सीवान में दुर्गा पूजा मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए जारी यातायात आदेशों का असर शहर की सड़कों पर नजर नहीं आ रहा है। सदर एसडीओ आशुतोष गुप्ता के 17 से 22 अक्टूबर तक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध संबंधी आदेश और एसपी भारत सोनी के दोपहर 2 बजे से रात 2 बजे तक के डायवर्जन प्लान के बावजूद शहर में जाम की स्थिति बनी हुई है। सड़कों पर महिला, पुरुष और बच्चों की भारी भीड़ के बीच चारपहिया वाहन और टोटो रिक्शा चलते दिख रहे हैं। कई बार वाहन श्रद्धालुओं के बेहद करीब पहुंच जाते हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है। सोमवार रात हॉस्पिटल मोड़ पर जाम की स्थिति के बीच प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठे। इसी दौरान शहर के पी देवी मोड़ के पास आग लगने की घटना भी सामने आई। ऐसे समय में यातायात सुचारु रखने और आपात स्थिति में रास्ता उपलब्ध कराने की जरूरत थी। लेकिन सामने आई तस्वीरों के अनुसार, एसडीओ आशुतोष गुप्ता और डीडीसी अमिताभ सिंह एक पूजा पंडाल में आरती में शामिल थे। दोनों अधिकारियों की सरकारी गाड़ियां सड़क पर खड़ी थीं। बताया जा रहा है कि अधिकारी करीब 20 मिनट तक आरती में शामिल रहे। इस दौरान हॉस्पिटल मोड़ पर जाम लगा रहा और श्रद्धालु व आम लोग परेशान होते रहे। आरती के बाद अधिकारियों की गाड़ियां वीआईपी लाइट जलाते हुए वहां से निकलीं, जिसके बाद यातायात सामान्य होने लगा। आदेश जारी, लेकिन सड़कों पर नहीं दिखा असर दुर्गा पूजा मेले में भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने और रूट डायवर्जन की व्यवस्था की है। इसके बावजूद सड़कों पर वाहनों का परिचालन जारी रहने से श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है। भीड़ के बीच वाहनों की आवाजाही से भगदड़ या सड़क हादसे जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा भी बना रहता है। आपात स्थिति में रास्ता उपलब्ध कराना जरूरी दुर्गा पूजा जैसे बड़े आयोजन के दौरान यातायात नियंत्रित रखना, श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आग जैसी आपात स्थिति में राहत-बचाव के लिए रास्ता खाली रखना प्रशासन की अहम जिम्मेदारी है। ऐसे में जाम के बीच सरकारी गाड़ियों के सड़क पर खड़े रहने की तस्वीरों ने यातायात प्रबंधन और अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। सीवान में दुर्गा पूजा मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए जारी यातायात आदेशों का असर शहर की सड़कों पर नजर नहीं आ रहा है। सदर एसडीओ आशुतोष गुप्ता के 17 से 22 अक्टूबर तक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध संबंधी आदेश और एसपी भारत सोनी के दोपहर 2 बजे से रात 2 बजे तक के डायवर्जन प्लान के बावजूद शहर में जाम की स्थिति बनी हुई है। सड़कों पर महिला, पुरुष और बच्चों की भारी भीड़ के बीच चारपहिया वाहन और टोटो रिक्शा चलते दिख रहे हैं। कई बार वाहन श्रद्धालुओं के बेहद करीब पहुंच जाते हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है। सोमवार रात हॉस्पिटल मोड़ पर जाम की स्थिति के बीच प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठे। इसी दौरान शहर के पी देवी मोड़ के पास आग लगने की घटना भी सामने आई। ऐसे समय में यातायात सुचारु रखने और आपात स्थिति में रास्ता उपलब्ध कराने की जरूरत थी। लेकिन सामने आई तस्वीरों के अनुसार, एसडीओ आशुतोष गुप्ता और डीडीसी अमिताभ सिंह एक पूजा पंडाल में आरती में शामिल थे। दोनों अधिकारियों की सरकारी गाड़ियां सड़क पर खड़ी थीं। बताया जा रहा है कि अधिकारी करीब 20 मिनट तक आरती में शामिल रहे। इस दौरान हॉस्पिटल मोड़ पर जाम लगा रहा और श्रद्धालु व आम लोग परेशान होते रहे। आरती के बाद अधिकारियों की गाड़ियां वीआईपी लाइट जलाते हुए वहां से निकलीं, जिसके बाद यातायात सामान्य होने लगा। आदेश जारी, लेकिन सड़कों पर नहीं दिखा असर दुर्गा पूजा मेले में भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने और रूट डायवर्जन की व्यवस्था की है। इसके बावजूद सड़कों पर वाहनों का परिचालन जारी रहने से श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है। भीड़ के बीच वाहनों की आवाजाही से भगदड़ या सड़क हादसे जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा भी बना रहता है। आपात स्थिति में रास्ता उपलब्ध कराना जरूरी दुर्गा पूजा जैसे बड़े आयोजन के दौरान यातायात नियंत्रित रखना, श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आग जैसी आपात स्थिति में राहत-बचाव के लिए रास्ता खाली रखना प्रशासन की अहम जिम्मेदारी है। ऐसे में जाम के बीच सरकारी गाड़ियों के सड़क पर खड़े रहने की तस्वीरों ने यातायात प्रबंधन और अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं।

