Jayant Chaudhary बोले: तकनीक बदलेगी काम के साधन, लेकिन स्वतंत्र सोच और ईमानदारी रहेगी जरूरी

Jayant Chaudhary बोले: तकनीक बदलेगी काम के साधन, लेकिन स्वतंत्र सोच और ईमानदारी रहेगी जरूरी

केंद्रीय शिक्षा एवं कौशल विकास राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रौद्योगिकी काम करने के तरीकों एवं साधनों को बदलती रहेगी, लेकिन मनुष्य की स्वतंत्र सोच, निर्णय क्षमता और ईमानदारी का महत्व बना रहेगा। चौधरी ने भारतीय लागत लेखाकार संस्थान (आईसीएमएआई) के छात्र सम्मेलन को ऑनलाइन संबोधित करते हुए यह बात कही। इस सम्मेलन का विषय ‘विकसित भारत के लिए जेन-जी को तैयार करना’ था।

उन्होंने नए योग्य पेशेवरों से अपनी विशेषज्ञता बढ़ाने, जिज्ञासु बने रहने और स्थापित मान्यताओं पर सवाल उठाते रहने का आग्रह किया। चौधरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने हाल ही में चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाया है। यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत की स्थिति की पुष्टि करता है।

उन्होंने कहा, ‘‘अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ लागत दक्षता, संसाधनों का बेहतर उपयोग और टिकाऊ कारोबारी तौर-तरीके और महत्वपूर्ण हो जाएंगे।’’
वर्ष 1944 में स्थापित आईसीएमएआई के दुनिया भर में छह लाख से अधिक विद्यार्थी और एक लाख योग्य पेशेवर हैं। संस्थान की उत्तरी भारत क्षेत्रीय परिषद की तरफ से आयोजित सम्मेलन में 700 से अधिक सफल विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। चौधरी ने कहा कि आईसीएमएआई ने दशकों से भारत में लागत एवं प्रबंधन लेखांकन का पेशा विकसित करने में अहम भूमिका निभाई है।

इसका योगदान वित्तीय विश्लेषण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कारोबार क्षेत्रों को वित्तीय संरचना के बारे में बेहतर निर्णय लेने, दक्षता बढ़ाने और दीर्घकालिक मूल्य सृजित करने में भी मदद करता है। सम्मेलन में परिषद के अध्यक्ष मनीष कंडपाल ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है, जब युवाओं को कौशल से लैस कर रोजगार के योग्य बनाया जाए। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को कौशल विकास और उद्यमिता के माध्यम से देश के विकास में लगाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

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