विजयादशमी पर मंगलवार को वृंदावन कॉलोनी में क्षत्रिय समाज ने शस्त्र पूजन के साथ कुलदेवी की उपासना की। सेक्टर-20A स्थित सीएनजी पंप के पास हुए कार्यक्रम में पारंपरिक क्षत्रिय समाज के लोग सफेद वस्त्रों में शामिल हुए। लाइसेंसी शस्त्र रखने वाले लोग उन्हें साथ लेकर पहुंचे और विधिवत पूजन किया। कार्यक्रम में शस्त्र पूजन के साथ कुल परंपराओं और क्षात्र धर्म के दायित्वों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि क्षात्र धर्म सिर्फ शस्त्र धारण करने तक सीमित नहीं है। समाज, धर्म और पृथ्वी की रक्षा करना भी इसका महत्वपूर्ण दायित्व है। अपराजिता के प्राकट्य दिवस की मान्यता आयोजकों ने बताया कि आश्विन शुक्ल दशमी को विजयादशमी के साथ देवी भगवती अपराजिता के प्राकट्य दिवस के रूप में भी माना जाता है। इसी मान्यता और सनातन परंपरा के तहत कार्यक्रम में शस्त्र पूजन और कुलदेवी की उपासना की गई। कार्यक्रम में शामिल लोगों से अपने कुल का परिचय रखने की अपेक्षा की गई। आयोजकों के अनुसार आयोजन में पारंपरिक क्षत्रिय समाज के लोगों को ही आमंत्रित किया गया था। युवाओं को परंपराओं से जोड़ने पर चर्चा मुख्य वक्ता शांकरपथानुगामी रामबाबू पाण्डेय ने क्षात्र धर्म, सनातन परंपरा और कर्तव्यबोध पर विचार रखे। उन्होंने परंपराओं के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों को समझने पर जोर दिया। मुख्य अतिथि शेर बहादुर सिंह (शेरा भैय्या) ने कहा कि विजयादशमी केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व नहीं है। यह अपनी परंपराओं, कर्तव्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों को याद करने का अवसर भी है। इसी उद्देश्य से शस्त्र पूजन, कुलदेवी की उपासना और क्षात्र धर्म परिचय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के आयोजक मुख्य सुरेश प्रताप सिंह रहे। व्यवस्था और संचालन में सूरज सिंह की प्रमुख भूमिका रही। इस मौके पर युवराज सिंह, सूरज सिंह और संदीप सिंह समेत समाज के अन्य लोग शामिल हुए।

