भाजपा ने भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के नए राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची जारी कर दी है। इसमें यूपी से हर्षवर्धन सिंह को युवा मोर्चा का नया राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है, जबकि निखिल मणि तिवारी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और विनीत वत्स त्यागी को कोषाध्यक्ष की कमान दी गई है। यूपी के तीनों नेताओं को क्यों मिली जिम्मेदारी 1. हर्षवर्धन सिंह (राष्ट्रीय महामंत्री): अयोध्या के रहने वाले हर्षवर्धन सिंह संगठन के पुराने और अनुभवी कार्यकर्ता हैं। इससे पहले वे उत्तर प्रदेश युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। हर्षवर्धन यूपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पद की रेस में भी प्रमुख दावेदार माने जा रहे थे। राजनीतिक गलियारों में उन्हें भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल का काफी करीबी माना जाता है। 2. निखिल मणि तिवारी (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष): अवध क्षेत्र से आने वाले निखिल मणि तिवारी इससे पहले अवध युवा मोर्चा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। हर्षवर्धन की तरह निखिल भी यूपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पद के मजबूत दावेदारों में शामिल थे। संगठन के लिहाज से वे भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी के करीबी माने जाते हैं। 3. विनीत वत्स त्यागी (कोषाध्यक्ष): पश्चिम उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले विनीत वत्स त्यागी को संगठन में भरोसा जताते हुए प्रदेश टीम में कोषाध्यक्ष के पद की बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। मिशन 2027 के लिहाज से युवाओं की बड़ी भूमिका उत्तर प्रदेश में आने वाले राजनीतिक समीकरणों और सांगठनिक विस्तार को ध्यान में रखते हुए युवा मोर्चा की इस नई टीम को बेहद अहम माना जा रहा है। अनुभवी और जमीन से जुड़े युवा नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट करके भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अयोध्या, अवध और पश्चिमी यूपी तीनों प्रमुख क्षेत्रों को राष्ट्रीय टीम में संतुलन देते हुए जगह दी गई है, ताकि आगामी चुनावों में युवा मतदाताओं के बीच पैठ और मजबूत की जा सके। ————– ये भी पढ़ें- आजमगढ़- एक घर में 14 ‘विकास यादव’, इनमें 7 महिलाएं:गोरखपुर में 6 ‘अनुराग’; सॉफ्टवेयर नहीं पकड़ पाया, SIR के बाद भी खामियां
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 15 अक्टूबर को ‘समाजवादी ECI ऑडिट-1’ नाम से एक रिपोर्ट जारी की। दावा किया- एक विधानसभा सीट पर एक ही व्यक्ति का नाम 10 बार है। सबूत के तौर पर आजमगढ़, लखनऊ और गोरखपुर के उदाहरण दिए। इस पर चुनाव आयोग ने कहा- जांच कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ने इस दावे का सच जानने के लिए पड़ताल की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

