अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की शाश्वत जीत का महापर्व विजयादशमी इस बार बेहद खास संयोग लेकर आ रहा है। मुरादाबाद के जाने-माने ज्योतिर्विद सुरेंद्र आचार्य ने पंचांग गणना के आधार पर त्योहार के धार्मिक महत्व और पूजा के अचूक शुभ मुहूर्त की विस्तृत जानकारी साझा की है। आचार्य सुरेंद्र के अनुसार, विजयादशमी के पावन अवसर पर शस्त्र पूजन, विजय मुहूर्त और रावण दहन के लिए समय का विशेष ध्यान रखना भक्तों के लिए अत्यधिक फलदायी साबित होगा। ज्योतिर्विद सुरेंद्र आचार्य ने बताया कि 20 अक्टूबर को विजयादशमी पर ‘विजय मुहूर्त’ में पूजा-अर्चना करना विशेष रूप से कल्याणकारी और शुभ माना जाता है। इस वर्ष शस्त्र पूजन और विजय मुहूर्त का पावन समय दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से शुरू होकर दोपहर 2 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। सनातन परंपरा के अनुसार, इस विशिष्ट समयावधि में मां दुर्गा, भगवान श्रीराम और अपने शस्त्रों की विधि-विधान से पूजा करने का विधान है। अधार्मिक प्रवृत्तियों के विनाश के प्रतीक ‘रावण दहन’ के समय को लेकर आचार्य जी ने स्पष्ट किया है कि रावण दहन हमेशा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में किया जाना चाहिए। इस बार रावण दहन के लिए अनुकूल और शुभ समय सायं 5:45 बजे से लेकर रात्रि 8:30 बजे तक रहेगा। इस समयावधि में पुतला दहन करना शास्त्रों के सम्मत और सर्वोत्तम है। पर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुरादाबाद के ज्योतिर्विद ने कहा कि इसी गौरवशाली दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का संहार कर माता सीता को मुक्त कराया था। यही कारण है कि यह पर्व सदियों से समाज को अधर्म पर धर्म की विजय का अटूट संदेश देता आ रहा है। इसके साथ ही, यह दिन महिषासुर जैसी आसुरी शक्ति पर आदिशक्ति मां दुर्गा की प्रचंड विजय की स्मृति का भी उत्सव है। आचार्य सुरेंद्र ने आगे बताया कि शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों की कठिन साधना के समापन पर इस दिन भक्त भावपूर्ण तरीके से देवी स्वरूपा मां दुर्गा की विदाई और उनकी प्रतिमाओं का विसर्जन करते हैं। दशहरा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि मानव जीवन को सदैव साहस, सत्य और धर्म के मार्ग पर निष्ठापूर्वक चलने की महान प्रेरणा देने वाला पर्व है।

