बैतूल जिले में कम बारिश और मानसून की जल्दी विदाई का असर अब रबी सीजन पर भी पड़ने लगा है। किसान धान, मूंगफली और गन्ने की फसल बचाने के लिए कुओं और ट्यूबवेल से सिंचाई कर रहे हैं। इससे रबी की बोवनी के लिए पानी कम बचने की आशंका है। जिले में इस बार रबी की खेती का रकबा 41% तक घटने का अनुमान है। जिले के 200 बांधों में से 127 में 50% तक ही पानी भर पाया है। जल उपयोगिता समिति ने कम पानी वाले बांधों से सिंचाई के लिए पानी नहीं देने का फैसला किया है। बाकी 73 बांधों से भी किसानों को केवल एक या दो बार पानी मिल सकेगा। जिले में सामान्य औसत बारिश 1083.9 मिलीमीटर है, जबकि इस साल 721 मिलीमीटर बारिश हुई। यह सामान्य से करीब 33.5% कम है। बारिश की कमी का असर जलाशयों और भूजल स्तर पर भी पड़ा है। धान, मूंगफली और गन्ने की फसल बचाने में खर्च हो रहा पानी मानसून की विदाई के बाद खेतों की नमी तेजी से कम हुई है। धान की फसल को पकने में अभी समय है। इसलिए किसान सिंचाई कर रहे हैं। पाढर के किसान रिंकू मालवीय और अशोक राठौर के मुताबिक, धान की फसल नवंबर के दूसरे पखवाड़े में पककर तैयार होती है। बारिश बंद होने के कारण अक्टूबर की शुरुआत से ही खेतों में पानी देना पड़ रहा है। नीमपानी के उन्नत कृषक अजय बाजपेयी के अनुसार, खेतों में नमी कम होने से मूंगफली निकालने में परेशानी हो रही है। जमीन सूखने से पौधे खींचने पर टूट जाते हैं और फलियां मिट्टी में ही रह जाती हैं। इसलिए मूंगफली निकालने से पहले खेत में पानी देना पड़ रहा है। गन्ने की फसल को भी सिंचाई की जरूरत है। किसान फिलहाल खरीफ की खड़ी फसलों को बचाने में जुटे हैं, लेकिन उन्हें रबी की बोवनी के लिए पानी बचाने की चिंता भी है। 127 बांधों से सिंचाई के लिए नहीं मिलेगा पानी जल उपयोगिता समिति ने कम जलभराव वाले बांधों का पानी पेयजल और निस्तार के लिए सुरक्षित रखने का फैसला किया है। 50% से कम भरे बांधों से सिंचाई के लिए पानी नहीं दिया जाएगा। वहीं, 50 से 70% तक भरे बांधों से खेती के लिए एक या दो बार पानी देने की व्यवस्था की जाएगी। इससे उन किसानों को परेशानी हो सकती है, जो सिंचाई के लिए बांधों पर निर्भर हैं। उन्हें उपलब्ध पानी के अनुसार फसल का चयन करना होगा। कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की ओर रुख बढ़ सकता है। पेयजल के लिए भी बांधों में पानी आरक्षित कम बारिश के बीच शहरों और गांवों में पेयजल की जरूरत पूरी करना भी चुनौती है। बैतूल शहर की जलापूर्ति माचना और ताप्ती नदी से जुड़े जलस्रोतों पर निर्भर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, माचना पर बने लाखापुर बांध में 2.56 मिलियन घनमीटर पानी आरक्षित किया गया है। पारसडोह और घोघरी बांधों में भी पानी सुरक्षित रखा गया है। इन जलस्रोतों से बैतूल और बुरहानपुर जिलों की जरूरत के अनुसार पानी छोड़ा जाता है। वहीं, आठनेर के लिए बाकुड़ बांध में 1.2 मिलियन घनमीटर और बैतूल के लिए गढ़ा बांध में 2 मिलियन घनमीटर पानी आरक्षित रखने की जानकारी है। पेयजल और निस्तार के लिए पानी सुरक्षित रखने के कारण सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी सीमित हो गया है। ऐसे में जलस्रोतों का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार करना जरूरी है, ताकि गर्मी से पहले पेयजल संकट की स्थिति न बने। 24 दिन से बारिश नहीं, अगले कुछ दिनों में राहत की उम्मीद कम जिले में 26 सितंबर के बाद से बारिश नहीं हुई है। 19 अक्टूबर तक लगातार 24 दिन बारिश नहीं होने से खेतों की नमी और जलस्रोतों में पानी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के बैतूल केंद्र ने 18 अक्टूबर को जारी पूर्वानुमान में 19 से 23 अक्टूबर तक आसमान साफ रहने और 24 अक्टूबर को आंशिक बादल छाने की संभावना जताई थी। इस दौरान बारिश की चेतावनी नहीं दी गई थी। अधिकतम तापमान 32 से 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 19 से 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान था। इस पूर्वानुमान के अनुसार, अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश से राहत मिलने की उम्मीद कम है। 25 अक्टूबर के बाद मौसम कैसा रहेगा, यह ताजा आधिकारिक पूर्वानुमान से ही स्पष्ट होगा। रबी की खेती का रकबा घटने की आशंका खरीफ की फसलों को बचाने में पानी खर्च होने और बांधों से सीमित सिंचाई मिलने के कारण रबी की खेती प्रभावित होने की आशंका है। किसानों को उपलब्ध पानी के हिसाब से बोवनी का रकबा तय करना होगा। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई और जलस्रोतों में पानी नहीं बढ़ा, तो जिले में रबी की खेती का क्षेत्र घट सकता है। इसका असर फसल उत्पादन और किसानों की आय पर भी पड़ने की आशंका है।

