नेपाल के हिमालय में दो जापानी पर्वतारोहियों की मौत हो गई है। ये दोनों 15 अक्टूबर से लापता थे, लेकिन शुक्रवार को अधिकारियों ने बताया कि गंगापूर्णा वेस्ट चोटी से दोनों पर्वतारोहियों के शव बरामद कर लिए गए हैं।
करीब एक हफ्ते की तलाश के बाद रेस्क्यू टीम ने उन्हें ढूंढ निकाला। काठमांडू से जुड़े अधिकारियों और स्थानीय पर्यटन कंपनी के लोगों ने इस बात की पुष्टि की।
मौसम और ऑक्सीजन की कमी
इस घटना को लेकर कॉस्मो एडवेंचर कंपनी के कुमार छेत्री ने बताया कि दोनों शव गंगापूर्णा वेस्ट पीक से लाए गए हैं। यह चोटी 7140 मीटर (करीब 23,425 फीट) ऊंची है। इतनी ऊंचाई पर मौसम और ऑक्सीजन की कमी अक्सर जानलेवा साबित होती है।
शवों को अब काठमांडू के अस्पताल भेजा जा रहा है। वहां पोस्टमॉर्टम किया जाएगा। अभी तक मौत का सही कारण साफ नहीं हुआ है। छेत्री ने इस घटना के बारे में ज्यादा डिटेल नहीं दी।
परिवार तक पहुंची खबर
परिवारों तक यह खबर पहुंच चुकी है। बता दें कि गंगापूर्णा वेस्ट नेपाल के अन्नपूर्णा क्षेत्र में आता है। यहां हर साल सैकड़ों विदेशी पर्वतारोही आते हैं। कुछ सफल होते हैं, कुछ नहीं लौट पाते।
इस बार दो जापानी क्लाइंबर भी उसी सूची में शामिल हो गए। उन्होंने स्थानीय गाइड और लॉजिस्टिक्स के लिए कॉस्मो एडवेंचर का सहारा लिया था। कंपनी ने सामान, पर्मिट और बेस कैंप की व्यवस्था की थी।
हिमालय में चढ़ाई आसान नहीं
हिमालय में चढ़ाई आसान नहीं होती। तेज हवा, बर्फबारी, अचानक मौसम बदलना और ऊंचाई का असर शरीर पर पड़ता है। कई बार अनुभव वाले क्लाइंबर भी फिसल जाते हैं या थकान से ढेर हो जाते हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन भी मुश्किल होता है क्योंकि हेलीकॉप्टर हर जगह नहीं पहुंच पाते।
बर्फीले इलाके में पैदल टीमों को आगे बढ़ना पड़ता है। नेपाल सरकार और पर्यटन विभाग ऐसे मामलों में तेजी से काम करते हैं। अब शवों को घर भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जापानी दूतावास भी इस पर गंभीर है।
नेपाल में पर्वतारोहण से जुड़े नियम सख्त
नेपाल में पर्वतारोहण से जुड़े नियम सख्त हैं। फिर भी हर साल हादसे होते हैं। गंगापूर्णा वेस्ट जैसी चोटियां चुनौती भरी मानी जाती हैं। कम ऊंचाई वाली चोटियों पर भी दुर्घटनाएं हो जाती हैं।

