देश के लिए 69 अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वाले छत्तीसगढ़ के पैरा आर्म रेसलर श्रीमंत झा ने जर्मनी में एक रजत और एक कांस्य पदक जीतकर फिर भारत का नाम रोशन किया है। 16 से 19 अक्टूबर तक हुई प्रतियोगिता में उन्होंने 85 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन किया। श्रीमंत ने अपनी इस कामयाबी को देश के शहीद जवानों को समर्पित किया है। इस जीत के साथ उनके नाम अब भारत के लिए कुल 69 अंतरराष्ट्रीय पदक हो गए हैं। जर्मनी में हुई इस प्रतियोगिता में दुनिया के कई मजबूत खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। श्रीमंत झा ने कड़े मुकाबलों में अपनी ताकत और खेल कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने जर्मनी के खिलाड़ी एरिक होप को हराकर भी अपनी मजबूत दावेदारी पेश की। श्रीमंत कई साल से सरकारी नौकरी और शहीद राजीव पांडे खेल पुरस्कार के लिए प्रयास कर रहे हैं। अगस्त में उन्होंने यहां तक कहा था कि यदि इस बार भी नौकरी और सम्मान नहीं मिला तो वे अपने पदक सरकार को सौंपकर नीलाम करने की मांग करेंगे। मई 2018 में भी उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार से नौकरी देने की मांग की थी। उस समय उनके पास विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में पांच पदक थे। उन्होंने कहा था कि सरकारी नौकरी मिलने से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और वे खेल पर पूरा ध्यान दे सकेंगे। इसके बावजूद उन्हें लंबे समय तक निजी कंपनी में काम करके परिवार का खर्च उठाना पड़ा। कई साल से खेल पुरस्कार के लिए आवेदन
श्रीमंत के मुताबिक वे पिछले पांच से छह साल से शहीद राजीव पांडे खेल पुरस्कार के लिए आवेदन कर रहे हैं। उन्होंने खेल विभाग के अधिकारियों और मुख्यमंत्री कार्यालय तक अपनी बात पहुंचाई, लेकिन उन्हें पुरस्कार नहीं मिला। अगस्त 2024 में भी उन्होंने इस मामले को उठाया था। उस समय तक उनके नाम 48 अंतरराष्ट्रीय पदक थे। पुरस्कार नहीं मिलने के पीछे पैरा आर्म रेसलिंग को सरकारी खेल व्यवस्था में मान्यता से जुड़ी समस्या भी सामने आई थी। खेल विभाग के एक पूर्व अधिकारी के मुताबिक, संबंधित खेल संगठन को केंद्र सरकार से मान्यता मिलने के बाद ही खिलाड़ियों की पात्रता पर विचार किया जा सकता है। मां ने गिरवी रखा मंगलसूत्र, पिता ने की मजदूरी
श्रीमंत की इस सफलता के पीछे परिवार का लंबा संघर्ष भी है। बेटे को प्रतियोगिताओं में भेजने के लिए उनकी मां ने अपना मंगलसूत्र तक गिरवी रखा। पिता ने मजदूरी करके पढ़ाई, खानपान, अभ्यास और विदेश में खेलने का खर्च उठाया। परिवार को उम्मीद थी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद सरकारी नौकरी मिलेगी और आर्थिक स्थिति सुधरेगी। पदक नीलाम करने की कही थी बात
15 अगस्त 2026 को दुर्ग में सम्मानित होने के बाद श्रीमंत ने कहा था कि अगर उन्हें सरकारी नौकरी और शहीद राजीव पांडे पुरस्कार नहीं मिला, तो वे अपने 67 अंतरराष्ट्रीय पदक सरकार को सौंपकर नीलाम कराने की मांग करेंगे। उनका कहना था कि इससे मिलने वाली राशि से वे माता-पिता का कर्ज चुकाकर छोटा कारोबार शुरू करना चाहते हैं। उन्होंने खेल छोड़ने की बात भी कही थी। अब जर्मनी में दो और पदक जीतने के बाद उनके कुल अंतरराष्ट्रीय पदकों की संख्या 69 हो गई है। उन्होंने अपनी ताजा उपलब्धि शहीद जवानों को समर्पित की है।

