साहिबगंज में सड़क नहीं, तो खाट बनी एंबुलेस:गर्भवती को 4km तक कीचड़ भरे रास्ते से ले गए ग्रामीण, 108 एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंची

साहिबगंज में सड़क नहीं, तो खाट बनी एंबुलेस:गर्भवती को 4km तक कीचड़ भरे रास्ते से ले गए ग्रामीण, 108 एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंची

आजादी के वर्षों बाद भी ग्रामीण इलाकों में सड़क की समस्या लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है। इसकी एक तस्वीर साहिबगंज के बोरियो प्रखंड के मोतीपहाड़ी बड़ा पंचायत के पोड़ैया बेड़ो गांव में सामने आई। यहां प्रसव पीड़ा से कराह रही गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को खाट का सहारा लेना पड़ा। गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण 108 एंबुलेंस महिला के पास नहीं पहुंच सकी। इसके बाद ग्रामीणों ने महिला को खाट पर लिटाया और करीब चार किलोमीटर तक कीचड़ भरे रास्ते से पैदल लेकर गए। काफी मशक्कत के बाद महिला को गांव से बाहर पहुंचाया गया। वहां से टोटो की मदद से उसे बोरियो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। इस घटना ने गांव में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खाट पर लिटाकर चार किलोमीटर तक पैदल चले ग्रामीण जानकारी के अनुसार, पोड़ैया बेड़ो गांव निवासी बुधना पहाड़िया की 19 वर्षीय पत्नी सुकुरमुनी पहाड़िन को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इसके बाद परिजनों ने 108 एंबुलेंस को सूचना दी। परिवार को उम्मीद थी कि एंबुलेंस पहुंचने से महिला को समय पर अस्पताल ले जाया जा सकेगा। लेकिन गांव तक पक्की सड़क नहीं होने और रास्ते में कीचड़ भरा होने के कारण एंबुलेंस वहां तक नहीं पहुंच सकी। ऐसे में परिजनों की चिंता बढ़ गई। इसके बाद ग्रामीणों ने मिलकर महिला को खाट पर लिटाया। उसे कंधों पर उठाकर करीब चार किलोमीटर तक पैदल ले गए। रास्ता कीचड़ भरा था और आवागमन आसान नहीं था। इसके बावजूद ग्रामीण महिला को लेकर पोड़ैया संथाली गांव पहुंचे। वहां से टोटो की मदद ली गई। इसके बाद गर्भवती महिला को बोरियो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां उसे भर्ती कराया गया। कई बार आवेदन और आंदोलन, फिर भी नहीं बनी सड़क ग्राम प्रधान चांदू मालतो ने बताया कि गांव तक सड़क निर्माण कराने के लिए कई बार आवेदन दिया गया है। ग्रामीणों ने इस मांग को लेकर आंदोलन भी किया। इसके बावजूद अब तक सड़क की समस्या का समाधान नहीं हुआ है। बरसात के दिनों में गांव के रास्ते कीचड़ से भर जाते हैं। इससे लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है। सामान्य दिनों में भी आवागमन मुश्किल रहता है। वहीं, किसी के बीमार पड़ने या आपातकालीन स्थिति में परेशानी और बढ़ जाती है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को खुद व्यवस्था करनी पड़ती है। गर्भवती महिला को खाट पर उठाकर ले जाने की घटना ने इस समस्या को फिर उजागर कर दिया है। सड़क के अभाव में इलाज तक पहुंचना चुनौती ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं है, बल्कि आपात स्थिति में लोगों को समय पर इलाज दिलाने के लिए भी जरूरी है। पक्की सड़क नहीं होने से एंबुलेंस जैसी जरूरी सेवाओं का लाभ भी समय पर नहीं मिल पाता। पोड़ैया बेड़ो गांव की घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को सामने ला दिया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गांव तक जल्द पक्की सड़क बनवाने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क बनने से लोगों को आवागमन में राहत मिलेगी। साथ ही, मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में होने वाली परेशानी भी कम होगी। अब ग्रामीणों को प्रशासन की पहल का इंतजार है।

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