जामिया यूनिवर्सिटी की दीवारों पर फ्री कश्मीर-फ्री शर्जील के नारे:विश्व हिंदू परिषद बोला- भारत विरोधी गतिविधियों का अड्डा नहीं बनने देंगे; पुलिस तैनात

जामिया यूनिवर्सिटी की दीवारों पर फ्री कश्मीर-फ्री शर्जील के नारे:विश्व हिंदू परिषद बोला- भारत विरोधी गतिविधियों का अड्डा नहीं बनने देंगे; पुलिस तैनात

नई दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की दीवारों पर फ्री कश्मीर और फ्री शरजील इमाम जैसे कई नारे लिखे मिले। विश्व हिंदू परिषद ने इस पर आपत्ति जताई। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच यूनिवर्सिटी के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस को तैनात कर दिया गया है। VHP ने कहा कि वह जामिया को “एंटी-इंडिया” गतिविधियों का अड्डा नहीं बनने देगा। ये तस्वीरें ऐसे समय सामने आई हैं, जब यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन चल रहा है। VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने X पर तस्वीरें साझा कीं। इनमें फ्री कश्मीर, फ्री फिलिस्तीन, फ्री शरजील इमाम और RSS गो बैक लिखा दिख रहा है। हालांकि, इन तस्वीरों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यूनिवर्सिटी पर लिखे नारों की तस्वीर… VHP ने कार्रवाई की मांग की विनोद बंसल ने कहा कि देश की राजधानी की प्रतिष्ठित जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की दीवारों पर ऐसे नारे लिखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे शिक्षा के मंदिर को अपवित्र करने की गहरी साजिश बताया। बंसल ने यूनिवर्सिटी प्रशासन और पुलिस से जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा, “क्या कुछ लोग इस केंद्रीय यूनिवर्सिटी को एंटी-इंडिया गतिविधियों का अड्डा बनाने की कोशिश कर रहे हैं?” कांग्रेस नेतृत्व पर भी निशाना VHP प्रवक्ता ने कांग्रेस नेतृत्व पर उन लोगों का राजनीतिक बचाव करने का आरोप लगाया, जो संविधान को फासीवादी बताते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऐसे लोग भारत के टुकड़े करने जैसे नारे लगाते हैं। बंसल ने कहा, “सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व साफ करे कि वे शरजील इमाम के साथ हैं या भारत के संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता के साथ।” उन्होंने कहा कि एंटी-नेशनल विचारों को राजनीतिक संरक्षण अब खत्म होना चाहिए। बंसल के मुताबिक, संविधान का अपमान करने और लोगों में अविश्वास फैलाने वालों का सार्वजनिक बहिष्कार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को राजनीतिक संरक्षण देने के बजाय सख्त सजा मिलनी चाहिए।

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