नालंदा- 26 से 28 नवंबर तक राजगीर महोत्सव:लगातार पांचवीं बार होगा आयोजन, खजुराहो नृत्य महोत्सव की तर्ज पर 1986 में हुई थी शुरुआत

नालंदा- 26 से 28 नवंबर तक राजगीर महोत्सव:लगातार पांचवीं बार होगा आयोजन, खजुराहो नृत्य महोत्सव की तर्ज पर 1986 में हुई थी शुरुआत

अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी राजगीर में तीन दिवसीय ऐतिहासिक ‘राजगीर महोत्सव’ की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। इस वर्ष महोत्सव का आयोजन 26 से 28 नवंबर तक स्टेट गेस्ट हाउस परिसर में किया जाएगा। यह लगातार पांचवां अवसर होगा जब स्टेट गेस्ट हाउस के मैदान में इस भव्य सांस्कृतिक समागम का मंच सजेगा। पिछले दो वर्षों से दिसंबर महीने में आयोजित हो रहा यह प्रतिष्ठित महोत्सव एक बार फिर अपनी पुरानी परंपरा के अनुसार नवंबर माह में लौट रहा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में शास्त्रीय संगीत, लोक नृत्य, सूफी गायन, बॉलीवुड नाइट के साथ-साथ ग्रामश्री, व्यंजन, कृषि और पुस्तक मेला मुख्य आकर्षण होंगे। शास्त्रीय संगीत से बॉलीवुड नाइट तक सजेगी शाम महोत्सव की हर शाम सुर, लय और ताल की विविध विधाओं के नाम रहेगी। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ-साथ सूफी गायन और बिहार के पारंपरिक लोक नृत्य झिझिया व जट-जटिन को प्रमुखता से मंच देने की योजना है। इसके अतिरिक्त बॉलीवुड नाइट में चर्चित पार्श्व गायकों की प्रस्तुति दर्शकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनेगी। कलाकारों की अंतिम सूची जारी होने के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। ग्रामश्री मेले में हस्तशिल्प और खादी की धूम, व्यंजन मेले में मिलेगा पारंपरिक स्वाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ मेले और प्रदर्शनियां भी महोत्सव का मुख्य आकर्षण रहेंगी। ग्रामश्री मेले में बिहार सहित देशभर के दस्तकार अपने हस्तशिल्प, खादी, हथकरघा और काष्ठ कलाकृतियों के स्टॉल लगाएंगे। व्यंजन मेले में आगंतुकों को चाट-पकौड़ी, छोले-भटूरे के अलावा बिहार के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद मिलेगा। वहीं, सिलाव का मशहूर खाजा और क्षेत्रीय मिठाइयों के खास स्टॉल भी सजे रहेंगे। इसके अलावा कृषि मेले में आधुनिक उपकरणों व तकनीकों की प्रदर्शनी लगेगी और पुस्तक मेले में साहित्य प्रेमियों के लिए विविध विधाओं की पुस्तकें उपलब्ध होंगी। दंगल, तांगा सज्जा और हेरिटेज वॉक का रहेगा रोमांच बच्चों और युवाओं की प्रतिभा को निखारने के लिए रंगोली, मेहंदी, चित्रकला और ताइक्वांडो जैसी विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। पर्यटकों और नई पीढ़ी को राजगीर की प्राचीन व गौरवशाली विरासत से रूबरू कराने के लिए हेरिटेज वॉक का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके तहत ऐतिहासिक जरासंध अखाड़ा से विश्व शांति स्तूप तक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। साथ ही पारंपरिक दंगल, तांगा सज्जा और पालकी सज्जा जैसी ग्रामीण प्रतियोगिताएं भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। खजुराहो नृत्य महोत्सव की तर्ज पर 1986 में हुई थी शुरुआत राजगीर महोत्सव की परिकल्पना मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध खजुराहो नृत्य महोत्सव से प्रेरित होकर की गई थी। इसकी शुरुआत 4 मार्च 1986 को बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दुबे ने की थी। आरंभिक दौर में इसे ‘राजगीर नृत्य महोत्सव’ के नाम से जाना जाता था। सोन भंडार परिसर से शुरू होकर यह आयोजन यूथ हॉस्टल और अजातशत्रु किला मैदान होते हुए आज स्टेट गेस्ट हाउस तक पहुंचा है। बीच में कुछ वर्षों तक आयोजन बाधित रहा, लेकिन 1995 के बाद इसे नई पहचान और विस्तार मिला। दिग्गजों से सजी रही है महफिल, इस बार भी टिकीं उम्मीदें राजगीर महोत्सव के मंच को पंडित बिरजू महाराज, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, हेमा मालिनी, रवींद्र जैन, पंडित हरिप्रसाद चौरसिया, पंडित शिवकुमार शर्मा, सोनल मानसिंह, स्वप्नसुंदरी, संजुक्ता पाणिग्राही, गुलाम अली, जगजीत सिंह, पंकज उधास और अनूप जलोटा जैसी कालजयी विभूतियों ने अपनी कला से समृद्ध किया है। बाद के दौर में शान, अलका याज्ञनिक, कैलाश खेर, सुखविंदर सिंह, अदनान सामी, उदित नारायण, हरिहरन, जुबिन नौटियाल, मैथिली ठाकुर, पवनदीप और अरुणिता जैसे कलाकारों ने महफिल लूटी। हालांकि, हाल के दो-तीन वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े चेहरों की सीमित मौजूदगी चर्चा का विषय रही है। ऐसे में इस बार प्रशासनिक स्तर पर कलाकारों के चयन को लेकर कलाप्रेमियों और पर्यटकों की निगाहें टिकी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी राजगीर में तीन दिवसीय ऐतिहासिक ‘राजगीर महोत्सव’ की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। इस वर्ष महोत्सव का आयोजन 26 से 28 नवंबर तक स्टेट गेस्ट हाउस परिसर में किया जाएगा। यह लगातार पांचवां अवसर होगा जब स्टेट गेस्ट हाउस के मैदान में इस भव्य सांस्कृतिक समागम का मंच सजेगा। पिछले दो वर्षों से दिसंबर महीने में आयोजित हो रहा यह प्रतिष्ठित महोत्सव एक बार फिर अपनी पुरानी परंपरा के अनुसार नवंबर माह में लौट रहा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में शास्त्रीय संगीत, लोक नृत्य, सूफी गायन, बॉलीवुड नाइट के साथ-साथ ग्रामश्री, व्यंजन, कृषि और पुस्तक मेला मुख्य आकर्षण होंगे। शास्त्रीय संगीत से बॉलीवुड नाइट तक सजेगी शाम महोत्सव की हर शाम सुर, लय और ताल की विविध विधाओं के नाम रहेगी। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ-साथ सूफी गायन और बिहार के पारंपरिक लोक नृत्य झिझिया व जट-जटिन को प्रमुखता से मंच देने की योजना है। इसके अतिरिक्त बॉलीवुड नाइट में चर्चित पार्श्व गायकों की प्रस्तुति दर्शकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनेगी। कलाकारों की अंतिम सूची जारी होने के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। ग्रामश्री मेले में हस्तशिल्प और खादी की धूम, व्यंजन मेले में मिलेगा पारंपरिक स्वाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ मेले और प्रदर्शनियां भी महोत्सव का मुख्य आकर्षण रहेंगी। ग्रामश्री मेले में बिहार सहित देशभर के दस्तकार अपने हस्तशिल्प, खादी, हथकरघा और काष्ठ कलाकृतियों के स्टॉल लगाएंगे। व्यंजन मेले में आगंतुकों को चाट-पकौड़ी, छोले-भटूरे के अलावा बिहार के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद मिलेगा। वहीं, सिलाव का मशहूर खाजा और क्षेत्रीय मिठाइयों के खास स्टॉल भी सजे रहेंगे। इसके अलावा कृषि मेले में आधुनिक उपकरणों व तकनीकों की प्रदर्शनी लगेगी और पुस्तक मेले में साहित्य प्रेमियों के लिए विविध विधाओं की पुस्तकें उपलब्ध होंगी। दंगल, तांगा सज्जा और हेरिटेज वॉक का रहेगा रोमांच बच्चों और युवाओं की प्रतिभा को निखारने के लिए रंगोली, मेहंदी, चित्रकला और ताइक्वांडो जैसी विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। पर्यटकों और नई पीढ़ी को राजगीर की प्राचीन व गौरवशाली विरासत से रूबरू कराने के लिए हेरिटेज वॉक का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके तहत ऐतिहासिक जरासंध अखाड़ा से विश्व शांति स्तूप तक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। साथ ही पारंपरिक दंगल, तांगा सज्जा और पालकी सज्जा जैसी ग्रामीण प्रतियोगिताएं भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। खजुराहो नृत्य महोत्सव की तर्ज पर 1986 में हुई थी शुरुआत राजगीर महोत्सव की परिकल्पना मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध खजुराहो नृत्य महोत्सव से प्रेरित होकर की गई थी। इसकी शुरुआत 4 मार्च 1986 को बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दुबे ने की थी। आरंभिक दौर में इसे ‘राजगीर नृत्य महोत्सव’ के नाम से जाना जाता था। सोन भंडार परिसर से शुरू होकर यह आयोजन यूथ हॉस्टल और अजातशत्रु किला मैदान होते हुए आज स्टेट गेस्ट हाउस तक पहुंचा है। बीच में कुछ वर्षों तक आयोजन बाधित रहा, लेकिन 1995 के बाद इसे नई पहचान और विस्तार मिला। दिग्गजों से सजी रही है महफिल, इस बार भी टिकीं उम्मीदें राजगीर महोत्सव के मंच को पंडित बिरजू महाराज, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, हेमा मालिनी, रवींद्र जैन, पंडित हरिप्रसाद चौरसिया, पंडित शिवकुमार शर्मा, सोनल मानसिंह, स्वप्नसुंदरी, संजुक्ता पाणिग्राही, गुलाम अली, जगजीत सिंह, पंकज उधास और अनूप जलोटा जैसी कालजयी विभूतियों ने अपनी कला से समृद्ध किया है। बाद के दौर में शान, अलका याज्ञनिक, कैलाश खेर, सुखविंदर सिंह, अदनान सामी, उदित नारायण, हरिहरन, जुबिन नौटियाल, मैथिली ठाकुर, पवनदीप और अरुणिता जैसे कलाकारों ने महफिल लूटी। हालांकि, हाल के दो-तीन वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े चेहरों की सीमित मौजूदगी चर्चा का विषय रही है। ऐसे में इस बार प्रशासनिक स्तर पर कलाकारों के चयन को लेकर कलाप्रेमियों और पर्यटकों की निगाहें टिकी हुई हैं।  

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