Chirag Paswan ने Rice Export में मूल्य संवर्धन और गुणवत्ता सुधार पर दिया जोर

Chirag Paswan ने Rice Export में मूल्य संवर्धन और गुणवत्ता सुधार पर दिया जोर

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार को कहा कि देश ने चावल उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अब चुनौती मात्रा से हटकर मूल्य पर ध्यान देने की है। पासवान ने भारतीय चावल निर्यातक परिसंघ (आईआरईएफ) और अपीडा द्वारा आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (बीआईआरसी) के दूसरे संस्करण को संबोधित करते हुए कहा कि धान की खेती से लेकर खाने की मेज तक चावल की मूल्य शृंखला को मजबूत करने की काफी गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण अनुकूल तरीकों, गुणवत्ता प्रमाणन, अनुसंधान, नवोन्मेष और प्रसंस्कृत चावल उत्पादों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

पासवान ने कहा, ‘‘स्वतंत्रता के बाद दशकों तक देश की प्राथमिकता खाद्य सुरक्षा और अधिक उत्पादन थी।…हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्न की कमी से उबरने में मदद की। आज, मजबूत उत्पादन क्षमता के साथ हमें प्रसंस्करण, गुणवत्ता, ब्रांडिंग, स्थिरता और मूल्य संवर्धन पर ध्यान देना चाहिए। पासवान ने 2047 तक विकसित भारत बनाने के प्रधानमंत्री के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे हासिल करने में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की अहम भूमिका होगी।

उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्र अपनी विकास क्षमता की सीमा के करीब पहुंच रहे हैं, जबकि खाद्य प्रसंस्करण और इससे जुड़े क्षेत्रों में काफी संभावनाएं हैं, जिनका अभी पूरा उपयोग नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री का लक्ष्य भारत को दुनिया की खाद्य जरूरतों को पूरा करने में अहम योगदान देने वाला देश बनाना है। इसके तहत भारत न केवल अपनी खाद्य जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा, इस महत्वाकांक्षा के केंद्र में चावल होगा और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय प्रसंस्करण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नवोन्मेष को प्रोत्साहित करने और मूल्य वर्धित निर्यात का विस्तार करने के लिए अपनी योजनाओं के माध्यम से काम कर रहा है। पासवान ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातकों में से एक है, जिसकी वैश्विक चावल व्यापार में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा, यह भारत को एक बड़ी जिम्मेदारी और एक बड़ा अवसर दोनों देता है।

उन्होंने यह सवाल उठाया कि भागीदार देशों के साथ भारत की ताकत साझा करते हुए निर्यात को कैसे मजबूत किया जाए, गुणवत्ता में सुधार कैसे किया जाए और वैश्विक सर्वोत्तम गतिविधियों को कैसे अपनाया जाए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में राष्ट्रीय विकास के लिए रेखांकित की गई सप्तधारा या ताकत की सात धाराओं को याद करते हुए पासवान ने कहा कि विनिर्माण और कृषि विशेष रूप से चावल क्षेत्र के लिए प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि चावल मूल्य शृंखला के लिए अधिक से अधिक मशीनरी, उपकरण और तकनीक को घरेलू स्तर पर तैयार करना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *