कटिहार में 31 साल बाद घर लौटा बेटा:मां ने आंख के कटे निशान से पहचाना, पश्चिम बंगाल में अब्दुल जब्बार बनकर जी रहा था

कटिहार में 31 साल बाद घर लौटा बेटा:मां ने आंख के कटे निशान से पहचाना, पश्चिम बंगाल में अब्दुल जब्बार बनकर जी रहा था

कटिहार के कांटाकोष गांव में 31 साल बाद एक बेटा अपने परिवार से मिला। आठ साल की उम्र में ट्रेन में बिछड़ा पिंटू यादव अब अब्दुल जब्बार के नाम से घर लौटा है। मां मीणा देवी ने उसकी आंख के ऊपर बचपन के कटे निशान से उसे पहचान लिया। करीब 1995 में पिंटू दोस्तों के साथ कांटाकोष रेलवे स्टेशन पहुंचा था। ट्रेन में नींद आने से वह पश्चिम बंगाल के राधिकापुर पहुंच गया। वहां अब्दुल रहीम ने उसे सहारा दिया और पाला। पिंटू की नई पहचान अब्दुल जब्बार बन गई। उसकी शादी मुतेना खातून से हुई और अब वह दो बेटों व एक बेटी का पिता है। अब्दुल जब्बार हमेशा अपने असली परिवार को ढूंढना चाहता था। उसे पिता मोतीलाल यादव और गंगा किनारे बसे गांव की याद थी। दिल्ली में मजदूरी के दौरान एक दोस्त की मदद से उसने सोशल मीडिया के जरिए अपने गांव की तलाश शुरू की, जिससे यह मिलन संभव हुआ। लोगों से पूछताछ करते-करते वह आखिरकार कटिहार के मनिहारी प्रखंड के कांटाकोष गांव पहुंच ही गया। मां ने निशान से पहचाना, पिता ने गले लगाया 31 साल बाद बेटे के घर पहुंचने की खबर सुनते ही गांव में सनसनी फैल गई। घर पर ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। मां मीणा देवी ने बेटे को देखते ही गले लगा लिया और खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने उसकी आंख के ऊपर बचपन में लगे कट के पुराने निशान को देखते ही पहचान लिया कि यही उनका बिछड़ा पिंटू है। पिता और भाई ने भी उसे गले से लगा लिया। घर में मातम जैसा सन्नाटा 31 साल बाद खुशियों में बदल गया। परिजनों से मिलती-जुलती है बाते घर पहुंचकर अब्दुल जब्बार ने बचपन से जुड़ी कई बातें और गांव की पुरानी यादें साझा कीं, जो परिजनों की बताई बातों से काफी हद तक मेल खाती हैं। मौके पर पहुंचे स्वामी सत्यप्रकाश बाबा ने भी कहा कि कई बातें परिजनों से मिलती-जुलती हैं। हालांकि, प्रशासनिक तौर पर पहचान और घटना के सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

फिलहाल इस मिलन से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। एक तरफ 31 साल बाद बिछड़ा बेटा मिला है, तो दूसरी तरफ बंगाल में भी उसका अपना परिवार है। अब अब्दुल जब्बार उर्फ पिंटू आगे कहां रहेगा, यह उसका निजी फैसला होगा, लेकिन कांटाकोष गांव में यह दिवाली से पहले ही दिवाली जैसा माहौल बन गया है।

आज शुक्रवार को पिंटू उर्फ अब्दुल जब्बार के पिता और भाई पश्चिम बंगाल के उतरी दिनाजपुर रवाना हुए है। कटिहार के कांटाकोष गांव में 31 साल बाद एक बेटा अपने परिवार से मिला। आठ साल की उम्र में ट्रेन में बिछड़ा पिंटू यादव अब अब्दुल जब्बार के नाम से घर लौटा है। मां मीणा देवी ने उसकी आंख के ऊपर बचपन के कटे निशान से उसे पहचान लिया। करीब 1995 में पिंटू दोस्तों के साथ कांटाकोष रेलवे स्टेशन पहुंचा था। ट्रेन में नींद आने से वह पश्चिम बंगाल के राधिकापुर पहुंच गया। वहां अब्दुल रहीम ने उसे सहारा दिया और पाला। पिंटू की नई पहचान अब्दुल जब्बार बन गई। उसकी शादी मुतेना खातून से हुई और अब वह दो बेटों व एक बेटी का पिता है। अब्दुल जब्बार हमेशा अपने असली परिवार को ढूंढना चाहता था। उसे पिता मोतीलाल यादव और गंगा किनारे बसे गांव की याद थी। दिल्ली में मजदूरी के दौरान एक दोस्त की मदद से उसने सोशल मीडिया के जरिए अपने गांव की तलाश शुरू की, जिससे यह मिलन संभव हुआ। लोगों से पूछताछ करते-करते वह आखिरकार कटिहार के मनिहारी प्रखंड के कांटाकोष गांव पहुंच ही गया। मां ने निशान से पहचाना, पिता ने गले लगाया 31 साल बाद बेटे के घर पहुंचने की खबर सुनते ही गांव में सनसनी फैल गई। घर पर ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। मां मीणा देवी ने बेटे को देखते ही गले लगा लिया और खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने उसकी आंख के ऊपर बचपन में लगे कट के पुराने निशान को देखते ही पहचान लिया कि यही उनका बिछड़ा पिंटू है। पिता और भाई ने भी उसे गले से लगा लिया। घर में मातम जैसा सन्नाटा 31 साल बाद खुशियों में बदल गया। परिजनों से मिलती-जुलती है बाते घर पहुंचकर अब्दुल जब्बार ने बचपन से जुड़ी कई बातें और गांव की पुरानी यादें साझा कीं, जो परिजनों की बताई बातों से काफी हद तक मेल खाती हैं। मौके पर पहुंचे स्वामी सत्यप्रकाश बाबा ने भी कहा कि कई बातें परिजनों से मिलती-जुलती हैं। हालांकि, प्रशासनिक तौर पर पहचान और घटना के सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

फिलहाल इस मिलन से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। एक तरफ 31 साल बाद बिछड़ा बेटा मिला है, तो दूसरी तरफ बंगाल में भी उसका अपना परिवार है। अब अब्दुल जब्बार उर्फ पिंटू आगे कहां रहेगा, यह उसका निजी फैसला होगा, लेकिन कांटाकोष गांव में यह दिवाली से पहले ही दिवाली जैसा माहौल बन गया है।

आज शुक्रवार को पिंटू उर्फ अब्दुल जब्बार के पिता और भाई पश्चिम बंगाल के उतरी दिनाजपुर रवाना हुए है।  

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