चित्रकूट के रैपुरा गांव में दशहरे पर रावण का पुतला नहीं जलाया जाता, बल्कि उसकी पूजा की जाती है। करीब 250 साल पुरानी इस परंपरा में गांव के लोग शुभ काम से पहले रावण की विशाल प्रतिमा के सामने आशीर्वाद लेते हैं। ग्रामीण रावण को महान विद्वान, शिवभक्त और चारों वेदों व छह शास्त्रों का ज्ञाता मानते हैं। उनका मानना है कि रावण ने राम से युद्ध कराकर राक्षस कुल को भगवान राम के हाथों मुक्ति दिलाई थी। गांव के प्रधान जगदीश पटेल के अनुसार, दशहरे पर रामलीला में रावण का वध होता है, दहन नहीं। वे खुद भी शुभ कार्य से पहले रावण की पूजा करते हैं। ग्रामीण दावा करते हैं कि रावण के आशीर्वाद से गांव के कई लोग IAS, PCS समेत सरकारी सेवाओं में पहुंचे हैं। यह अनूठी परंपरा गांव को अलग पहचान देती है।

