Teeth Braces: क्या आप भी सोचते हैं कि खाना चबाते समय आपके दांत आपस में टकराते हैं? अगर हां, तो टेढ़े-मेढ़े दांत सिर्फ दिखने में खराब नहीं लगते, बल्कि इनकी ठीक से सफाई नहीं होना, खाना चबाने में दिक्कत और जबड़े में दर्द की परेशानियां भी हो सकती हैं। जैसा कि आपको भी पता होगा दांतों को सही जगह पर लाने के लिए ब्रेसेज (Braces) सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है। आपके घर में कोई ब्रेसेज लगवाने की तैयारी कर रहा है, तो डॉक्टर के पास जाने से पहले यह जान लेना बहुत काम आएगा कि यह कैसे काम करते हैं और इसके लिए क्या-क्या तैयारी रखनी पड़ती है और ब्रेसेज लगवाने से पहले आपको इससे जुड़ी ये बातें जानना बहुत जरुरी है।
ब्रेसेज कैसे काम करते हैं?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, ब्रेसेज का मुख्य काम दांतों और जबड़े की हड्डी पर लगातार हल्का दबाव (Continuous Mild Pressure) बनाना होता है। जब यह दबाव लंबे समय तक बना रहता है, तो दांतों के आसपास की हड्डी धीरे-धीरे री-शेप (Reshape) होने लगती है और दांत अपनी सही जगह पर खिसकने लगते हैं। ब्रेसेज के मुख्य भाग इस प्रकार काम करते हैं;
- ब्रैकेट्स (Brackets)- ये छोटे-छोटे मेटल या सिरेमिक के ब्लॉक होते हैं जो दांतों की सतह पर चिपकाए जाते हैं।
- आर्चवायर (Archwire)- यह एक पतली धातु की तार होती है जो सभी ब्रैकेट्स के बीच से गुजरती है। यही तार दांतों पर दबाव बनाने का मुख्य काम करती है।
- इलास्टिक बैंड्स (Elastic Bands)- ये रंगीन या पारदर्शी रबर बैंड होते हैं जो तार को ब्रैकेट से जोड़कर रखते हैं और जबड़े की बाइट (Bite) को ठीक करने में मदद करते हैं।
ब्रेसेज लगवाने से पहले 5 जरूरी बातें
1. ओरल हाइजीन और दांतों की सफाई पहली शर्त है
अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ ऑर्थोडॉन्टिक्स के मुताबिक, ब्रेसेज लगाने से पहले आपके दांतों और मसूड़ों का पूरी तरह स्वस्थ होना जरूरी है। अगर आपके दांतों में कैविटी (कैविटी/कीड़ा) है या मसूड़ों में सूजन है, तो ऑर्थोडॉन्टिस्ट पहले उनका इलाज करेंगे। ब्रेसेज लगने के बाद दांतों के बीच खाना फंसने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए प्लॉक या टारटर हटाना प्राथमिक कदम होता है।
2. शुरुआती दिनों में हल्का दर्द और परेशानी होना सामान्य है
ब्रेसेज लगने के तुरंत बाद दर्द नहीं होता, लेकिन अगले कुछ दिनों तक दांतों में संवेदनशीलता और हल्का खिंचाव महसूस हो सकता है। ब्रैकेट्स की वजह से गालों के अंदरूनी हिस्से में छाले या खरोंच आ सकती है। इसके लिए डॉक्टर ‘ऑर्थोडॉन्टिक वैक्स’ (Orthodontic Wax) देते हैं जिसे ब्रैकेट पर लगाने से राहत मिलती है।
3. खाने-पीने की आदतों में बदलाव करना होगा
ब्रेसेज के दौरान आपको अपनी डाइट में थोड़े बदलाव करने पड़ेंगे;
क्या न खाएं- कड़क चीज़ें (जैसे गाजर, सेब को सीधे काटना, चबाने वाली टॉफी, च्युइंग गम या नट्स) से बचें, क्योंकि इनसे तार या ब्रैकेट्स टूट सकते हैं।
क्या खाएं- नरम खाना जैसे खिचड़ी, दलिया, सूप, उबले हुए आलू और दही शुरुआती हफ्तों में सबसे बेहतर रहते हैं।
इलाज में समय लगता है
ब्रेसेज कोई एक दिन का जादू नहीं हैं। औसतन, ब्रेसेज का इलाज 12 से 24 महीने (1 से 2 साल) तक चलता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके दांत कितने टेढ़े-मेढ़े हैं। इसके अलावा, आपको हर 4 से 6 हफ्ते में डॉक्टर के पास ‘वायर टाइट’ (तार कसवाने) के लिए जाना पड़ता है।
ब्रेसेज हटने के बाद रिटेनर लगाना अनिवार्य है
कई लोग सोचते हैं कि ब्रेसेज हटते ही काम खत्म हो गया, लेकिन ऐसा नहीं है। ब्रेसेज हटने के बाद दांत अपनी पुरानी जगह पर वापस खिसकने की कोशिश करते हैं। इसे रोकने के लिए डॉक्टर आपको रिटेनर (Retainer) देते हैं, जिसे कुछ महीनों या सालों तक पहनना जरूरी होता है ताकि नए अलाइनमेंट को स्थिर रखा जा सके।
डॉक्टर से तुरंत कब संपर्क करें?
हालांकि ब्रेसेज लगवाने के बाद हल्का दर्द सामान्य है, लेकिन कुछ स्थितियों में आपको तुरंत अपने ऑर्थोडॉन्टिस्ट से संपर्क करना चाहिए;
- तार का गाल या मसूड़े में छुपना/चुभना
- अत्यधिक दर्द या मसूड़ों से खून आना।
- ब्रैकेट का ढीला होकर निकल जाना।

