सिटी रिपोर्टर|बेतिया शहर के पूर्वी करगहिया स्थित बेतिया राज की 6 एकड़ जमीन की अंचल के अभिलेखों में हेराफेरी कर परिमार्जन कर जमाबंदी कायम करने के मामले में सदर सीओ,तत्कालीन प्रधान सहायक, राजस्व कर्मचारी सहित अन्य लोग कार्रवाई के जद में आ गए हैं। तीन सदस्यीय जांच कमिटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद जिलाधिकारी तरनजोत सिंह के निर्देश पर एसडीएम राजीव रंजन सिन्हा ने संबंधित लोगों से स्पष्टीकरण मांगी है। साथ ही उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। बता दें कि बेतिया राज की जमीन की अवैध रुप से जमाबंदी कायम करने का मामला डीएम के संज्ञान में आया था। उसके बाद संबंधित अभिलेखों को दुरुस्त करने की कवायद शुरू कर दी गयी है। वहीं, अगस्त माह में परिमार्जन के माध्यम से कायम की गयी जमाबंदी के खाता-खेसरा को ऑनलाइन रिकॉर्ड में पुनः शून्य कर दिया गया है। बेतिया अंचल के मौजा पूर्वी करगहिया में जमाबंदी संख्या 105 का संधारण है। पूर्व के मैनुअल रजिस्टर-2 में यह जमाबंदी दर्ज है। बाद में इसी जमाबंदी की वेब कॉपी में हाथ से विभिन्न खाता-खेसरा अंकित किये जाने की बात सामने आयी है। इसके बाद अगस्त माह में परिमार्जन के माध्यम से जमाबंदी में सुधार करते हुए अलग-अलग खाता-खेसरा की करीब छह एकड़ भूमि दर्ज कर दी गयी। मामला डीएम के संज्ञान में आने के बाद जमाबंदी संख्या 105 में ऑनलाइन अंकित किये गये संबंधित खाता-खेसरा को शून्य कर दिया गया है। हालांकि, ऑनलाइन रिकॉर्ड में पूर्ण रकबा अभी भी 53 डिसमिल दर्शाया जा रहा है। मामले में बता दें कि ऐसे में जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि अभिलेखों में खाता-खेसरा दर्ज करने की प्रक्रिया में किन स्तरों पर अनियमितता हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। सिटी रिपोर्टर|बेतिया शहर के पूर्वी करगहिया स्थित बेतिया राज की 6 एकड़ जमीन की अंचल के अभिलेखों में हेराफेरी कर परिमार्जन कर जमाबंदी कायम करने के मामले में सदर सीओ,तत्कालीन प्रधान सहायक, राजस्व कर्मचारी सहित अन्य लोग कार्रवाई के जद में आ गए हैं। तीन सदस्यीय जांच कमिटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद जिलाधिकारी तरनजोत सिंह के निर्देश पर एसडीएम राजीव रंजन सिन्हा ने संबंधित लोगों से स्पष्टीकरण मांगी है। साथ ही उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। बता दें कि बेतिया राज की जमीन की अवैध रुप से जमाबंदी कायम करने का मामला डीएम के संज्ञान में आया था। उसके बाद संबंधित अभिलेखों को दुरुस्त करने की कवायद शुरू कर दी गयी है। वहीं, अगस्त माह में परिमार्जन के माध्यम से कायम की गयी जमाबंदी के खाता-खेसरा को ऑनलाइन रिकॉर्ड में पुनः शून्य कर दिया गया है। बेतिया अंचल के मौजा पूर्वी करगहिया में जमाबंदी संख्या 105 का संधारण है। पूर्व के मैनुअल रजिस्टर-2 में यह जमाबंदी दर्ज है। बाद में इसी जमाबंदी की वेब कॉपी में हाथ से विभिन्न खाता-खेसरा अंकित किये जाने की बात सामने आयी है। इसके बाद अगस्त माह में परिमार्जन के माध्यम से जमाबंदी में सुधार करते हुए अलग-अलग खाता-खेसरा की करीब छह एकड़ भूमि दर्ज कर दी गयी। मामला डीएम के संज्ञान में आने के बाद जमाबंदी संख्या 105 में ऑनलाइन अंकित किये गये संबंधित खाता-खेसरा को शून्य कर दिया गया है। हालांकि, ऑनलाइन रिकॉर्ड में पूर्ण रकबा अभी भी 53 डिसमिल दर्शाया जा रहा है। मामले में बता दें कि ऐसे में जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि अभिलेखों में खाता-खेसरा दर्ज करने की प्रक्रिया में किन स्तरों पर अनियमितता हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

