रावल मल्लीनाथ मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा यात्रा मेवानगर पहुंची:क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधियों ने मंदिर के लिए 15.69 लाख देने की घोषणा की

रावल मल्लीनाथ मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा यात्रा मेवानगर पहुंची:क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधियों ने मंदिर के लिए 15.69 लाख देने की घोषणा की

श्री रावल मल्लीनाथ जी के भव्य मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर निमंत्रण और श्रद्धासुमन यात्रा सोमवार को मेवानगर गांव पहुंची। इस यात्रा का नेतृत्व महंत गणेशपुरी महाराज और हरिशचंद्र सिंह जसोल कर रहे हैं। मेवानगर में क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधियों ने यात्रा का जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर उन्होंने मंदिर निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए कुल ₹15.69 लाख की राशि देने की घोषणा की। श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान, तिलवाड़ा यह यात्रा निकाल रहा है। संस्थान के सचिव सुमेर सिंह वरिया ने बताया कि मालाजाल-तिलवाड़ा परिसर में मंदिर का निर्माण चल रहा है। प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव 2 सितंबर 2027 को होगा। यह यात्रा शारदीय नवरात्र की बीज पर श्री रावल मल्लीनाथ जी की जन्मस्थली गोपड़ी से शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य महोत्सव में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ना है। मेवानगर रही श्री रावल मल्लीनाथ जी की ऐतिहासिक राजधानी
गौरतलब है कि मेवानगर संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी की ऐतिहासिक राजधानी रही है। श्री रावल मल्लीनाथ जी मालाणी क्षेत्र के महान शासक, अद्वितीय योद्धा, धर्मरक्षक, कुशल रणनीतिकार, लोककल्याणकारी संत एवं सामाजिक समरसता के प्रेरणास्रोत के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनके शासनकाल में मेवानगर मालाणी क्षेत्र की राजनीतिक, प्रशासनिक, सामरिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा। इसी ऐतिहासिक राजधानी से राज्य की शासन व्यवस्था संचालित होती थी तथा राज्य की सुरक्षा, सीमाओं की रक्षा एवं सैन्य अभियानों से संबंधित महत्त्वपूर्ण रणनीतियों का निर्धारण किया जाता था। श्री रावल मल्लीनाथ जी ने अपने जीवनकाल में अनेक युद्ध लड़े तथा अपने अदम्य शौर्य, पराक्रम, साहस एवं कुशल युद्धनीति से ऐतिहासिक विजय प्राप्त की। उनके द्वारा लड़े गए युद्धों में 5 प्रमुख युद्ध विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं, जिनमें उन्होंने विद्रोही शक्तियों के विरुद्ध विजय प्राप्त कर सनातन धर्म की रक्षा की तथा उसका संरक्षण किया। उनके समस्त विजयी अभियानों ने मालाणी क्षेत्र की सुरक्षा, राज्य की एकता तथा धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को सुदृढ़ आधार प्रदान किया। उनकी अद्वितीय वीरता, सामरिक दूरदर्शिता, धर्मनिष्ठा एवं कुशल नेतृत्व ने उन्हें मालाणी क्षेत्र के इतिहास में एक महान योद्धा, धर्मरक्षक एवं लोकपूज्य संत के रूप में विशिष्ट स्थान प्रदान किया। मेवानगर की ऐतिहासिक भूमि श्री रावल मल्लीनाथ जी के शौर्य, पराक्रम एवं लोककल्याणकारी शासन की साक्षी रही है। इसी राजधानी से उन्होंने प्रजा की सुरक्षा, राज्य की एकता, धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण तथा जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शासन संचालित किया। आज भी मेवानगर की ऐतिहासिक पहचान उनकी गौरवशाली राजधानी तथा शौर्य एवं विजयी अभियानों की स्मृतियों से जुड़ी हुई है। श्री रावल मल्लीनाथ जी के पश्चात उनके उत्तराधिकारी रावल भारमल जी तक मेवानगर से शासन संचालित होता रहा। इसके पश्चात रावल जेतमाल जी ने 18वीं शताब्दी (विक्रम संवत 1759) में जसोल आकर अपनी राजधानी स्थापित की। तभी से जसोल इस गौरवशाली रावल वंश की परंपरागत राजधानी एवं गादी का प्रमुख केंद्र है। इसी ऐतिहासिक वंश परंपरा में संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी के 25वें गादीपति के रूप में वर्तमान रावल किशन सिंह जसोल अपने पैतृक ठिकाने जसोल में परंपरागत गादी पर विराजमान हैं। मेवानगर की ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत के अंतर्गत 17वीं शताब्दी में रावल जगमाल जी द्वितीय द्वारा श्री ठाकुर जी के मंदिर का निर्माण करवाया गया था, जिसका कालांतर में रावल भारमल जी ने जीर्णोद्धार करवाया। निमंत्रण एवं श्रद्धासुमन यात्रा के दौरान इस ऐतिहासिक मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। साथ ही रावल मेघराज जी के समय निर्मित श्री भूतेश्वर महादेव मंदिर तथा श्री चक्रेश्वरी माता जी मंदिर, श्री हनुमान जी मंदिर, श्री गोगा जी मंदिर एवं श्री भैरूजी मंदिर में भी दर्शन-पूजन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं मंगलमय भविष्य की कामना की गई। सोमवार को यात्रा के दौरान पूज्य महंत गणेशपुरी महाराज के पावन सान्निध्य में क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधियों से आत्मीय भेंट कर मंदिर निर्माण एवं आगामी प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव की जानकारी दी गई। साथ ही सर्व समाज से महोत्सव में सपरिवार सहभागिता का आह्वान किया गया। इस दौरान क्षत्रिय समाज के सरदारों ने श्रद्धा एवं उत्साह के साथ अपने भाव के अनुरूप श्रद्धासुमन अर्पित करने की ओळियां लगाईं। मेवानगर में निम्नलिखित क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधियों ने श्रद्धासुमन राशि अर्पित करने की घोषणा की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरिशचंद्र सिंह जसोल ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी एवं श्री राणी रूपादे जी मालाणी की धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक एकता के प्रमुख आधार हैं। श्री रावल मल्लीनाथ जी के भव्य मंदिर का निर्माण मालाणी की गौरवशाली धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा उनके शौर्य, पराक्रम, धर्मनिष्ठा, कुशल नेतृत्व, ऐतिहासिक विजयों एवं लोककल्याणकारी आदर्शों को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्त्वपूर्ण प्रयास है। श्री राणी रूपादे जी की भक्ति, समानता, सामाजिक समरसता एवं मानव सेवा की प्रेरणादायी परंपरा समाज को एकता एवं सद्भाव का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि मेवानगर की ऐतिहासिक भूमि का श्री रावल मल्लीनाथ जी के जीवन एवं गौरवशाली शासनकाल से विशेष संबंध रहा है। इस ऐतिहासिक राजधानी के क्षत्रिय समाज के सरदारों द्वारा मंदिर निर्माण के प्रति व्यक्त श्रद्धा, उत्साह एवं उदारतापूर्वक श्रद्धासुमन अर्पित करने की घोषणाएं अत्यंत सराहनीय हैं। उन्होंने सर्व समाज से आगामी प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में अधिकाधिक सहभागिता का आह्वान किया। इस यात्रा का उद्देश्य श्री रावल मल्लीनाथ जी द्वारा स्थापित मालाणी क्षेत्र के उन सभी गांवों तक पहुंचना है, जहां उनके वंशज एवं परिवारजन निवास करते हैं। यात्रा के दौरान इन गांवों में पहुंचकर उनसे मालाजाल–तिलवाड़ा में श्री रावल मल्लीनाथ जी के नवनिर्मित मंदिर के निर्माण के लिए उनके भाव के अनुरूप श्रद्धासुमन अर्पित करने का आह्वान किया जाएगा। आगामी प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव की योजना पर विस्तार से चर्चा कर उनके माध्यम से संपूर्ण मालाणी क्षेत्र की छत्तीस कौम को इस ऐतिहासिक एवं भव्य प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में सहभागी बनने का आह्वान करते हुए आमंत्रित किया जाएगा।

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