Asian Para Games में भारत का दबदबा, Nishad Kumar ने रिकॉर्ड के साथ जीता दूसरा गोल्ड

Asian Para Games में भारत का दबदबा, Nishad Kumar ने रिकॉर्ड के साथ जीता दूसरा गोल्ड

भारतीय पैरा ट्रैक एंड फील्ड एथलीटों ने मंगलवार को यहां एशियाई पैरा खेलों में पांच स्वर्ण सहित 14 पदक अपने नाम किए, जिसमें निषाद कुमार एक ही संस्करण में दो स्वर्ण पदक जीतने वाले देश के तीसरे खिलाड़ी बन गए। मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारत ने पांच स्वर्ण, चार रजत और पांच कांस्य पदक अपने नाम किए, जिससे पैरा एथलेटिक्स में उसके पदकों की संख्या 20 हो गई। वह चीन के 23 पदक (13 स्वर्ण, पांच रजत, पांच कांस्य) के बाद दूसरे स्थान पर है।निषाद ने सोमवार को लंबी कूद टी47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने ऊंची कूद में 2.04 मीटर से अधिक की दूरी तय करके खेलों का नया रिकॉर्ड बनाकर स्वर्ण पदक जीता। अंकुर धामा (पुरुषों की 5000 मीटर टी11 और 1500 मीटर टी11) और भुजाहीन तीरंदाज शीतल देवी (महिलाओं की व्यक्तिगत कंपाउंड ओपन और मिश्रित टीम कंपाउंड ओपन) ने चीन के हांगझोउ में पिछले एशियाई पैरा खेलो में दो-दो स्वर्ण पदक जीते थे।टी47 श्रेणी ऊपरी अंगों की अक्षमता वाले एथलीटों के लिए है। निषाद का दाहिना हाथ उस समय कट गया था जब वह महज छह साल के थे। दीप्ति जीवनजी ने एशियाई पैरा खेलों के रिकॉर्ड के साथ महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में 56 . 36 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता।तेलंगाना की 23 वर्ष की दीप्ति दो बार पैरा विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीत चुकी है और 2024 में स्वर्ण जीता था। उन्होंने पैरालम्पिक में भी इसी स्पर्धा में कांस्य पदक जीता है। जापान की नीना कान्नो ने 58 . 92 सेकंड का समय निकालकर रजत और अकाने कातो ने एक मिनट 00.26 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक जीता।टी20 श्रेणी में बौद्धिक अक्षमता वाले खिलाड़ी भाग लेते हैं जिन्हें सूचना समझने, एकाग्रता बनाने और तकनीकी रणनीति पर अमल करने में दिक्कत होती है। भारतीय खिलाड़ियों ने पुरुषों की चक्का फेंक एफ44/64 स्पर्धा में तीनों पदक अपने नाम किए, जिसमें देवेंद्र कुमार ने स्वर्ण पदक जीता। इस स्पर्धा में केवल चार खिलाड़ियों ने भाग लिया था।देवेंद्र ने 49.71 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि राकेश और प्रदीप कुमार ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक हासिल किए। एफ44 और एफ64 में वह खिलाड़ी आते हैं जिनके निचले हिस्से के अंगों में विकार हो। अनुभवी फर्राटा धाविका सिमरन ने नये रिकॉर्ड के साथ महिलाओं की 200 मीटर टी12 स्पर्धा में पहला स्वर्ण पदक जीता जबकि हमवतन तेजलबेन दामोर ने कांस्य पदक हासिल किया।सिमरन ने 24 . 80 सेकंड का समय निकाला और ईरान की हजर सफरजादेह को पछाड़ा जिन्होंने 25 . 02 सेकंड का समय लिया। पहली बार इन खेलों में उतरी तेजलबेन ने 25 . 23 सेकंड का समय निकालकर तीसरा स्थान हासिल किया। सिमरन ने स्वर्ण जीतने के बाद कहा ,‘‘ एशियाई रिकॉर्ड (24.46 सेकंड) भी मेरे नाम है और मेरा लक्ष्य वहां तक पहुंचना था लेकिन शरीर ने साथ नहीं दिया।मुझे जकड़न लग रही थी क्योंकि रिकवरी अच्छी नहीं थी। अपनी हीट रेस के बाद मैं काफी थक गई थी।’’
अब वह 100 मीटर में उतरेंगी जिसमें पिछले खेलों में रजत पदक जीता था। तेजलबेन 400 मीटर में भाग लेंगी।प्रणव सूरमा ने एशियाई पैरा रिकॉर्ड के साथ पुरूषों की चक्का फेंक एफ51/52/53 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता जबकि राम रतन सिंह को रजत पदक मिला। 32 वर्ष के सूरमा ने चीन में पिछले एशियाई पैरा खेलों में क्लब थ्रो एफ51 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने चौथे प्रयास में 11 . 66 मीटर थ्रो फेंककर नये एशियाई रिकॉर्ड के साथ पहला स्थान हासिल किया।31 वर्ष के सिंह ने दूसरे प्रयास में 10 . 35 मीटर का थ्रो फेंककर रजत पदक जीता। ईरान के अलीरजा हेमामी को कांस्य पदक मिला। प्रदीप कुमार ने पुरूषों की भालाफेंक स्पर्धा में एफ53/54 श्रेणी में लगातार दूसरा रजत पदक जीता जबकि आयुष वर्मा ने कांस्य पदक हासिल किया।प्रदीप ने एफ54 में 27 . 45 मीटर का सर्वश्रेष्ठ निजी प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। आयुष ने एफ53 वर्ग में कांस्य पदक जीता। वह थाईलैंड के सहर दाम याएना से आगे रहे जिन्होंने एफ54 वर्ग में 23 . 13 मीटर का थ्रो फेंका लेकिन शारीरिक अक्षमता का स्तर अधिक होने से आयुष को अधिक रजा अंक मिले।रजा अंक एक ऐसी पद्धति है जिसके जरिये जब किसी प्रतियोगिता में अलग-अलग वर्गीकरणों को एक ही स्पर्धा में शामिल किया जाता है तो विकलांगता के स्तर को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शन को अंकों में बदला जाता है। ईरान के इरफान बंदोरी को 30 . 24 मीटर के रिकॉर्ड के साथ फिर स्वर्ण पदक मिला। प्रवीण कुमार ने पुरूषों के शॉटपुट एफ11 वर्ग में सर्वश्रेष्ठ निजी प्रदर्शन के साथ कांस्य पदक जीता।19 वर्ष के प्रवीण ने 13 . 86 मीटर का थ्रो फेंककर छह खिलाड़ियों में दूसरा स्थान हासिल किया। ईरान के आमिर हुसैन अलीपोर ने एशियाई रिकॉर्ड के साथ 14 . 99 मीटर का थ्रो फेंककर स्वर्ण पदक जीता जबकि उनके हमवतन माहदी ओलाद को रजत पदक मिला। एफ11 वर्ग में लगभग पूर्ण दृष्टिबाधित खिलाड़ी भाग लेते हैं। 

भारतीय पैरा ट्रैक एंड फील्ड एथलीटों ने मंगलवार को यहां एशियाई पैरा खेलों में पांच स्वर्ण सहित 14 पदक अपने नाम किए, जिसमें निषाद कुमार एक ही संस्करण में दो स्वर्ण पदक जीतने वाले देश के तीसरे खिलाड़ी बन गए। मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारत ने पांच स्वर्ण, चार रजत और पांच कांस्य पदक अपने नाम किए, जिससे पैरा एथलेटिक्स में उसके पदकों की संख्या 20 हो गई। वह चीन के 23 पदक (13 स्वर्ण, पांच रजत, पांच कांस्य) के बाद दूसरे स्थान पर है।

निषाद ने सोमवार को लंबी कूद टी47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने ऊंची कूद में 2.04 मीटर से अधिक की दूरी तय करके खेलों का नया रिकॉर्ड बनाकर स्वर्ण पदक जीता। अंकुर धामा (पुरुषों की 5000 मीटर टी11 और 1500 मीटर टी11) और भुजाहीन तीरंदाज शीतल देवी (महिलाओं की व्यक्तिगत कंपाउंड ओपन और मिश्रित टीम कंपाउंड ओपन) ने चीन के हांगझोउ में पिछले एशियाई पैरा खेलो में दो-दो स्वर्ण पदक जीते थे।

टी47 श्रेणी ऊपरी अंगों की अक्षमता वाले एथलीटों के लिए है। निषाद का दाहिना हाथ उस समय कट गया था जब वह महज छह साल के थे। दीप्ति जीवनजी ने एशियाई पैरा खेलों के रिकॉर्ड के साथ महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में 56 . 36 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता।

तेलंगाना की 23 वर्ष की दीप्ति दो बार पैरा विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीत चुकी है और 2024 में स्वर्ण जीता था। उन्होंने पैरालम्पिक में भी इसी स्पर्धा में कांस्य पदक जीता है। जापान की नीना कान्नो ने 58 . 92 सेकंड का समय निकालकर रजत और अकाने कातो ने एक मिनट 00.26 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक जीता।

टी20 श्रेणी में बौद्धिक अक्षमता वाले खिलाड़ी भाग लेते हैं जिन्हें सूचना समझने, एकाग्रता बनाने और तकनीकी रणनीति पर अमल करने में दिक्कत होती है। भारतीय खिलाड़ियों ने पुरुषों की चक्का फेंक एफ44/64 स्पर्धा में तीनों पदक अपने नाम किए, जिसमें देवेंद्र कुमार ने स्वर्ण पदक जीता। इस स्पर्धा में केवल चार खिलाड़ियों ने भाग लिया था।

देवेंद्र ने 49.71 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि राकेश और प्रदीप कुमार ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक हासिल किए। एफ44 और एफ64 में वह खिलाड़ी आते हैं जिनके निचले हिस्से के अंगों में विकार हो। अनुभवी फर्राटा धाविका सिमरन ने नये रिकॉर्ड के साथ महिलाओं की 200 मीटर टी12 स्पर्धा में पहला स्वर्ण पदक जीता जबकि हमवतन तेजलबेन दामोर ने कांस्य पदक हासिल किया।

सिमरन ने 24 . 80 सेकंड का समय निकाला और ईरान की हजर सफरजादेह को पछाड़ा जिन्होंने 25 . 02 सेकंड का समय लिया। पहली बार इन खेलों में उतरी तेजलबेन ने 25 . 23 सेकंड का समय निकालकर तीसरा स्थान हासिल किया। सिमरन ने स्वर्ण जीतने के बाद कहा ,‘‘ एशियाई रिकॉर्ड (24.46 सेकंड) भी मेरे नाम है और मेरा लक्ष्य वहां तक पहुंचना था लेकिन शरीर ने साथ नहीं दिया।

मुझे जकड़न लग रही थी क्योंकि रिकवरी अच्छी नहीं थी। अपनी हीट रेस के बाद मैं काफी थक गई थी।’’
अब वह 100 मीटर में उतरेंगी जिसमें पिछले खेलों में रजत पदक जीता था। तेजलबेन 400 मीटर में भाग लेंगी।

प्रणव सूरमा ने एशियाई पैरा रिकॉर्ड के साथ पुरूषों की चक्का फेंक एफ51/52/53 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता जबकि राम रतन सिंह को रजत पदक मिला। 32 वर्ष के सूरमा ने चीन में पिछले एशियाई पैरा खेलों में क्लब थ्रो एफ51 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने चौथे प्रयास में 11 . 66 मीटर थ्रो फेंककर नये एशियाई रिकॉर्ड के साथ पहला स्थान हासिल किया।

31 वर्ष के सिंह ने दूसरे प्रयास में 10 . 35 मीटर का थ्रो फेंककर रजत पदक जीता। ईरान के अलीरजा हेमामी को कांस्य पदक मिला। प्रदीप कुमार ने पुरूषों की भालाफेंक स्पर्धा में एफ53/54 श्रेणी में लगातार दूसरा रजत पदक जीता जबकि आयुष वर्मा ने कांस्य पदक हासिल किया।

प्रदीप ने एफ54 में 27 . 45 मीटर का सर्वश्रेष्ठ निजी प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। आयुष ने एफ53 वर्ग में कांस्य पदक जीता। वह थाईलैंड के सहर दाम याएना से आगे रहे जिन्होंने एफ54 वर्ग में 23 . 13 मीटर का थ्रो फेंका लेकिन शारीरिक अक्षमता का स्तर अधिक होने से आयुष को अधिक रजा अंक मिले।

रजा अंक एक ऐसी पद्धति है जिसके जरिये जब किसी प्रतियोगिता में अलग-अलग वर्गीकरणों को एक ही स्पर्धा में शामिल किया जाता है तो विकलांगता के स्तर को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शन को अंकों में बदला जाता है। ईरान के इरफान बंदोरी को 30 . 24 मीटर के रिकॉर्ड के साथ फिर स्वर्ण पदक मिला। प्रवीण कुमार ने पुरूषों के शॉटपुट एफ11 वर्ग में सर्वश्रेष्ठ निजी प्रदर्शन के साथ कांस्य पदक जीता।

19 वर्ष के प्रवीण ने 13 . 86 मीटर का थ्रो फेंककर छह खिलाड़ियों में दूसरा स्थान हासिल किया। ईरान के आमिर हुसैन अलीपोर ने एशियाई रिकॉर्ड के साथ 14 . 99 मीटर का थ्रो फेंककर स्वर्ण पदक जीता जबकि उनके हमवतन माहदी ओलाद को रजत पदक मिला। एफ11 वर्ग में लगभग पूर्ण दृष्टिबाधित खिलाड़ी भाग लेते हैं।

​Hindi News – News in Hindi – Latest News in Hindi | Prabhasakshi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *