भोपाल मास्टर प्लान के नए ड्राफ्ट को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। किसानों का कहना है कि प्रस्तावित प्लान में 66 गांवों की कृषि भूमि को रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट, ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल करने से उनकी निजी जमीन, खेती और आजीविका प्रभावित हो सकती है। इसके विरोध में शुक्रवार को भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसान शाहपुरा स्थित टीएंडसीपी दफ्तर पहुंचकर आपत्तियां दर्ज कराएंगे। इससे पहले गुरुवार को नीलबड़ में किसानों ने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया था। किसानों ने मांग की है कि कृषि भूमि का भू-उपयोग बदलने से पहले उनकी समस्याओं और अधिकारों पर गंभीरता से विचार किया जाए। वहीं, मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में निर्माण संबंधी प्रावधानों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। किसानों का आरोप है कि आम लोगों के मकानों पर रोक के बीच कुछ प्रभावशाली लोगों के बंगलों और फार्म हाउस वाले क्षेत्रों में निर्माण की सीमा बढ़ाई जा रही है। दोपहर 12 बजे टीएंडसीपी दफ्तर पहुंचेंगे किसान भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष अखिलेश मीणा ने बताया कि किसान शुक्रवार दोपहर 12 बजे शाहपुरा स्थित टीएंडसीपी कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराएंगे। संघ का कहना है कि निजी भूमि, कृषि कार्य और किसानों के अधिकारों को प्रभावित करने वाले प्रावधान लागू करने से पहले उनकी वास्तविक स्थिति और आपत्तियों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। संयुक्त संचालक बोलीं- आपत्तियों पर सुनवाई के लिए बुलाएंगे टीएंडसीपी की संयुक्त संचालक इंदू त्रिपाठी ने बताया कि नियमानुसार 30 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। प्राप्त आपत्तियों को ऑनलाइन पोर्टल पर डिजिटाइज किया जाएगा। इसके बाद संबंधित पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। 1995 के मास्टर प्लान में कृषि भूमि थी, अब बदलाव पर आपत्ति किसानों के मुताबिक, वर्ष 1995 के मास्टर प्लान में संबंधित जमीनों का भू-उपयोग कृषि रखा गया था। पूर्व में निरस्त किए गए 2031 के मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में भी कृषि उपयोग का प्रावधान था। किसानों का कहना है कि नए ड्राफ्ट में बड़े तालाब के नजदीक स्थित कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव का प्रस्ताव है, जिससे खेती और जमीन के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि पूर्व में 2031 के मास्टर प्लान को लेकर उठी आपत्तियों के दौरान सरकार ने ड्राफ्ट तैयार करने में पंचायतों की सहमति लेने का आश्वासन दिया था। उनका आरोप है कि नए ड्राफ्ट में यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। रसूखदारों के इलाकों में निर्माण सीमा बढ़ाने पर सवाल मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में निर्माण को लेकर भी विरोधाभास का आरोप लगाया जा रहा है। आरोप है कि जिन इलाकों में आम लोगों के मकान हैं, वहां निर्माण पर रोक है और जमीनों की कीमतें लगभग स्थिर हैं। दूसरी ओर, एलडीआर में शामिल उन क्षेत्रों में निर्माण की अनुमति पांच गुना तक बढ़ाने का प्रावधान किया गया है, जहां प्रभावशाली लोगों के बंगले और फार्म हाउस हैं। आलोचकों का आरोप है कि इन क्षेत्रों में पहले से तय सीमा से अधिक निर्माण हो चुका है और नए ड्राफ्ट के प्रावधानों से उसे वैध करने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित प्रावधानों, मौजूदा निर्माण अनुमतियों और जमीन के रिकॉर्ड का मिलान जरूरी है। मेंडोरी में एक साल में गाइडलाइन ₹1 करोड़ से ₹3 करोड़ प्रति हेक्टेयर किसानों की आपत्तियों के बीच मेंडोरा, मेंडोरी, सेवनिया गौंड और केरवा वुड्स जैसे क्षेत्रों की जमीनों के भू-उपयोग और कलेक्टर गाइडलाइन में बदलाव भी चर्चा में हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, मेंडोरी गांव के केरवा वुड्स क्षेत्र में कृषि भूमि की गाइडलाइन वर्ष 2025-26 में ₹1 करोड़ प्रति हेक्टेयर थी, जो 2026-27 में बढ़कर ₹3 करोड़ प्रति हेक्टेयर हो गई। यह कलेक्टर गाइडलाइन में दर्ज सरकारी मूल्य का अंतर है। इससे वास्तविक बाजार मूल्य या जमीन की बिक्री कीमत में समान अनुपात से वृद्धि होना जरूरी नहीं है। कैचमेंट में 40 हजार मकान, करीब 3 लाख आबादी का सवाल उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कैचमेंट क्षेत्र में कृषि उपयोग वाली श्रेणी में करीब 40 हजार मकान हैं, जिनमें लगभग 3 लाख लोग रहते हैं। यह भोपाल की करीब 24 लाख आबादी का लगभग 12.5% है। दावा है कि मास्टर प्लान के प्रावधानों के अनुसार इन मकानों को अवैध माना जा सकता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि इन मकानों पर नियमों के तहत कार्रवाई की स्थिति बनती है, तो इतनी बड़ी आबादी के पुनर्वास का क्या विकल्प होगा। इस मुद्दे पर मास्टर प्लान के संबंधित प्रावधानों, मकानों की कानूनी स्थिति और प्रशासन की योजना को स्पष्ट करना जरूरी है। BIZ-1 और BIZ-2 जोन हटाने की मांग
किसान चाहते हैं कि उनकी कृषि भूमि का उपयोग खेती के लिए ही सुरक्षित रखा जाए। अनोखी सिंह पटेल के मुताबिक, किसानों के पास आजीविका का प्रमुख साधन खेती है। इसलिए उन्होंने भोजताल संरक्षण जोन-1 (BIZ-1) और जोन-2 (BIZ-2) को हटाने और कृषि भूमि का लैंडयूज कृषि ही रखने की मांग की है। किसान भविष्य को लेकर चिंतित किसानों का आरोप है कि मौजूदा ड्राफ्ट में बड़ा तालाब के आसपास की कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव का प्रस्ताव किया गया है। इसी वजह से किसान अपनी जमीन के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। ये खबर भी पढ़ें… भोपाल मास्टर प्लान-2047 को लेकर विरोध-प्रदर्शन भोपाल विकास योजना-2047 के नए ड्राफ्ट को लेकर गुरुवार को किसानों और स्थानीय रहवासियों ने विरोध जताते हुए आपत्तियां उठाईं। मुगालिया छाप के किसान कृषि भूमि को रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट, ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल किए जाने के विरोध में पैदल मार्च कर भोपाल पहुंचे। वहीं, मिसरोद के रहवासियों ने पुरानी आबादी के बीच से प्रस्तावित 45 मीटर चौड़ी सड़क को योजना से हटाने की मांग करते हुए नगर तथा ग्राम निवेश (टीएनसीपी) विभाग के समक्ष लिखित आपत्तियां सौंपीं।पूरी खबर पढ़ें

