमधाम और श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। राजगीर बुद्ध विहार सोसाइटी और निप्पोनजान म्योहोजी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस भव्य समारोह को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई है। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार के पर्यटन मंत्री केदारनाथ गुप्ता और विशिष्ट अतिथि के तौर पर ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार शिरकत करेंगे। वहीं, जापान की प्रतिष्ठित संतोकू कंपनी के सीईओ सह तीर्थयात्रा मिशन ऑफ इंडिया के प्रमुख केंसुके होरिउची कार्यक्रम के सम्मानित अतिथि होंगे। स्थापना दिवस के मौके पर निप्पोनजान म्योहोजी और थेरवाद परंपरा के वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु विशेष धार्मिक अनुष्ठान और शांति पाठ कराएंगे। सुबह 10 बजे से शुरू होंगे धार्मिक अनुष्ठान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार समारोह का शुभारंभ सुबह 10 बजे निप्पोनजान म्योहोजी के बौद्ध भिक्षुओं द्वारा विशेष पूजा-अर्चना के साथ होगा। इसके बाद थेरवाद परंपरा के भिक्षु पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न करेंगे। सुबह 10:45 बजे स्वागत भाषण के बाद मुख्य भिक्षु का आशीर्वाद और उपस्थित विशिष्ट अतिथियों का संबोधन होगा। इस अवसर पर बिहार सरकार के प्रतिनिधि के रूप में पर्यटन मंत्री द्वारा मुख्य भिक्षु को सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम का समापन अतिथियों के सम्मान और धन्यवाद ज्ञापन के साथ होगा। विश्व में शांति और अहिंसा का प्रतीक है स्तूप पवित्र गृद्धकूट पहाड़ी के सम्मुख रत्नागिरि पर्वत पर स्थित विश्व शांति स्तूप राजगीर के प्रमुख धार्मिक और दर्शनीय स्थलों में शुमार है। इस भव्य स्तूप का निर्माण जापानी बौद्ध भिक्षु पूज्य निचिदात्सु फुजीई गुरुजी की पावन प्रेरणा से कराया गया था। भगवान बुद्ध के शांति, करुणा, मैत्री और अहिंसा के संदेश को पूरी दुनिया में प्रसारित करने वाला यह केंद्र प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में देसी-विदेशी पर्यटकों और बौद्ध श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। आकर्षक लाइटिंग से जगमगाया परिसर वार्षिकोत्सव को लेकर विश्व शांति स्तूप सज-धज कर तैयार है। पूरे परिसर और स्तूप को आकर्षक दूधिया रोशनी से नहलाया गया है। स्तूप की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग, रोपवे परिसर, टिकट काउंटर और रोपवे केबिनों की विशेष रंगाई-पुताई व सजावट की गई है। स्तूप के चारों ओर छह विशेष पोल लगाकर आधुनिक दूधिया लाइटें लगाई गई हैं, जिससे रात के समय पहाड़ी का दृश्य विहंगम नजर आ रहा है। आयोजकों और प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी राजगीर स्थित ऐतिहासिक रत्नागिरि पर्वत पर रविवार को विश्व शांति स्तूप का 57वां स्थापना दिवस धूमधाम और श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। राजगीर बुद्ध विहार सोसाइटी और निप्पोनजान म्योहोजी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस भव्य समारोह को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई है। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार के पर्यटन मंत्री केदारनाथ गुप्ता और विशिष्ट अतिथि के तौर पर ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार शिरकत करेंगे। वहीं, जापान की प्रतिष्ठित संतोकू कंपनी के सीईओ सह तीर्थयात्रा मिशन ऑफ इंडिया के प्रमुख केंसुके होरिउची कार्यक्रम के सम्मानित अतिथि होंगे। स्थापना दिवस के मौके पर निप्पोनजान म्योहोजी और थेरवाद परंपरा के वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु विशेष धार्मिक अनुष्ठान और शांति पाठ कराएंगे। सुबह 10 बजे से शुरू होंगे धार्मिक अनुष्ठान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार समारोह का शुभारंभ सुबह 10 बजे निप्पोनजान म्योहोजी के बौद्ध भिक्षुओं द्वारा विशेष पूजा-अर्चना के साथ होगा। इसके बाद थेरवाद परंपरा के भिक्षु पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न करेंगे। सुबह 10:45 बजे स्वागत भाषण के बाद मुख्य भिक्षु का आशीर्वाद और उपस्थित विशिष्ट अतिथियों का संबोधन होगा। इस अवसर पर बिहार सरकार के प्रतिनिधि के रूप में पर्यटन मंत्री द्वारा मुख्य भिक्षु को सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम का समापन अतिथियों के सम्मान और धन्यवाद ज्ञापन के साथ होगा। विश्व में शांति और अहिंसा का प्रतीक है स्तूप पवित्र गृद्धकूट पहाड़ी के सम्मुख रत्नागिरि पर्वत पर स्थित विश्व शांति स्तूप राजगीर के प्रमुख धार्मिक और दर्शनीय स्थलों में शुमार है। इस भव्य स्तूप का निर्माण जापानी बौद्ध भिक्षु पूज्य निचिदात्सु फुजीई गुरुजी की पावन प्रेरणा से कराया गया था। भगवान बुद्ध के शांति, करुणा, मैत्री और अहिंसा के संदेश को पूरी दुनिया में प्रसारित करने वाला यह केंद्र प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में देसी-विदेशी पर्यटकों और बौद्ध श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। आकर्षक लाइटिंग से जगमगाया परिसर वार्षिकोत्सव को लेकर विश्व शांति स्तूप सज-धज कर तैयार है। पूरे परिसर और स्तूप को आकर्षक दूधिया रोशनी से नहलाया गया है। स्तूप की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग, रोपवे परिसर, टिकट काउंटर और रोपवे केबिनों की विशेष रंगाई-पुताई व सजावट की गई है। स्तूप के चारों ओर छह विशेष पोल लगाकर आधुनिक दूधिया लाइटें लगाई गई हैं, जिससे रात के समय पहाड़ी का दृश्य विहंगम नजर आ रहा है। आयोजकों और प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।

