राइस मिलों में लाखों कुंतल धान डंप:सरकारी केंद्रों पर खपाने-की तैयारी, भाकियू ने प्रशासन से जांच की मांग

राइस मिलों में लाखों कुंतल धान डंप:सरकारी केंद्रों पर खपाने-की तैयारी, भाकियू ने प्रशासन से जांच की मांग

शाहजहांपुर में जिले समेत बंडा क्षेत्र की राइस मिलों में लाखों कुंतल धान डंप होने और उसे सरकारी क्रय केंद्रों पर खपाने की तैयारी का आरोप लगाया गया है। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के बरेली मंडल अध्यक्ष मंजीत सिंह धालीवाल ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ज्ञापन में आशंका जताई गई है कि किसानों के पंजीकरण और खतौनी का इस्तेमाल कर मिलों में रखे धान की सरकारी केंद्रों पर तौल कराई जा सकती है। यूनियन ने स्टॉक से लेकर भुगतान तक के अभिलेखों की जांच कराने की मांग उठाई है। एडीएम व खरीद अधिकारी रजनीश मिश्रा ने बताया कि उनको शिकायत मिली है। इस प्रकरण की जांच एसडीएम और डिप्टी आरएमओ को दी गयी है।

ज्ञापन में मांग की गई है कि बंडा समेत जिले की सभी राइस मिलों में रखे धान का औचक भौतिक सत्यापन कराया जाए। मौके पर मौजूद धान की मात्रा का स्टॉक रजिस्टर और खरीद के अभिलेखों से मिलान हो। जांच में यह भी स्पष्ट किया जाए कि धान किससे खरीदा गया और खरीद के समर्थन में वैध दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं।

यूनियन ने आशंका जताई है कि यदि मिलों में रखे धान की तौल दूसरे किसानों के नाम पर दिखाई गई तो वास्तविक किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं। इसकी पुष्टि के लिए क्रय केंद्रों की तौल पर्चियों, किसान पंजीकरण, खतौनी और बैंक भुगतान के रिकॉर्ड का मिलान कराने की मांग की गई है। इससे सरकारी खरीद में दर्ज धान की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

ज्ञापन में धान की खरीद-बिक्री और परिवहन से संबंधित लागू नियमों के तहत 6-आर और 9-आर प्रपत्रों की जांच कराने पर जोर दिया गया है। यूनियन ने मंडी समिति, खाद्य एवं रसद विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम से मिलों और क्रय केंद्रों की जांच कराने की मांग की है।

धालीवाल ने कहा कि जांच में स्टॉक, खरीद अभिलेखों या सरकारी तौल में अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। सरकारी धन की हानि प्रमाणित होने पर वसूली भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने मांग की कि जांच केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित न रहे, बल्कि मौके पर मौजूद धान और संबंधित अभिलेखों का मिलान करके निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार की जाए।

बता दें कि पिछले साल शाहजहांपुर के भाजपा सांसद ने शासन में जिले हुई धान खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर शिकायत की थी। उन्होंने पत्र में भ्रष्टाचार से जुड़े तमाम बिंदुओं का उल्लेख किया था। शासन ने एक जांच कमेटी भी बनाई थी और सात दिन के अन्दर जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिये थे, लेकिन वह जांच टीम एक साल बीत जाने के बाद भी शाहजहांपुर नहीं आ पाई।

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