नालन्दा जिले में प्राकृतिक खेती को विस्तार देने और ग्रामीण महिलाओं को पोषण व आजीविका के स्तर पर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कृषि विभाग ने बड़ी पहल की है। इसके तहत जिले में जल्द ही 500 किचेन गार्डेन विकसित किए जाएंगे। इन वाटिकाओं में बिना किसी रासायनिक खाद या कीटनाशक के पूरी तरह जैविक पद्धति से मौसमी हरी सब्जियों, सलाद और मशरूम का उत्पादन किया जाएगा। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभाग ने प्रत्येक प्रखंड में 25-25 महिलाओं के दो-दो समूह गठित करने की कवायद तेज कर दी है। ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर चयन समूह गठन का जिम्मा प्रखंड स्तर पर प्रखंड तकनीकी प्रबंधक और सहायक तकनीकी प्रबंधक को सौंपा गया है। समूह में महिलाओं को ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की तर्ज पर शामिल किया जा रहा है। योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी महिला के पास घर के आसपास कम से कम एक डिसमिल या निर्धारित खाली जमीन होना अनिवार्य है। समूह संचालन को पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए सदस्यों के बीच से ही अध्यक्ष और सचिव का चयन होगा। बीज, जैविक कीटनाशक व जरूरी उपकरणों की व्यवस्था के लिए विभाग प्रत्येक समूह को 25 हजार रुपये का इनपुट अनुदान सीधे मुहैया कराएगा। रसोई के कचरे से बनेगी खाद, सेहत के साथ होगी आर्थिक बचत इस पहल की सबसे अहम कड़ी शून्य रासायनिक उपयोग है। महिलाएं रसोई से निकलने वाले जैविक कचरे, जैसे सब्जियों व फलों के छिलके और बची चायपत्ती से घर पर ही कंपोस्ट खाद तैयार करेंगी। इस खाद के इस्तेमाल से घर पर ही ताजा और रसायनमुक्त सब्जियां उपलब्ध होंगी, जिससे परिवार का पोषण स्तर सुधरेगा। साथ ही बाजार से महंगी सब्जियां खरीदने का खर्च बचने से परिवारों को सीधी आर्थिक बचत भी होगी। ‘आत्मा’ में होगा निबंधन, वैज्ञानिक देंगे तकनीकी प्रशिक्षण गठित सभी समूहों का बाकायदा रजिस्ट्रेशन कृषि विभाग की एजेंसी ‘आत्मा’ (एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी) में कराया जाएगा। निबंधन के उपरांत कृषि वैज्ञानिक महिलाओं को कम लागत में वैज्ञानिक तकनीक से अधिक उपज लेने का व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि चयन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाए, ताकि केवल इच्छुक और जरूरतमंद महिलाओं को ही इसका सीधा लाभ मिले। जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. नितेश कुमार ने बताया कि सभी प्रखंडों में महिलाओं के समूह गठन का कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके तुरंत बाद चयनित महिलाओं को जैविक खेती का विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। किचेन गार्डेन पूरी तरह रसायनमुक्त होंगे। यह योजना महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। नालन्दा जिले में प्राकृतिक खेती को विस्तार देने और ग्रामीण महिलाओं को पोषण व आजीविका के स्तर पर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कृषि विभाग ने बड़ी पहल की है। इसके तहत जिले में जल्द ही 500 किचेन गार्डेन विकसित किए जाएंगे। इन वाटिकाओं में बिना किसी रासायनिक खाद या कीटनाशक के पूरी तरह जैविक पद्धति से मौसमी हरी सब्जियों, सलाद और मशरूम का उत्पादन किया जाएगा। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभाग ने प्रत्येक प्रखंड में 25-25 महिलाओं के दो-दो समूह गठित करने की कवायद तेज कर दी है। ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर चयन समूह गठन का जिम्मा प्रखंड स्तर पर प्रखंड तकनीकी प्रबंधक और सहायक तकनीकी प्रबंधक को सौंपा गया है। समूह में महिलाओं को ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की तर्ज पर शामिल किया जा रहा है। योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी महिला के पास घर के आसपास कम से कम एक डिसमिल या निर्धारित खाली जमीन होना अनिवार्य है। समूह संचालन को पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए सदस्यों के बीच से ही अध्यक्ष और सचिव का चयन होगा। बीज, जैविक कीटनाशक व जरूरी उपकरणों की व्यवस्था के लिए विभाग प्रत्येक समूह को 25 हजार रुपये का इनपुट अनुदान सीधे मुहैया कराएगा। रसोई के कचरे से बनेगी खाद, सेहत के साथ होगी आर्थिक बचत इस पहल की सबसे अहम कड़ी शून्य रासायनिक उपयोग है। महिलाएं रसोई से निकलने वाले जैविक कचरे, जैसे सब्जियों व फलों के छिलके और बची चायपत्ती से घर पर ही कंपोस्ट खाद तैयार करेंगी। इस खाद के इस्तेमाल से घर पर ही ताजा और रसायनमुक्त सब्जियां उपलब्ध होंगी, जिससे परिवार का पोषण स्तर सुधरेगा। साथ ही बाजार से महंगी सब्जियां खरीदने का खर्च बचने से परिवारों को सीधी आर्थिक बचत भी होगी। ‘आत्मा’ में होगा निबंधन, वैज्ञानिक देंगे तकनीकी प्रशिक्षण गठित सभी समूहों का बाकायदा रजिस्ट्रेशन कृषि विभाग की एजेंसी ‘आत्मा’ (एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी) में कराया जाएगा। निबंधन के उपरांत कृषि वैज्ञानिक महिलाओं को कम लागत में वैज्ञानिक तकनीक से अधिक उपज लेने का व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि चयन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाए, ताकि केवल इच्छुक और जरूरतमंद महिलाओं को ही इसका सीधा लाभ मिले। जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. नितेश कुमार ने बताया कि सभी प्रखंडों में महिलाओं के समूह गठन का कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके तुरंत बाद चयनित महिलाओं को जैविक खेती का विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। किचेन गार्डेन पूरी तरह रसायनमुक्त होंगे। यह योजना महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।

